दिल्ली की व्यस्त जिंदगी में शांति और आध्यात्मिकता की तलाश करने वालों के लिए अक्षरधाम मंदिर एक बेहतरीन जगह है। यमुना नदी के किनारे बसा यह भव्य मंदिर कॉम्प्लेक्स न सिर्फ वास्तुकला का अद्भुत नमूना है, बल्कि भारतीय संस्कृति, इतिहास और आध्यात्मिकता को एक जगह समेटे हुए है। स्वामीनारायण अक्षरधाम के नाम से भी जाना जाने वाला यह मंदिर हर साल लाखों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के बीच आकर्षित का कारण बनाता है। अक्षरधाम मंदिर को स्वामीनारायण अक्षरधाम मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। ये दिल्ली के सबसे अच्छे पर्यटक आकर्षणों में से एक है। ये अद्भुत मंदिर नई दिल्ली में नोएडा मोड़ के पास स्थित है। इस मंदिर का निर्माण बोचासनवासी श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (BAPS) द्वारा किया गया था।
अक्षरधाम मंदिर का इतिहास
अक्षरधाम मंदिर का उद्घाटन 6 नवंबर 2005 में किया गया था। जबकि 8 नवंबर 2005 को ईस आम लोगों के लिए खोल दिया गया था। इस मंदिर के निर्माण में भगवान स्वामीनारायण की आध्यात्मिक परंपरा के पांचवे उत्तराधिकारी ‘प्रमुख स्वामी महाराज’ की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। ये मंदिर भूमि क्षेत्र हिसाब से दुनिया के सबसे बड़े मंदिरों में से एक है। ये अन्य मंदिरों की तरह कोई साधारण मंदिर नहीं है। अक्षरधाम मंदिर का पूरा परिसर 100 एकड़ भूमि में फैला हुआ है। मंदिर को बनाने में 11 हजार से ज्यादा कारीगरों को लगाया था। इस मंदिर का काम 5 सालों में पूरा किया गया था
अक्षरधाम मंदिर के खुलने और बंद होने का समय
सुबह: 10:00 बजे
रात : 8:00 बजे तक
(अक्षरधाम मंदिर सोमवार को बंद रहता है। )
अक्षरधाम मंदिर पूजा का समय
सुबह की आरती : 10:30 बजे
शाम की आरती : 6:00 बजे
अक्षरधाम मंदिर की वास्तुकला
अक्षरधाम मंदिर को गुलाबी, सफेद संगमरमर और बलुआ पत्थरों के मिश्रण से बनाया गया है। इस मंदिर को बनाने में स्टील, लोहे और कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं किया गया है। श्री अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था के प्रमुख स्वामी महाराज के नेतृत्व में इस मंदिर को बनाया गया था। पूरे मंदिर को पांच प्रमुख भागों में विभाजित किया गया है। ईस मंदिर की उच्च संरचना में 234 नक्काशीदार खंभे, 9 अलंकृत गुंबदों, 20 शिखर होने के साथ 20 हजार मूर्तियां भी शामिल हैं। मंदिर में ऋषियों और संतों की प्रतिमाओं को भी स्थापित किया जाता है। अक्षरधाम मंदिर नारायण सरोवर नाम की झीलों से घिरा हुआ है। ईन झील में पुष्कर सरोवर, इंद्र घुम्न सरोवर, मानसरोवर, गंगा, यमुना और कई अन्य सहित 151 नदियों और झीलों का पवित्र जल है। इसके अलावा, सरोवर के साथ, 108 गोमुख का एक समूह है जो 108 देवताओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। अक्षरधाम मंदिर के बारे में एक और आकर्षक तथ्य यह है कि यह 10 द्वार से घिरा है जो वैदिक साहित्य के अनुसार 10 दिशाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं। मंदिर में रोजाना शाम को दर्शनीय फव्वारा शो का आयोजन किया जाता है। इस शो में जन्म-मरण चक्र का उल्लेख किया जाता है। फव्वारे में कई कहानियों को बयां किया जाता है।
मंदिर में प्रवेश के नियम
मंदिर में प्रवेश फ्री है लेकिन अंदर जाने के अलग-अलग चार्ज है। मंदिर के अंदर जाने के लिए कुछ विशेष नियम हैं। प्रवेश करने के लिए ड्रेस कोड भी बना है। आपके कपड़े कंधे और घुटने तक ढके होने चाहिए।
अक्षरधाम मंदिर कैसे पहुंचे?
हवाई मार्ग – यहां का सबसे नजदीकी हवाई अड्डा इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट है, जो मंदिर से लगभग 23 किलोमीटर की दूरी पर है। एयरपोर्ट से टैक्सी या मेट्रो के द्वारा पहुंचा जा सकता है।
रेल मार्ग – दिल्ली रेलवे स्टेशन, नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, आनंद विहार स्टेशन, हजरत निजामुद्दीन स्टेशन से अक्षरधाम के लिए मेट्रो मिल जाती है। इसके अलावा आप टैक्सी या बस भी ले सकते हैं।
सड़क मार्ग – अक्षरधाम जाने के लिए आपको किसी भी मार्ग से अच्छी कनेक्टिविटी मिल जाएगी। अक्षरधाम मंदिर के सामने बस स्टैंड भी है।
गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में मंदिर का नाम
17 दिसंबर 2007, को अक्षरधाम मंदिर को दुनिया में सबसे व्यापक हिंदू मंदिर होने के लिए गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में स्थान मिला है। मंदिर में यज्ञपुरुष कुंड है, जो दुनिया के सबसे बड़े कुंड में आता है। इसमें 108 छोटे तीर्थ है, और कुंड की ओर 2870 सीढ़ियां बनी हुई हैं।
निष्कर्ष
अक्षरधाम मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और वास्तुकला का जीवंत संग्रहालय है। यहां आकर मन को शांति मिलती है और आंखों को सुकून। अगर आप दिल्ली घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं तो अक्षरधाम मंदिर को अपनी लिस्ट में जरूर शामिल करें। शांति, सुंदरता और भक्ति का यह अनोखा संगम एक बार देखने के बाद हमेशा याद रह जाता है। हमारी वेबसाईट ज्ञान की बातें पर अधिक पढ़ें: https://www.gyankibaatein.com।

