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आरती (Aarti)

शनिदेव आरती: (Shanidev Aarti – Om Jai Jai Shani Maharaj)

जुलाई 16, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

शनिदेव आरती : ये आरती भगवान शनि देव जी को समर्पित है। इन्हें सूर्य पुत्र, शनिदेव को , कर्मफल दाता और दण्डनीति के देवता कहा जाता है। भगवान शनिदेव को नवग्रहों में सबसे शक्तिशाली और न्यायप्रिय ग्रह माना जाते हैं। शनिदेव सूर्य देव और छाया (संज्ञा) के पुत्र हैं। जन्म के समय भगवान शनिदेव की दृष्टि इतनी प्रचंड थी कि सूर्य देव भी प्रभावित हो गए थे। शनिदेव ने भगवान राम और कृष्ण को भी अपनी दृष्टि का प्रभाव दिखाया था। महाभारत और पुराणों में शनिदेव को कर्मफल का सबसे सख्त न्यायाधीश माना गया है। शनिदेव को साढ़े साती (7.5 वर्ष) और ढैय्या (2.5 वर्ष) का प्रभाव देने वाले ग्रह के रूप में जाना जाता है। लेकिन जो भक्त सच्ची श्रद्धा से शनिदेव आरती का पाठ करता है और उनकी पूजा करते हैं, उन्हें शनिदेव रक्षा प्रदान करते हैं। शनिवार व्रत , और शनिदेव मदिरों में ईस आरती का पाठ करने से भगवान शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होते है

शनिदेव आरती हिन्दी में
(Shanidev Aarti – Om Jai Jai Shani Maharaj in Hindi)

ॐ जय जय शनि महाराज,
स्वामी जय जय शनि महाराज ।
कृपा करो हम दीन रंक पर,
दुःख हरियो प्रभु आज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

सूरज के तुम बालक होकर,
जग में बड़े बलवान ।
सब देवताओं में तुम्हारा,
प्रथम मान है आज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

विक्रमराज को हुआ घमण्ड फिर,
अपने श्रेष्ठन का ।
चकनाचूर किया बुद्धि को,
हिला दिया सरताज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

प्रभु राम और पांडवजी को,
भेज दिया बनवास ।
कृपा होय जब तुम्हारी स्वामी,
बचाई उनकी लॉज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

शुर-संत राजा हरीशचंद्र का,
बेच दिया परिवार ।
पात्र हुए जब सत परीक्षा में,
देकर धन और राज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

गुरुनाथ को शिक्षा फाँसी की,
मन के गरबन को ।
होश में लाया सवा कलाक में,
फेरत निगाह राज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

माखन चोर वो कृष्ण कन्हाइ,
गैयन के रखवार ।
कलंक माथे का धोया उनका,
खड़े रूप विराज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

देखी लीला प्रभु आया चक्कर,
तन को अब न सतावे ।
माया बंधन से कर दो हमें,
भव सागर ज्ञानी राज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

मैं हूँ दीन अनाथ अज्ञानी,
भूल भई हमसे ।
क्षमा शांति दो नारायण को,
प्रणाम लो महाराज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

ॐ जय जय शनि महाराज,
स्वामी जय-जय शनि महाराज ।
कृपा करो हम दीन रंक पर,
दुःख हरियो प्रभु आज ॥
॥ ॐ जय जय शनि महाराज ॥

शनिदेव आरती इंग्लिश में
(Shanidev Aarti – Om Jai Jai Shani Maharaj in English)

Om Jai Jai Shri Shani Maharaj,
Swami Jai Shani Maharaj ।
Krupa Karo Hum Din Raj Par,
Dukh Hariyo Prabhu Aaj ॥
॥ Om Jai Jai Shri Shani Maharaj ॥

Suraj Ke Tum Balak Hokar,
Jag Main Bade Balwan ।
Sab Devo Main Tumhara,
Pratham Maan Hai Aaj ॥
॥ Om Jai Jai Shri Shani Maharaj ॥

Vikramraj Ko Hua Ghamend,
Apane Shrethan Ka ।
Chaknaachur Kiya Buddhi Ko,
Hila Diya Sartaj ॥
॥ Om Jai Jai Shri Shani Maharaj ॥

Prabhu Ram Aur Pandavji Ko,
Bhej Diya Banwas ।
Krupa Hoi Jab Tumhari,
Swami Bachai Unki Laaj ॥
॥ Om Jai Jai Shri Shani Maharaj ॥

Surya Sa Raja Harichandra Ka,
Bech Diya Parivar ।
Pas Hue Jab Sat Pariksha Main,
Dekar Dhan Aur Raaj ॥
॥ Om Jai Jai Shri Shani Maharaj ॥

Makhanchor Ho Krishna Kanhaai,
Gaiyyan Ke Rakhwar ।
Kalank Madhe Ko Dhoya,
Dhare Hai Roop Virat ॥
॥ Om Jai Jai Shri Shani Maharaj ॥

Main Hoon Din Adnyani,
Bhul Bhai Hamse ।
Kshma Shanty Do Narayan,
Pranam Lo Maharaj ॥
॥ Om Jai Jai Shri Shani Maharaj ॥

Om Jai Jai Shri Shani Maharaj,
Swami Jai Shani Maharaj ॥

शनिदेव के प्रसिद्ध मंदिर (Shanidev Famous Temples)

1. शनि शिंगणापुर (महाराष्ट्र)

  • अहमदनगर जिले में स्थित यह दुनिया का सबसे प्रसिद्ध और प्रमुख शनि मंदिर है यहाँ शनि देव की प्रतिमा बिना किसी छत के, खुले आसमान के नीचे एक काले पत्थर के रूप में स्थापित है। इस गाँव की सबसे अनूठी बात यह है कि यहाँ किसी भी घर या दुकान में दरवाजे और ताले नहीं हैं। मान्यता है कि स्वयं शनिदेव गाँव की रक्षा करते हैं

2. श्री शनिधाम मंदिर (नई दिल्ली)

  • छतरपुर के पास असोला में स्थित यह मंदिर देश के सबसे भव्य शनि मंदिरों में से एक है यहाँ शनि देव की दुनिया की सबसे ऊंची (लगभग 21 फीट) प्राकृतिक चट्टान की मूर्ति स्थापित है। मंदिर का मुख्य आकर्षण यहाँ का प्राकृतिक रूप से बना तेल का कुंड है।

3. शनिदेव मंदिर, खजुराहो (मध्य प्रदेश)

  • विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो के पास लवकुशनगर क्षेत्र में यह पौराणिक मंदिर स्थित है। इस मंदिर की शनि प्रतिमा को बहुत ही जाग्रत और चमत्कारी माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहाँ आकर जो भी भक्त सच्चे मन से सरसों के तेल का दीपक जलाता है, उसके जीवन की सभी आर्थिक और मानसिक बाधाएं दूर हो जाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. शनि देव कौन हैं?
  • हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनि देव सूर्य और देवी छाया (सवर्णा) के पुत्र हैं। वे यमराज के भाई हैं और उन्हें नवग्रहों में सबसे शक्तिशाली और न्यायपूर्ण देवता माना जाता है।
  • 2. शनि देव को कौन सा भोग प्रिय है?
  • शनि देव को उड़द की दाल की खिचड़ी, मीठी पूरी और सरसों के तेल में पका हुआ भोजन अर्पित किया जाता है।
  • 3.शनि देव की पूजा के लिए कौन सा दिन और रंग शुभ है?
  • शनि देव की पूजा के लिए शनिवार का दिन समर्पित है। इस दिन काला या गहरे नीले रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ माना जाता है।
  • 4. साढ़े साती (Sade Sati) क्या होती है?
  • जब शनि देव किसी व्यक्ति की चंद्र राशि (जन्म राशि) के पहले भाव, जन्म राशि और उसके बाद वाले भाव में गोचर करते हैं, तो उस साढ़े सात साल की अवधि को ‘साढ़े साती’ कहते हैं। यह जीवन में अनुशासन और कर्मों का लेखा-जोखा देने वाला समय माना जाता है।
  • 5. शनि देव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है?
  • रामायण काल की कथा के अनुसार, जब हनुमान जी ने लंका में शनि देव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, तब शनि देव के शरीर में बहुत पीड़ा हो रही थी। हनुमान जी ने उनके घावों पर सरसों का तेल लगाया, जिससे उन्हें तुरंत आराम मिला। तब से प्रसन्न होकर शनि देव ने कहा कि जो भी मुझे सच्चे मन से तेल अर्पित करेगा, उसे कष्टों से मुक्ति मिलेगी।

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