स्तोत्र (stotra)

माँ कुलदेवी स्तोत्र – मां कुलदेवी की महिमा का दिव्य वर्णन (Maam Kuldevi Stotra Lyrics with Meaning) – ज्ञान की बातें

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कुलदेवी स्तोत्र माता कुलदेवी को समर्पित स्तोत्र है ये स्तोत्र कुलदेवी की शक्ति का वर्ण करता है कुलदेवी स्तोत्र वह स्तोत्र (प्रार्थना या मंत्र) है जो किसी व्यक्ति या परिवार द्वारा कुलदेवी की पूजा और आराधना के लिए किया जाता है। कुलदेवी प्रत्येक कुल (परिवार/वंश) की रक्षक मानी जाती हैं। जैसे प्रत्येक व्यक्ति का इष्ट देव होता है, वैसे ही परिवार की कुलदेवी होती हैं जो उस वंश की रक्षा, समृद्धि और कल्याण का संकल्प धारण करती हैं। “कुलदेवी स्तोत्र” प्राचीन वैदिक परंपरा से जुड़ा एक पवित्र स्तोत्र है। जो भी व्यक्ति श्रद्धा और भक्ति से इस स्तोत्र का पाठ करता है, उसके कुल में सदैव शांति, वैभव, और मंगल बना रहता है। और कुलदेवी उनकी सभी मनोकामना पूरी करती है

माँ कुलदेवी स्तोत्र का इतिहास और महत्व

कुलदेवी कुल या वंश की रक्षक देवता होते है। ये घर परिवार या वंश परम्परा की प्रथम पूज्य तथा मूल अधिकारी देव होते है इन देवियों की स्थिति घर के बुजुर्ग सदस्यों जैसी महत्वपूर्ण होती है इनकी उपासना या महत्त्व दिए बगैर सारी पूजा एवं अन्य कार्य व्यर्थ हो सकते है। इनका प्रभाव इतना महत्वपूर्ण होता है की यदि ये रुष्ट हो जाए तो अन्य कोई देवी देवता दुष्प्रभाव या हानि कम नही कर सकता इसे यूं समझे – यदि घर का मुखिया पिताजी /माताजी आपसे नाराज हो तो पड़ोस के या बाहर का कोइ भी आपके भले के लिया आपके घर में प्रवेश नही कर सकता क्योकि वे “बाहरी ” होते है।

माँ कुलदेवी स्तोत्र के संस्कृत श्लोक एवं हिन्दी अर्थ

नमस्ते श्री शिवाय कुलाराध्या कुलेश्वरी।
कुलसंरक्षणी माता कौलिक ज्ञान प्रकाशीनी।।1।।

अर्थ:
हे कुल की आराध्या कुलेश्वरी देवी! आपको नमस्कार है।
आप ही हमारे कुल की रक्षा करने वाली माता हैं, जो कौलिक (गूढ़) ज्ञान को प्रकाशित करती हैं।

वन्दे श्री कुल पूज्या त्वाम् कुलाम्बा कुलरक्षिणी।
वेदमाता जगन्माता लोक माता हितैषिणी।।2।।

अर्थ:
हे कुल में पूजित माता कुलाम्बा!
आप वेदों की जननी हैं, जगत की माता हैं और समस्त लोकों का कल्याण चाहने वाली हैं।

आदि शक्ति समुद्भूता त्वया ही कुल स्वामिनी।
विश्ववंद्यां महाघोरां त्राहिमाम् शरणागत:।।3।।

अर्थ:
हे आदि शक्ति स्वरूपिणी देवी! आप कुल की स्वामिनी हैं।
आप विश्व में पूजित हैं और भय को नष्ट करने वाली हैं।
मैं आपकी शरण में हूँ, कृपा कर मेरी रक्षा करें।

त्रैलोक्य ह्रदयं शोभे देवी त्वं परमेश्वरी।
भक्तानुग्रह कारिणी कुलदेवी नमोस्तुते।।4।।

अर्थ:
हे त्रिलोक (तीनों लोक) के हृदय को शोभित करने वाली देवी!
आप परमेश्वरी हैं, भक्तों पर अनुग्रह करने वाली हैं।
आपको बार-बार नमस्कार है।

महादेव प्रियंकरी बालानां हितकारिणी।
कुलवृद्धि करी माता त्राहिमाम् शरणागतम्।।5।।

अर्थ:
हे महादेव की प्रिय सखी! आप बालकों का कल्याण करने वाली हैं।
आप कुल की वृद्धि करने वाली माता हैं, मुझे शरण में लेकर रक्षा करें।

चिदग्निमण्डल संभुता राज्य वैभव कारिणी।
प्रकटीतां सुरेशानी वन्दे त्वां “कुल गौरवाम्”।।6।।

अर्थ:
आप चिदग्नि (चैतन्य अग्नि) से उत्पन्न हुई हैं।
राज्य वैभव देने वाली और देवताओं की अधिष्ठात्री हैं।
मैं आपको वंदन करता हूँ, हे कुल की शोभा!

त्वदीये कुले जात: त्वामेव शरणम गत:!
त्वत वत्सलोहं आद्ये त्वं रक्ष रक्षाधुना।।7।।

अर्थ:
मैं आपके ही कुल में जन्मा हूँ और आपकी ही शरण में आया हूँ।
हे आद्ये! आप दयालु हैं, अब मेरी रक्षा करें।

पुत्रं देहि धनं देहि साम्राज्यं प्रदेहि मे|
सर्वदास्माकं कुले भूयात मंगलानु शाशनम ।।8।।

अर्थ:
हे देवी! मुझे पुत्र, धन और राज्य-सुख प्रदान करें।
हमारे कुल में सदा मंगल और समृद्धि बनी रहे।

कुलाष्टकमिदं पुण्यं नित्यं य: सुकृति पठेत।
तस्य वृद्धि कुले जात: प्रसन्ना कुलेश्वरी।।9।।

अर्थ:
जो व्यक्ति इस कुलाष्टक (आठ श्लोक वाले स्तोत्र) का नित्य पाठ करता है,
उसके कुल में वृद्धि होती है और कुलेश्वरी देवी सदा प्रसन्न रहती हैं।

कुलदेवी स्त्रोत्मिदम, सूपुण्यं ललितं तथा |
अर्पयामी भवत भक्त्या, त्राहिमां शिव गेहिनी ||10।।

अर्थ:
हे शिवगृहवासी देवी! यह पुण्य स्तोत्र मैं आपको भक्ति से अर्पित करता हूँ।
मुझे संकटों से बचाइए, हे करुणामयी माता।

माँ कुलदेवी स्तोत्र के लाभ और जाप विधि

कुलदेवी स्तोत्र का उद्देश्य व्यक्ति या परिवार को देवी की कृपा प्राप्त करना होता है, जिससे परिवार में शांति, समृद्धि, और खुशहाली बनी रहती है। कुलदेवी स्तोत्र कुल की रक्षा और उन्नति का प्रतीक है। इसके नियमित पाठ से परिवार में शांति, सुख, और समृद्धि आती है। कुलदेवी हर प्रकार के संकट, नकारात्मक ऊर्जा और दुर्भाग्य से रक्षा करती हैं। यह स्तोत्र देवी की महिमा और शक्तियों का वर्णन करता है और भक्तों से उनके आशीर्वाद की प्रार्थना करता है। नवरात्रि, पूर्णिमा या परिवारिक पूजा में इसका पाठ विशेष फलदायक होता है।

जाप विधि:

माँ कुलदेवी स्तोत्र का पाठ करने से पहले स्नान करे फिर शुद्ध वस्त्र पहनें और एक शुद्ध स्थान पर बैठें। कुलदेवी की चित्र या मूर्ति स्थापित करे मूर्ति पर धूप , दीप और फूल अर्पित करे कुलदेवी के स्तोत्र को पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ पढ़ें। यदि संभव हो तो इसे 108 बार पढ़ें। अंत में माँ गायत्री की आरती के साथ समापन करें। 

निष्कर्ष

अगर आप भक्ति में रुचि रखते हैं, तो हमारी साइट ज्ञान की बातें पर अन्य स्तोत्र जैसे गायत्री स्तोत्र और भवानी स्तोत्र को जरूर पढ़ें तथा इस आर्टिकल को शेयर करें और कमेंट में अपनी अनुभूति बताएं!

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