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अन्नपूर्णा माता मंदिर इंदौर – पवित्र स्थल | Annapurna Mata Mandir Indore – ज्ञान की बातें

अप्रैल 6, 2026 अमित भारद्वाज 0 comments

अन्नपूर्णा माता मंदिर मध्यप्रदेश के इंदौर जंक्शन से 6 किमी की दूरी पर स्थित है। ये मंदिर माँ अन्नपूर्णा को समर्पित है। माँ को भोजन और पोषण की देवी हैं माना जाता है। वे देवी पार्वती का ही एक रूप हैं । हिंदू धर्म में उनकी पूजा को अत्यंत महत्व दिया जाता है। इस मंदिर का निर्माण 9वीं शताब्दी में हुआ था और 1959 में महामंडलेश्वर स्वामी प्रभानंदगिरिमहाराज द्वारा इसका पुनर्निर्माण किया गया था। इसका प्रवेश द्वार चार हाथियों पर टिका हुआ था, जिसे 1975 में स्थापित किया गया था।

अन्नपूर्णा माता मंदिर का इतिहास

अन्नपूर्णा मंदिर की स्थापना वर्ष 1959 में ब्रह्मलीन स्वामी प्रभानंद गिरी महाराज द्वारा की गई थी। स्वामी प्रभानंद जी का जन्म 14 जनवरी 1911 को आंध्र प्रदेश के नंदी कुटकुट स्थान पर हुआ था। 15 वर्ष की आयु में उन्होंने संन्यास ग्रहण कर लिया और कठोर साधना करते हुए गुजरात के गिरनार पर्वत पर भगवती अम्बिका के दर्शन प्राप्त किए। वहां से इंदौर आकर उन्होंने अन्नपूर्णा मंदिर की स्थापना की। 22 फरवरी 1959 को भक्तों के सहयोग से मां अन्नपूर्णा की प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा की गई। मां अन्नपूर्णा मंदिर 3200 वर्ग फुट क्षेत्र में फैला हुआ है और इसकी ऊंचाई 100 फुट से भी अधिक है। यह मंदिर न केवल भक्तों के लिए श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि प्राचीन भारतीय वास्तुकला, कला और हिंदू परंपरा में रुचि रखने वाले लोगों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।

अन्नपूर्णा माता मंदिर के खुलने और बंद होने का समय

सुबह: 6:00 – 12:00 बजे

दोपहर: 02:00 – रात: 10:00 बजे

अन्नपूर्णा माता मंदिर पूजा का समय

सुबह की आरती: 6:30 बजे

रात की आरती: 9:30 बजे।

अन्नपूर्णा माता मंदिर की वास्तुकला

मंदिर की खास बात यह है कि यह इंडो-आर्यन और द्रविड़ स्थापत्य शैली का मिश्रण है। जो कि मदुरै के मीनाक्षी मंदिर जैसा दिखता है। 200 एकड़ में फैले इस मंदिर में संगमरमर से बनी अन्नपूर्णा माता की 3 फीट ऊंची मूर्ति भी स्थापित है। अन्नपूर्णा मंदिर की ऊंचाई 100 फीट से भी अधिक है। मंदिर का मुख्य प्रवेश द्वार दक्षिण भारतीय वास्तुकला के अनुसार चार बड़े हाथियों की पीठ पर बनाया गया है। अन्नपूर्णा मंदिर के अंदर आपको मां काली और मां सरस्वती के साथ चमकती हुई मां अन्नपूर्णा की मूर्ति दिखाई देगी। साथ ही भगवान शिव, भगवान हनुमान और कालभैरव जैसे विभिन्न देवताओं की मूर्तियां भी मंदिर में स्थापित हैं। मंदिर परिसर के अंदर एक बड़ा कृष्ण मंदिर भी है जहां आप दीवारों पर भगवान कृष्ण के जीवन का सचित्र चित्रण भी देख सकते हैं। मंदिर की बाहरी दीवार को हिंदू पौराणिक पुस्तकों के पौराणिक पात्रों से खूबसूरती से सजाया गया है। अन्नपूर्णा मंदिर के अंदर खूबसूरत गौशाला भी देखने को मिलती है। 

अन्नपूर्णा माता मंदिर की पौराणिक कथा 

सनातन शास्त्रों के अनुसार प्राचीन काल में एक बार धरती पर अन्न की कमी हो गई थी। इससे धरती पर हाहाकार मच गया। उस समय धरती वासियों ने जगत के पालनहार भगवान विष्णु एवं ब्रह्मा जी की पूजा-उपासना की और अन्न की समस्या को दूर करने की कामना की। पृथ्वीवासियों की व्यथा सुन भगवान विष्णु ने चराचर के स्वामी भगवान शिव को इसके बारे में बताया। यह जान कर स्वयं देवों के देव महादेव एवं माता पार्वती धरती लोक पर आये। अन्न की कमी को दूर करने के लिए जगत जननी मां पार्वती ने अन्नपूर्णा स्वरूप लिया और भगवान शिव को दान में अन्न दिया। उस समय भगवान शिव ने दान में मिले अन्न को पृथ्वी वासियों में बांट दिया। इससे पृथ्वी पर होने वाली अन्न की समस्या दूर हुई। और तभी से भारत में माता अन्नपूर्णा को अन्न की देवी के रूप में पूजा जाने लगा। 

अन्नपूर्णा माता मंदिर तक कैसे पहुंचे?

नई दिल्ली से इंदौर की दूरी- 816.8 km है। 

हवाईजहाज :

मंदिर का निकटतम हवाई अड्डा देवी अहिल्या बाई होल्कर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यहां घरेलू उड़ानें उपलब्ध हैं और पर्यटकों के लिए अंतरराष्ट्रीय उड़ानें भी हैं। इंदौर से दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और बैंगलोर जैसे प्रमुख शहरों के लिए सरकारी और निजी एयरलाइन सेवाएं उपलब्ध हैं। अन्नपूर्णा मंदिर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से 8.4 किमी की दूरी पर है। आप हवाई अड्डे से बहुत सुविधाजनक कैब सेवा या स्थानीय बस द्वारा यात्रा कर सकते हैं ।

रेल द्वारा: 

इंदौर रेलवे स्टेशन देश के अन्य स्थानों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। स्टेशन से मां अन्नपूर्णा देवी का मंदिर मात्र 2 किमी की दूरी पर स्थित है जहां से आप किसी भी लोकल ट्रांसपोर्ट के जरिए आसानी से पहुंच सकते हैं। 

सड़क द्वारा: 

इंदौर देश के अन्य शहरों से सड़क मार्ग से बेहतर रूप से जुड़ा हुआ है, यहां पहुंचने के लिए आप देश के किसी भी शहर से बस, कैब या पर्सनल व्हीकल का सहारा ले सकते हैं।

अन्नपूर्णा माता मंदिर के बारे में रोचक तथ्य

  • आप अन्नपूर्णा मंदिर के अंदर स्थित खूबसूरत गौशाला भी देख सकते हैं।
  • मंदिर परिसर के अंदर भगवान शिव, भगवान हनुमान और कालभैरव जैसे विभिन्न देवी-देवताओं की मूर्तियां भी स्थापित हैं।
  • मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर चार विशाल हाथी हैं, जो मंदिर की सुंदरता को और भी बढ़ाते हैं।
  • अन्नपूर्णा मंदिर परिसर के अंदर एक विशाल कृष्ण मंदिर भी है और आप मंदिर की दीवारों पर भगवान कृष्ण के जीवन के चित्र भी देख सकते हैं।
  • मंदिर की बाहरी दीवार हिंदू पौराणिक ग्रंथों के पौराणिक पात्रों से खूबसूरती से सजी हुई है।
  • यह मंदिर हजारों से अधिक लोगों के लिए कथा, प्रवचन और सत्संग आयोजित करने के लिए पर्याप्त जगह प्रदान करता है।

निष्कर्ष

अन्नपूर्णा माता मंदिर इंदौर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था, शांति और समृद्धि का केंद्र है। जो भी इंदौर आता है, उसे एक बार ईस मंदिर के दर्शन जरूर करने चाहिए। माँ अन्नपूर्णा की कृपा से जीवन में कभी अन्न की कमी नहीं होती – यही इस मंदिर की सबसे बड़ी मान्यता है। हमारी वेबसाईट ज्ञान की बातें पर अधिक पढ़ें: https://www.gyankibaatein.com। जय माँ अन्नपूर्णा!

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