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आरती (Aarti)

माँ सरस्वती आरती (Maa Saraswati Aarti)

जुलाई 19, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

माँ सरस्वती आरती: हिंदू धर्म में विद्या, ज्ञान, संगीत, कला और बुद्धि की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती को विशेष सम्मान प्राप्त है। माँ सरस्वती ब्रह्मा जी की पत्नी हैं। उनका स्वरूप अत्यंत शांत और तेजस्वी है। वे श्वेत वस्त्र धारण करती हैं, कमल पर विराजमान रहती हैं और उनके हाथ में वीणा, पुस्तक, माला तथा वर मुद्रा होती है। उनका वाहन हंस है, जो सत्य और विवेक का प्रतीक है। पुराणों के अनुसार, माँ सरस्वती ने ब्रह्मांड की सृष्टि में ब्रह्मा जी की सहायता की थी। वे वाणी की देवी हैं। उनकी पूजा से बुद्धि तेज होती है, स्मरण शक्ति बढ़ती है और सभी विद्याओं में सफलता मिलती है। वसंत पंचमी, नवरात्रि के आठवें दिन (महाष्टमी) के दिन उनकी पूजा का विशेष महत्व है। माँ सरस्वती आरती भक्तों के हृदय में ज्ञान की ज्योति जगाती है और अज्ञान के अंधकार को दूर करती है। यह आरती विद्यार्थियों, कलाकारों, संगीतकारों और ज्ञान प्रेमियों के लिए अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

माँ सरस्वती आरती हिन्दी में
(Maa Saraswati Aarti in Hindi)

ओइम् जय वीणे वाली,
मैया जय वीणे वाली
ऋद्धि-सिद्धि की रहती,
हाथ तेरे ताली

ऋषि मुनियों की बुद्धि को,
शुद्ध तू ही करती
स्वर्ण की भाँति शुद्ध,
तू ही माँ करती॥

ज्ञान पिता को देती,
गगन शब्द से तू
विश्व को उत्पन्न करती,
आदि शक्ति से तू॥

हंस-वाहिनी दीज,
भिक्षा दर्शन की
मेरे मन में केवल,
इच्छा तेरे दर्शन की॥

ज्योति जगा कर नित्य,
यह आरती जो गावे
भवसागर के दुख में,
गोता न कभी खावे॥

माँ सरस्वती आरती इंग्लिश में
(Maa Saraswati Aarti in
English)

Om Jai Veene Wali, Maiya Jai Veene Wali।
Ridhi Sidhi Ki Rahti, Haath Tere Taali॥
Rishi Nuniyo Ki Budhi Ko, Shudh Tu Hi Karti।
Swarn Ki Bhati, Shudh Tu Hi Karti॥ 1 ॥

Gyaan Pita Ko Deti, Gagan Shabdh Se Tu।
Vishva Ko Utpan Karti, Aadhi Shakti Se Tu॥ 2 ॥

Hans-Vahini Dije, Bhiksha Darshan Ki।
Mere Mann Mein Kewal, Iccha Darshan Ki॥ 3 ॥

Jyoti Jagakar Nitya, Yeh Aarti Jo Gaave।
Bhavsagar Ke Dukh Mein, Gota Na Kabhi Khaave॥ 4 ॥

माँ सरस्वती के प्रसिद्ध मंदिर (Maa Saraswati Famous Temples)

1. ज्ञान सरस्वती मंदिर, बासर (तेलंगाना)

  • यह भारत के सबसे प्रसिद्ध सरस्वती मंदिरों में से एक है। गोदावरी नदी के तट पर स्थित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद महर्षि वेद व्यास ने यहाँ देवी सरस्वती की तपस्या की थी यहाँ बच्चों के लिए ‘अक्षर अभ्यासम’ (शिक्षा की शुरुआत) रस्म विशेष रूप से की जाती है।

2. शारदाम्बा मंदिर, श्रृंगेरी (कर्नाटक)

  • तुंगभद्रा नदी के किनारे स्थित यह मंदिर 8वीं शताब्दी में आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित किया गया था यह दक्षिण भारत में ज्ञान और विद्या का सबसे बड़ा केंद्र माना जाता है यहाँ देवी सरस्वती ‘शारदा’ (विद्या की देवी) के रूप में विराजमान हैं

3. सरस्वती उद्गम मंदिर, माणा (उत्तराखंड)

  • बद्रीनाथ धाम से लगभग 3 किलोमीटर दूर भारत के अंतिम (और प्रथम) गाँव ‘माणा’ में सरस्वती नदी के तट पर यह एक छोटा लेकिन अत्यंत पवित्र मंदिर है पौराणिक मान्यता है कि सृष्टि में पहली बार देवी सरस्वती इसी स्थान पर प्रकट हुई थीं

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1.माँ सरस्वती कौन हैं?
  • माँ सरस्वती ज्ञान, शिक्षा, संगीत, रचनात्मकता और वाणी की सर्वोच्च देवी हैं। उन्हें वेदों की माता (वेदमाता) भी
  • 2. माँ सरस्वती के अन्य नाम कौन-से हैं?
  • उन्हें शारदा, वीणावादिनी, वाग्देवी, भारती, ब्राह्मी और हंसवाहिनी सहित कई नामों से पुकारा जाता है।कहा जाता है।
  • 3. माँ सरस्वती की उत्पत्ति कैसे हुई?
  • हिन्दू पौराणिक कथाओं में उनकी उत्पत्ति के कई प्रसंग हैं। एक प्रमुख कथा के अनुसार, जब सृष्टि के रचयिता ब्रह्मा जी को दुनिया बनाने के लिए ज्ञान और बुद्धि की आवश्यकता हुई, तो उनके मुख से देवी सरस्वती प्रकट हुईं। कुछ ग्रंथों में उन्हें “ॐ” (प्रणव नाद) की ध्वनि से उत्पन्न भी माना गया है।
  • 4. माँ सरस्वती का वाहन क्या है?
  • देवी का वाहन ‘हंस’ (श्वेत राजहंस) है। हंस विवेक और बुद्धि का प्रतीक है, जो यह सिखाता है कि सत्य और असत्य में कैसे भेद किया जाए।
  • 5. माँ सरस्वती को किस रंग के वस्त्र और फूल पसंद हैं?
  • माँ सरस्वती को श्वेत (सफेद) रंग अत्यंत प्रिय है, जो पवित्रता, शांति और सात्विकता का प्रतीक है। उनकी पूजा में पीले रंग के वस्त्र और फूलों का भी बहुत महत्व है, विशेष रूप से वसंत ऋतु में।
  • 6. सरस्वती पूजा (बसंत पंचमी) का क्या महत्व है?
  • माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को बसंत पंचमी या सरस्वती जयंती के रूप में मनाया जाता है। यह दिन विद्या और कला की शुरुआत करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। इस दिन छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लिखना भी सिखाया जाता है।
  • 7. देवी सरस्वती के हाथों में क्या-क्या है और इसका क्या महत्व है?
    माँ सरस्वती के चार हाथ मानव चेतना के चार पहलुओं—मन, बुद्धि, अहंकार और चित्त (कल्पना) का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके हाथों में:
  • पुस्तक (वेद): यह शाश्वत और दिव्य ज्ञान को दर्शाती है।
  • वीणा: यह कला, संगीत और सामंजस्य (संतुलन) का प्रतीक है।
  • स्फटिक की माला (जप माला): यह ध्यान और आध्यात्मिक साधना को दर्शाती है।
  • कमल का फूल या जलपात्र: यह पवित्रता और सत्य के प्रति समर्पण का प्रतीक है।

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You can also read Maa Saraswati Aarti Lyrics in English

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