एक बुढ़ि माँ थी। जिसके कुल सात बेटे थे। छे अपनी अपनी जगा काम में व्यस्त रहते और एक निक्कमा रहता था। माता अपने सभी छे बेटों के लिये रसोई बनती थी लेकिन उस सातवे बेटे...
पौराणिक काल में अयोध्यापति महाराज सगर ने एक बार विशाल यज्ञ का आयोजन किया (कराया )और उसकी (उसके) देखरेख की जिम्मेदारी अपने पौत्र अंशुमान को सौंप दी। यज्ञ में विघ्न डालते हुए देवराज इंद्र ने राजा...
गर्गाचार्य जी ने कहा - "हे महामते! आपने भगवान शिव की प्रसन्नता हेतु समस्त प्रदोष व्रतों का वर्णन किया। कृपया अब शनि प्रदोष व्रत की महिमा का वर्णन करें।" सूतजी ने कहा - "हे ऋषिवर! निश्चय ही भगवान शिव एवं देवी...
भगवान शिव हिन्दु धर्म के सर्वोच्च आराध्य देवताओं में से हैं। शिव जी की पूजा न केवल भोग अपितु परमदुर्लभ मोक्ष गति देने में सक्षम है। शिवजी को प्रसन्न करने के उद्देश्य से की गयी पूजा-अर्चना,...
सनत्कुमार निवेदन करते हैं, "हे भगवान शिव! यदि कुलीन स्त्रियों को अखण्ड सौभाग्य, महाभाग्य तथा पुत्र-पौत्र आदि का सुख प्रदान करने वाला व्रत हो, तो कृपा करके उसका वर्णन करें?" भगवान शिव ने कहा, "मद्र देश में अश्वपति नाम का एक राजा...
माता पार्वती जी ने गणेश जी से कहा कि - "हे वत्स! आषाढ़ माह की कृष्ण चतुर्थी (अमान्त ज्येष्ठ माह) को अत्यन्त शुभदायक एवं मंगलकारी बतलाया गया है। आप उसकी कथा, महात्म्य एवं विधान का वर्णन कीजिये। आषाढ़ माह के गणेश...
एक कथा के अनुसार माँ पार्वती ने अपने पूर्व जन्म में भगवान शंकर को पति रूप में प्राप्त करने के लिए हिमालय पर गंगा के तट पर अपनी बाल्यावस्था में अधोमुखी होकर घोर तप किया। इस...
एक समय की बात है, घने वन के समीप स्थित एक गाँव में एक दयालु एवं धर्म परायण स्त्री निवास करती थी। उसके सात पुत्र थे। कार्तिक का महिना था तथा दीवाली का उत्सव आने ही...
बहुत समय पहले इन्द्रप्रस्थपुर के एक शहर में वेदशर्मा नाम का एक ब्राह्मण रहता था। वेदशर्मा का विवाह लीलावती से हुआ था जिससे उसके सात महान पुत्र और वीरावती नाम की एक गुणवान पुत्री थी। क्योंकि सात भाईयों की वह केवल एक अकेली बहन...
महामुनि ऋषि व्यास जी ने कहा, "बहुत समय पूर्व नैमिषारण्य तीर्थ में शौनकादिक अट्ठासी हजार ऋषियों ने पुराणवेत्ता श्री सूतजी से पूछा, "हे सूतजी! इस कलियुग में वेद-विद्या-रहित मानवों को ईश्वर भक्ति किस प्रकार मिलेगी तथा उनका उद्धार कैसे होगा? हे मुनिश्रेष्ठ! कोई ऐसा...