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धनतेरस 2026 (Dhanteras 2026) – ज्ञान की बातें

फ़रवरी 24, 2026 अमित भारद्वाज 0 comments

धनतेरस हर साल कार्तिक माह की त्रयोदिशी को मनाया जाता है। इस त्योहार में माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर धन्वंतरि की पूजा होती है। माता लक्ष्मी और भगवान कुबेर धन के स्वामी है, इसीलिए इस दिन सोना, चांदी, बर्तन, झाड़ू आदि खरीदना अति शुभ माना जाता है।

  • हिन्दू धर्म में धनतेरस उत्सव को बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है।
  • यह त्योहार दीपों के त्योहार दीपावली से पहले आता है।
  • इस दिन सभी लोग घर की साफ सफाई करते है, और अपने घर पर रंगोली बनाते है।
  • इसके बाद सभी मिलकर कार्यस्थल व घर पर माता लक्ष्मी और कुबेर, धन्वंतरि, यम की पूजा की जाती है।  
  • इस दिन घर के मुख्य द्वार और बाहर दीप जलाने की एक महत्वपूर्ण प्रथा है।

धनतेरस का महत्व

धनतेरस से दिवाली पर्व की शुरुआत हो जाती है. इस दिन सोना-चांदी खरीदने और लक्ष्मी-कुबेर पूजन से ज्यादा जरूरी है देव धन्वंतरि की आराधना. दरअसल, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, धन तेरस के दिन ही समुद्र मंथन के दौरान भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए इस दिन देव धन्वंतरि की पूजा का विशेष महत्व है

धनतेरस 2026 मुहूर्त

धनतेरस पूजा शुक्रवार, नवम्बर 6, 2026 पर

धनतेरस पूजा मुहूर्त – 06:02 PM से 07:57 PM

अवधि – 01 घण्टा 56 मिनट्स

यम दीपम शुक्रवार, नवम्बर 6, 2026 को

प्रदोष काल – 05:32 PM से 08:09 PM

वृषभ काल – 06:02 PM से 07:57 PM

त्रयोदशी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 06, 2026 को 10:30 AM बजे

त्रयोदशी तिथि समाप्त – नवम्बर 07, 2026 को 10:47 AM बजे

धनतेरस पूजा विधि

  •  धनतेरस के दिन शाम के वक्त शुभ मुहूर्त में उत्तर की ओर कुबेर और धन्वंतरि की स्थापना करें।
  • साथ ही मां लक्ष्मी, गणेश की मूर्ति या चित्र स्थापित करें। इसके बाद दीप जलाकर पूजा करें।
  • तिलक करने के बाद पुष्प, फल आदि का भोग लगाएं।
  • कुबेर देवता को सफेद मिठाई और धन्वंतरि देव को पीली मिठाई का भोग लगाएं।
  • पूजा के दौरान ‘ऊँ ह्रीं कुबेराय नमः’ इस मंत्र का जाप करते रहें।
  • भगवान धन्वंतरि को प्रसन्न करने के लिए इस दिन धन्वंतरि स्तोत्र का पाठ करना चाहिए।
  • धनतेरस के दिन से दिवाली मनाई जाती है और देवी लक्ष्मी के स्वागत की तैयारी की जाती है। लक्ष्मी के चरणों की निशानी के रूप में रंगोली से लेकर घर के अंदर तक छोटे-छोटे पैरों के निशान बनाए जाते हैं। शाम को 13 दीये जलाकर लक्ष्मी की पूजा की जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन लक्ष्मी पूजा से समृद्धि, सुख और सफलता मिलती है।

पूजा के लाभ

  • मान्यता है की धनतेरस पर 13 दीप जलाने से सभी प्रकार की नकरात्मक ऊर्जा व बीमारिओ का नाश होता है।
  • इस दिन दूसरों की सहायता व दान करने से पूर्व जन्म के पाप धूल जाते है।
  • धनतेरस के दिन सफेद रंग के वस्त्र तथा मीठी वस्तु या चीनी का दान करना चाहिए, ऐसा करने से माता लक्ष्मी कभी भी आपका घर नहीं छोड़ती है।

धनतेरस की पौराणिक कथा

एक बार मृत्यु के देवता यमराज ने यमदूतों से प्रश्न किया कि क्या कभी मनुष्य के प्राण लेने में तुमको कभी किसी पर दया आती है। यमदूतों ने कहा कि नहीं महाराज, हम तो केवल आपके दिए हुए निर्देषों का पालन करते हैं। फिर यमराज ने कहा कि बेझिझक होकर बताओं कि क्या कभी मनुष्य के प्राण लेने में दया आई है। तब एक यमदूत ने कहा कि एकबार ऐसी घटना हुई है, जिसको देखकर हृदय पसीज गया। एक दिन हंस नाम का राजा शिकार पर गया था और वह जंगल के रास्ते में भटक गया था और भटकते-भटकते दूसरे राजा की सीमा पर चला गया। वहां एक हेमा नाम का शासक था, उसने पड़ोस के राजा का आदर-सत्कार किया। उसी दिन राजा की पत्नी ने एक पुत्र को जन्म भी दिया। ज्योतिषों ने ग्रह-नक्षत्र के आधार पर बताया कि इस बालक की विवाह के चार बाद ही मृत्यु हो जाएगी। तब राजा ने आदेश दिया कि इस बालक को यमुना तट पर एक गुफा में ब्रह्मचारी के रूप में रखा जाए और स्त्रियों की परछाईं भी वहां तक नहीं पहुंचनी चाहिए। लेकिन विधि के विधान को कुछ और ही मंजूर था। संयोगवश राजा हंस की पुत्री यमुना तट पर चली गई और वहां राजा के पुत्र को देखा। दोनों ने गन्धर्व विवाह कर लिया। विवाह के चार दिन बाद ही राजा के पुत्र की मृत्यु हो गई। तब यमदूत ने कहा कि उस नवविवाहिता का करुण विलाप सुनकर हृदय पसीज गया था। सारी बातें सुनकर यमराज ने कहा कि क्या करें, यह तो विधि का विधान है और मर्यादा में रहते हुए यह काम करना पड़ेगा। यमदूतों ने पूछा कि ऐसा कोई उपाय है, जिससे अकाल मृत्यु से बचा जा सके। तब यमराज ने कहा कि धनतेरस के दिन विधि विधान के साथ पूजा-अर्चना और दीपदान करने से अकाल मृत्यु नहीं होती। इसी घटना की वजह से धनतेरस के दिन भगवान धन्वंतरि और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है और यमराज को भी दीपदान किया जाता है

जानिए धनतेरस पर क्या खरीदना शुभ हैं? 

  • धनतेरस पर कुबेर यंत्र सोने चांदी जैसे वस्तुये तथा स्टील के बर्तन, झाड़ू आदि वस्तुए खरीदना शुभ होता है।
  • माता लक्ष्मी को प्रसन्न करने के लिए आप गोमती चक्र व झाड़ू भी खरीद सकते है।
  • इस दिन टेलिविज़न, लैपटॉप, फोन, फ्रीज़, कूलर जैसे आदि वस्तुए खरीद सकते है।
  • इसके अलावा व्यक्ति अपनी क्षमतानुसार मकान, वाहन आदि खरीद सकते है।
  • यदि आप ये सारी वस्तु खरीदने में असमर्थ है, तो इसके बदले आप केवल कोई छोटा बर्तन खरीद सकते है। 

धनतेरस पर क्या न खरीदे ?

  • धनतेरस पर कभी भी नुकूली वस्तु नहीं खरीदनी चाहिए।
  • जैसे की लोहा चाकू, कैंची, हसिया, सूई आदि।
  • इसके अलावा कांच के बर्तन, एल्युमिनियम की वस्तुए नहीं खरीदनी चाहिए।
  • इस दिन तेल और घी नहीं खरीदा जाता अगर जरूरत है तो 1 से 2 दिन पहले खरीद लेना चाहिए।
  • इस पर्व पर मिट्टी व प्लास्टिक की वस्तु भी नहीं खरीदनी चाहिए।  

निष्कर्ष

धनतेरस 2026 सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि धन-स्वास्थ्य और खुशहाली को आमंत्रित करने का सुनहरा अवसर है। 6 नवंबर 2026 को शुभ मुहूर्त में पूजा और खरीदारी करके आप अपने घर में सकारात्मक ऊर्जा और समृद्धि ला सकते हैं। इस धनतेरस पर लक्ष्मी माता की कृपा आप पर बनी रहे, यही हमारी कामना है। अगर आप धनतेरस से जुड़ी और जानकारी या खास टिप्स चाहते हैं, तो कमेंट में बताएं। शुभ धनतेरस 2026!

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