ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
एक ही जगह: आरती, चालीसा, व्रत, कथा, मंदिर, पंचांग, ग्रंथ और उपयोगी धार्मिक जानकारी।
होम धार्मिक स्थल महाभैरव मंदिर, शोणितपुर, असम (Mahabhairav Temple, Sonitpur, Assam) – ज्ञान की बातें
धार्मिक स्थल

महाभैरव मंदिर, शोणितपुर, असम (Mahabhairav Temple, Sonitpur, Assam) – ज्ञान की बातें

अप्रैल 4, 2026 अमित भारद्वाज 0 comments

महाभैरव मंदिर भारत के असम राज्य के शोणितपुर जिले के तेजपुर नगर के उत्तरी भाग में एक पहाड़ पर स्थित एक प्राचीन मंदिर है। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। मूल रूप से ये मंदिर पत्थर का बना था लेकिन इसका पुननिर्माण क्रांकीट से कराया गया है। अहोम साम्राज्य के समय तुंग गंगिया राजवंश ने मंदिर के लिए भूमि दान की और पुजारी नियुक्त किये। यहां महाशिवरात्रि धूमधाम से मनाई जाती है और दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। मान्यता है कि यहां बाणासुर ने शिव जी की पूजा के लिए एक मंदिर स्थापित कराया था। महाभैरव मंदिर में भगवान को भांग से बने लड्डू का भोग लगाया जाता और विभिन्न पूजाएं की जाती है। वहीं इस मंदिर में कबूतरों को भी आजाद किया जाता है जो इस बात का प्रतीक है कि पूर्वजों की आत्मा को आजाद किया जा रहा है।

महाभैरव मंदिर का इतिहास

महाभैरव मंदिर का इतिहास पुराणों से जुड़ा हुआ है। किंवदंतियों के अनुसार, राक्षस बाणासुर ने लिंग पूजा की शुरुआत की थी। राक्षस राजा ने तेजपुर में अपनी राजधानी स्थापित की थी और पत्थर से मंदिर का निर्माण कराया था। हालांकि पुरातत्वविदों का मानना है कि मंदिर का निर्माण 8वीं से 10वीं शताब्दी के बीच सलस्तंभ वंश के राजाओं द्वारा किया गया था। साल 1897 में आए भूकंप से मूल मंदिर नष्ट हो गया था और बाद में 20वीं शताब्दी में मंदिर का निर्माण किया गया था। अब जो मंदिर खड़ा है उसका स्वरूप इस शताब्दी की शुरुआत में स्वयंवर भारती नामक एक भिक्षु ने फिर से बनवाया था, जिन्हें लोकप्रिय रुप से नागा बाबा के नाम से जाना जाता है। कुछ साल बाद भिक्षु श्री महादेव भारती ने मुख्य मंदिर के पास नट मंदिर बनवाया था। बाद में कुछ अन्य भक्तों द्वारा द्वारपाल के रूप में गणेश और हनुमान की मूर्तियों का निर्माण किया गया। महाभैरव मंदिर के जीर्णोद्धार का विकास धीमा था, लेकिन एक स्थानीय कलाकार श्रीजॉय दास ने मुख्य प्रवेश द्वार को उकेरा।

महाभैरव मंदिर के खुलने और बंद होने का समय

सुबह : 5:00 बजे

रात : 9:00 बजे तक

महाभैरव मंदिर पूजा का समय

सुबह की आरती: 8:00 बजे

दोपहर: 1:00 बजे (भोग निवेदन भी किया जाता है, जिसके बाद प्रसाद वितरित किया जाता है।)

शाम की आरती: 6:00 बजे

महाभैरव मंदिर की वास्तुकला

महाभैरव मंदिर का निर्माण सन्यासी स्वयंबर भारती ने करवाया था। उन्हें सभी नाग बाबा नाम से जानते है। महाभैरव मंदिर तेजपुर शहर के उत्तरी भाग में एक छोटी पहाड़ी पर स्थित है। यहां से पूरे शहर और ब्रह्मपुत्र नदी का मनोरम नजारा दिखता है। पौराणिक मान्यतों की माने तो ईस मदिर का निर्माण असुरों के राजा बाणासुर ने मूल पत्थर से करवाया था। इस मंदिर में भगवान शिव प्रमुख देवता हैं। ईस मदिर का शिवलिंग विश्व के सबसे विशाल शिवलिंगों में से एक है। मदिर के परिसर में मुख्य शिवलिंग के अलावा गणेश जी और हनुमान जी की मूर्तियां द्वारपाल के रूप में स्थापित हैं। मंदिर के विशाल स्तंभ प्राचीन संरचना से मिलते-जुलते हैं। महाभैरव मंदिर पास में ही नाट मंदिर भी बनाया गया है। मंदिर का वातावरण शांत और दिव्य है। सुबह-शाम यहां आरती का माहौल भक्तों के मन को मोह लेता है। खासकर महाशिवरात्रि, श्रावण मास और अन्य शिव संबंधी त्योहारों पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है।

महाभैरव मंदिर की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभैरव मंदिर की स्थापना द्वापर युग में राक्षस राजा बाणासुर ने की थी। बाणासुर भगवान शिव का परम भक्त था और शिव को प्रसन्न करने के लिए उसने यहां एक विशाल शिवलिंग की स्थापित की थी। शोणितपुर उस समय बाणासुर की राजधानी थी, जहां उसकी पुत्री ऊषा भी रहती थी। कहा जाता है कि बाणासुर ने लिंग पूजा परंपरा की शुरुआत की। कुछ मान्यताओं के मुताबिक, राक्षस बाणासुर महाभैरव मंदिर में शिव की उपासना से समृद्धि प्राप्त करता था। कुछ धार्मिक कथा के अनुसार यह मंदिर भगवान शिव के उग्र भैरव स्वरूप का केंद्र है। मंदिर का मुख्य शिवलिंग ‘जीवित पत्थर’ से बना माना जाता है, जो समय के साथ धीरे-धीरे बढ़ता रहता है। कई श्रद्धालु इसे एशिया का सबसे बड़ा स्वयंभू शिवलिंग भी मानते हैं

महाभैरव मंदिर कैसे पहुंचे

हवाई मार्ग – यहां का निकटतम हवाई अड्डा गुवाहाटी एयरपोर्ट है। यहां से आप टैक्सी या बस के द्वारा मंदिर पहुंच सकते हैं।

रेल मार्ग – यहां का निकटतम रेलवे स्टेशन गुवाहाटी है। जो महाभैरव मंदिर से लगभग 15 किमी दूर है। यहां से आप टैक्सी या बस के द्वारा मंदिर पहुंच सकते हैं

सड़क मार्ग – गुवाहाटी से महाभैरव मंदिर तक सड़क मार्ग से आराम से पहुंचा जा सकता है। यात्रा के दौरान असम की सुंदर वादियों का आनंद ले सकते हैं।  

निष्कर्ष

महाभैरव मंदिर, शोणितपुर, असम न सिर्फ एक धार्मिक स्थल है, बल्कि असम की प्राचीन संस्कृति, पौराणिक गाथाओं और अटूट शिव भक्ति का जीवंत प्रमाण भी है। यदि आप आध्यात्मिक शांति, प्राचीन इतिहास और प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव करना चाहते हैं, तो शोणितपुर का यह महाभैरव मंदिर आपके लिए आदर्श जगह है। हमारी वेबसाईट ज्ञान की बातें पर अधिक पढ़ें: https://www.gyankibaatein.com। हर हर महादेव!

In-Content Ad / Sponsor Slot