ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
एक ही जगह: आरती, चालीसा, व्रत, कथा, मंदिर, पंचांग, ग्रंथ और उपयोगी धार्मिक जानकारी।
होम धार्मिक स्थल कोटिलिंगेश्वर मंदिर – लाखों शिवलिंग और मनोकामना पूर्ण करने का अद्वितीय स्थल (Kotilingeshwara Temple)- ज्ञान की बातें
धार्मिक स्थल

कोटिलिंगेश्वर मंदिर – लाखों शिवलिंग और मनोकामना पूर्ण करने का अद्वितीय स्थल (Kotilingeshwara Temple)- ज्ञान की बातें

अप्रैल 7, 2026 अमित भारद्वाज 0 comments

कर्नाटक राज्य के शांतिपूर्ण कोलार जिले के एक छोटे से कम्मा असंद्रा गांव में स्थित कोटिलिंगेश्वर मंदिरभगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर 1980 में स्वामी संभाशिव मूर्ति द्वारा स्थापित किया गया था। और उन्ही ने यहां पर पहले शिवलिंग की स्थापना की थी। मंदिर में पहले केवल कुछ शिवलिंगों से यात्रा शुरू हुई थी। लेकिन भक्तों की अटूट आस्था के कारण आज यहां 90 लाख से अधिक शिवलिंग स्थापित हो चुके हैं। लक्ष्य एक करोड़ शिवलिंग पूरा करने का है, जिसके कारण ही इस मंदिर का नाम कोटिलिंगेश्वर (कोटि = एक करोड़) पड़ा। माना जाता है कि यहां आकर मनोकामना पूरी होने पर भक्त भी अपना शिवलिंग स्थापित करवा सकते हैं। मंदिर परिसर लगभग 15 एकड़ में फैला हुआ है। मुख्य आकर्षण 108 फीट ऊंचा विशाल शिवलिंग है, जो एशिया का सबसे ऊंचा शिवलिंग माना जाता है। इसके साथ ही 35 फीट ऊंची नंदी की प्रतिमा भी स्थापित है। मंदिर में त्रिमूर्ति (ब्रह्मा, विष्णु और शिव) की एक साथ प्रतिमा भी देखने को मिलती है, जो काफी दुर्लभ है।

कोटिलिंगेश्वर मंदिर का इतिहास

मंदिर का निर्माण 1980 में स्वामी सांभ शिव मूर्ति और उनकी पत्नी वी रुक्मिणी ने करवाया था और उन्ही ने यहां पर शिवलिंग की स्थापना की थी। उसके बाद 5 शिवलिंग फिर 101 शिवलिंग और फिर 1001 शिवलिंग स्थापित किए गए। स्वामीजी का सपना था कि यहां पर एक करोड़ शिवलिंग स्थापित करना है। लेकिन साल 2018 में उनकी मृत्यु हो गई। लेकिन उनके जाने के बाद भी यहां शिवलिंग लगातार ही बनाए जा रहे हैं। साल 1994 में यहां पर 108 फीट लंबा शिवलिंग स्थापित किया गया। इतनी ही नहीं नंदी की भी विशाल मूर्ति यहां स्थापित की गई। कोटिलिंगेश्वर मंदिर में प्रतिदिन स्थापित शिवलिंग पर पुजारियों द्वारा दैनिक पूजा की जाती है। पूजा संगीत और ढोल के साथ की जाती है और सभी पुजारी मंत्रों का उच्चारण करते हैं और साथ ही लिंग पर जल चढ़ाते हैं। भक्त लिंग की स्थापना करके विशेष पूजा भी कर सकते हैं। 

कोटिलिंगेश्वर मंदिर के खुलने और बंद होने का समय

सुबह: 5:00 बजे

रात: 9:00 बजे तक

कोटिलिंगेश्वर मंदिर पूजा का समय

सुबह की आरती: 6:00 बजे

शाम की आरती: 7:00 बजे

कोटिलिंगेश्वर मंदिर की वास्तुकला

कोटिलिंगेश्वर मंदिर में 108 फीट ऊँचा शिवलिंग और 35 फीट ऊँचा नंदी स्थापित है। नंदी एक चबूतरे पर स्थापित है। और मंदिर पंद्रह एकड़ भूमि में फैले छोटे शिवलिंगों से घिरा हुआ है। परिसर में अन्य देवी-देवताओं के छोटे-छोटे मंदिर भी हैं, जिनमें देवी अन्नपूर्णेश्वरी, श्री पंचगणपति, श्री राम, सीता देवी, श्री लक्ष्मण, श्री पांडुरंगस्वामी, देवी करुमारि अम्मा, श्री वेंकटरामानी स्वामी, श्री अंजनेय और देवी कन्निका परमेश्वरी आदि शामिल हैं। वर्तमान में मंदिर में नब्बे लाख शिवलिंग हैं और एक करोड़ शिवलिंग स्थापित करने की परियोजना चल रही है। शिवलिंग के पास एक जलकुंड बना हुआ है। भक्त यहां से जल भरकर शिवलिंग का अभिषेक करते हैं। मंदिर परिसर में एक विवाह कक्ष, एक ध्यान कक्ष, एक विश्राम गृह और एक प्रदर्शनी केंद्र भी है। मंदिर में दो फूलों के पेड़ हैं, जहां भक्त मनोकामना पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं।

कोटिलिंगेश्वर मंदिर की पौराणिक कथा

पौराणिक कथा के अनुसार, गौतम ऋषि के श्राप की मुक्ति पाने के लिए इंद्रदेव ने इस स्थान पर भगवान शिव की पूजा की थी। उस समय उन्होंने भगवान शिव का 1000 घड़ों से जलाभिषेक किया था। इसके बाद से इस जगह को कोटिलिंगेश्वर के रूप में जाना जाने लगा। अगर कोई भी भक्त इस मंदिर परिसर में शिवलिंग की स्थापना करवाना चाहता है तो वह 1 से लेकर 3 फुट तक के शिवलिंग को अपने नाम से स्थापित करवा सकता है। मान्यता है कि यहां के वृक्षों पर पीले धागे बांधने से भी मनोकामना पूरी होती है।

कोटिलिंगेश्वर मंदिर दर्शन टिकट

कोटिलिंगेश्वर मंदिर दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं को ध्यान देना चाहिए कि टिकट काउंटर सुबह 7:00 बजे से बुकिंग के लिए खुल जाते हैं। नीचे दी गई गाइड में कोटिलिंगेश्वर मंदिर दर्शन टिकटों की जानकारी दी गई है।

  • श्रद्धालुओं के लिए टिकट की कीमत: 20 रुपये प्रति व्यक्ति
  • कैमरा शुल्क: 100 रुपये प्रति कैमरा
  • पार्किंग शुल्क: 30 रुपये
  • लिंग प्रतिष्ठा: रु. 7500/-. लिंग प्रतिष्ठा की कीमत बदल सकती है

कोटिलिंगेश्वर मंदिर में निःशुल्क दर्शन

कोटिलिंगेश्वर मंदिर में नि:शुल्क दर्शन का समय सुबह 9:00 बजे से 10:00 बजे तक और शाम 7:30 बजे से 9:00 बजे तक है। मंदिर में आने वाले तीर्थयात्रियों के लिए नि:शुल्क दर्शन का विवरण इस प्रकार है:

  • चौदह वर्ष से कम आयु के बच्चों के लिए दर्शन निःशुल्क हैं।
  • शारीरिक रूप से अक्षम श्रद्धालुओं को नि:शुल्क दर्शन होंगे

कोटिलिंगेश्वर मंदिर कैसे पहुंचे ?

हवाई मार्ग- कोटिलिंगेश्वर मंदिर के सबसे नजदीकी हवाई अड्डा बेंगलुरु में केम्पेगौड़ा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा है। यें मंदिर से लगभग 110 किमी की दूरी पर है। एयरपोर्ट से आप टैक्सी या बस किराए पर ले सकते हैं।

रेल मार्ग – कोलार का रेलवे स्टेशन दक्षिण भारत के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। कोलार तक आप ट्रेन से आएंगे फिर मंदिर तक पहुंचने के लिए टैक्सी या रिक्शा किराए पर ले सकते हैं। 

सड़क मार्ग – कोलार में स्थित, यह शहर सभी प्रमुख राजमार्गों और आसपास के शहरों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। आप मंदिर तक पहुंचने के लिए एक आरामदायक यात्रा कर सकते हैं। 

निष्कर्ष

कोटिलिंगेश्वर मंदिर की कथा हमें सिखाती है कि भक्ति में कोई सीमा नहीं होती। चाहे कोई नास्तिक हो या साधारण। अगर भक्त, सच्चे समर्पण और पश्चाताप से भगवान शिव की पूजा करता हा तो उसे उनकी कृपा अवश्य प्राप्त होती है। स्वामी संभा शिव मूर्ति के दिव्य सपने से शुरू हुई यह यात्रा आज लाखों लोगों की आस्था का केंद्र बन चुकी है। अगर आप शिव भक्ति की गहराई महसूस करना चाहते हैं या अपनी मनोकामना पूर्ति के लिए शिवलिंग स्थापित करना चाहते हैं, तो एक बार कोटिलिंगेश्वर मंदिर जरूर जाएं। यहां हर कण में शिव का वास है और हर शिवलिंग एक भक्ति की कहानी कहता है। हमारी वेबसाईट ज्ञान की बातें पर अधिक पढ़ें: https://www.gyankibaatein.com। हर हर महादेव!


In-Content Ad / Sponsor Slot