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श्री सूर्याष्टोत्तरशतानाम स्तोत्र – सूर्य देव की महिमा का दिव्य वर्णन (Shri Suryashtotarshatanam Stotra Lyrics with Meaning) – ज्ञान के बातें

दिसम्बर 15, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

श्री सूर्याष्टोत्तरशतानाम स्तोत्र भगवान सूर्य देव को समर्पित है उन्हे हिंदू धर्म में जगत की आत्मा माना जाता है। वे प्रकाश, ऊर्जा और जीवन के स्रोत हैं। श्री सूर्याष्टोत्तरशतनाम स्तोत्र महाभारत के वनपर्व में वर्णित है, जहां धौम्य ऋषि ने युधिष्ठिर को यह स्तोत्र बताया था। इसमें सूर्य देव के 108 पवित्र नाम हैं, जिनका पाठ करने से भक्तों की स्वास्थ्य, बुद्धि, धन और सभी मनोकामनाएं प्राप्त होती हैं। यह स्तोत्र सूर्य पूजा के दौरान विशेष रूप से पढ़ा जाता है, जैसे रविवार को या छठ पूजा में। ईसके नियमित पाठ से नेत्र ज्योति बढ़ती है, रोग दूर होते हैं और सकारात्मक ऊर्जा मिलती है।

श्री सूर्याष्टोत्तरशतानाम स्तोत्र का इतिहास और महत्व

श्री सूर्याष्टोत्तरशतानाम स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधित समस्याओं से छुटकारा मिलता है ईसमें भगवान सूर्यदेव के 108 दिव्य नामों का जाप है। इस स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और उसे जीवन के सभी कष्टों से छुटकारा मिलता है साथ ही व्यक्ति को मनचाहे फलों की प्राप्ति होता है

श्री सूर्याष्टोत्तरशतानाम स्तोत्र के संस्कृत श्लोक एवं हिन्दी अर्थ

सूर्योऽर्यमा भगस्त्वष्टा पूषार्क: सविता रवि:।

गभस्तिमानज: कालो मृत्युर्धाता प्रभाकर:।।

पृथिव्यापश्च तेजश्च खं वायुश्च परायणम्।

सोमो बृहस्पति: शुक्रो बुधो अंगारक एव च।।

इन्द्रो विवस्वान् दीप्तांशु: शुचि: शौरि: शनैश्चर:।

ब्रह्मा विष्णुश्च रुद्रश्च स्कन्दो वै वरुणो यम:।।

वैद्युतो जाठरश्चाग्नि रैन्धनस्तेजसां पति:।

धर्मध्वजो वेदकर्ता वेदांगो वेदवाहन:।।

कृतं त्रेता द्वापरश्च कलि: सर्वमलाश्रय:।

कला काष्ठा मुहूर्त्ताश्च क्षपा यामस्तथा क्षण:।।

संवत्सरकरोऽश्वत्थ: कालचक्रो विभावसु:।

पुरुष: शाश्वतो योगी व्यक्ताव्यक्त: सनातन:।।

कालाध्यक्ष: प्रजाध्यक्षो विश्वकर्मा तमोनुद:।

वरुण: सागरोंऽशश्च जीमूतो जीवनोऽरिहा।।

भूताश्रयो भूतपति: सर्वलोकनमस्कृत:।

स्रष्टा संवर्तको वह्नि: सर्वस्यादिरलोलुप:।।

अनन्त: कपिलो भानु: कामद: सर्वतोमुख:।

जयो विशालो वरद: सर्वधातुनिषेचिता।।

मन:सुपर्णो भूतादि: शीघ्रग: प्राणधारक:।

धन्वन्तरिर्धूमकेतुरादिदेवो दिते: सुत:।।

द्वादशात्मारविन्दाक्ष: पिता माता पितामह:।

स्वर्गद्वारं प्रजाद्वारं मोक्षद्वारं त्रिविष्टपम्।।

देहकर्ता प्रशान्तात्मा विश्वात्मा विश्वतोमुख:।

चराचरात्मा सूक्ष्मात्मा मैत्रेय: करुणान्वित:।।

श्री सूर्याष्टोत्तरशतानाम स्तोत्र हिंदी अनुवाद और अर्थ

सूर्य के अष्टोत्तरशतनामों में कुछ नाम ऐसे हैं जो उनकी परब्रह्मरूपता प्रकट करते हैं जैसे– *अश्वत्थ, शाश्वतपुरुष, सनातन, सर्वादि, अनन्त, प्रशान्तात्मा, विश्वात्मा, विश्वतोमुख, सर्वतोमुख, चराचरात्मा, सूक्ष्मात्मा।*

सूर्य की त्रिदेवरूपता बताने वाले नाम हैं– *ब्रह्मा, विष्णु, रुद्र, शौरि, वेदकर्ता, वेदवाहन, स्रष्टा, आदिदेव व पितामह।* सूर्य से ही समस्त चराचर जगत का पोषण होता है और सूर्य में ही लय होता है, इसे बताने वाले सूर्य के नाम हैं– *प्रजाध्यक्ष, विश्वकर्मा, जीवन, भूताश्रय, भूतपति, सर्वधातुनिषेविता, प्राणधारक, प्रजाद्वार, देहकर्ता और चराचरात्मा।*

सूर्य का नाम काल है और वे काल के विभाजक है, इसलिए उनके नाम हैं– *कृत, त्रेता, द्वापर, कलियुग, संवत्सरकर, दिन, रात्रि, याम, क्षण, कला, काष्ठा–मुहुर्तरूप समय।*

सूर्य ग्रहपति हैं इसलिए एक सौ आठ नामों में सूर्य के *सोम, अंगारक, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनैश्चर व धूमकेतु नाम भी हैं।*

उनका ‘व्यक्ताव्यक्त’ नाम यह दिखाता है कि वे शरीर धारण करके प्रकट हो जाते हैं। *कामद, करुणान्वित* नाम उनका देवत्व प्रकट करते हुए यह बताते हैं कि सूर्य की पूजा से इच्छाओं की पूर्ति होती है।

सूर्य के नाम मोक्षद्वार, स्वर्गद्वार व त्रिविष्टप यह प्रकट करते हैं कि सूर्योपासना से स्वर्ग की प्राप्ति होती हैं। उत्तारायण सूर्य की प्रतीक्षा में भीष्मजी ने अट्ठावन दिन शरशय्या पर व्यतीत किए। गीता में कहा गया है–उत्तरायण में मरने वाले ब्रह्मलोक को प्राप्त करते हैं। सूर्य के सर्वलोकनमस्कृत नाम से स्पष्ट है कि सूर्यपूजा बहुत व्यापक है।

श्री सूर्याष्टोत्तरशतानाम स्तोत्र के लाभ और जाप विधि

श्री सूर्याष्टोत्तरशतानाम स्तोत्र का पाठ करने से शारीरिक स्वास्थ्य और ऊर्जा बढ़ती है। और त्वचा संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। ईस स्तोत्र का नियमित पाठ करने से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं, घर में धन-धान्य की वृद्धि होती है। और व्यक्ति की नकारात्मक ऊर्जा और शोक भी दूर होते हैं। सूर्य देव की कृपा से आत्मविश्वास और बुद्धि प्राप्त होती है।

जाप विधि:

श्री सूर्याष्टोत्तरशतानाम स्तोत्र का पाठ करने से पहले स्नान करे फिर घर की पूर्व दिशा में एक शांत स्थान पर बैठें और सूर्य देव की प्रतिमा या तस्वीर रखें। तांबे का लोटा, लाल फूल, अक्षत, सिंदूर और मिश्री सूर्य देव को अर्पित करे अब श्रद्धा और ध्यान के साथ सूर्याष्टोत्तरशतानाम स्तोत्र का पाठ करे पाठ पूरा होने के बाद “ॐ सूर्याय नमः मंत्र का 108 बार जाप करे लगातार 21 दिन या पूर मास के रविवार को जाप करने से व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं

निष्कर्ष

रविवार को सूर्य देव को जल अर्पित करते हुए इस स्तोत्र का पाठ करें। अधिक जानकारी के लिए हमारी साइट gyankibaatein.com पर अन्य स्तोत्र जैसे शिव तांडव स्तोत्र या दुर्गा स्तोत्र जरूर पढ़ें। जय सूर्य देव!

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