भागवत भगवान की आरती: यह आरती भगवान श्री कृष्ण की लीला, भक्ति, ज्ञान और वैराग्य का महान ग्रंथ है। श्रीमद् भागवत को पंचम वेद कहा जाता है। इसमें भगवान विष्णु के दस अवतारों की कथा विस्तार से वर्णित है, भागवत भगवान की आरती विशेष रूप से भगवान श्री कृष्ण की बाल लीलाओं, रासलीला और उपदेशों का वर्णन है। जन्माष्टमी , गोवर्धन पूजा और कृष्ण मंदिरों में भागवत पुराण आरती का पाठ करने से भक्त के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
भागवत भगवान की आरती हिन्दी में
(Bhagwat Bhagwan Ki Aarti in Hindi)
श्री भगवत भगवान की है आरती,
पापियों को पाप से है तारती।
ये अमर ग्रन्थ ये मुक्ति पन्थ,
ये पंचम वेद निराला,
नव ज्योति जलाने वाला।
हरि नाम यही हरि धाम यही,
यही जग मंगल की आरती
पापियों को पाप से है तारती॥
॥ श्री भगवत भगवान की है आरती…॥
ये शान्ति गीत पावन पुनीत,
पापों को मिटाने वाला,
हरि दरश दिखाने वाला।
यह सुख करनी, यह दुःख हरिनी,
श्री मधुसूदन की आरती,
पापियों को पाप से है तारती॥
॥ श्री भगवत भगवान की है आरती…॥
ये मधुर बोल, जग फन्द खोल,
सन्मार्ग दिखाने वाला,
बिगड़ी को बनानेवाला।
श्री राम यही, घनश्याम यही,
यही प्रभु की महिमा की आरती
पापियों को पाप से है तारती॥
॥ श्री भगवत भगवान की है आरती…॥
श्री भगवत भगवान की है आरती,
पापियों को पाप से है तारती।
भागवत भगवान की आरती इंग्लिश में
(Bhagwat Bhagwan Ki Aarti in English)
Shri Bhagwat Bhagwan Ki Hai Aarti,
Papiyon Ko Paap Se Hai Tarti.
Ye Amar Granth Ye Mukti Panth,
Ye Pancham Ved Nirala,
Nav Jyoti Jalane wala.
Hari Naam Yahi Hari Dham Yahi,
Yahi Jag Mangal Ki Aarti.
Papiyon Ko Paap Se Hai Tarti.
Shri Bhagwat Bhagwan Ki.
Ye Shanti Geet Pavan Puneet,
Papon Ko Mitane Wala,
Hari Darash Dikhane Wala.
Yah Sukh Karani,
Yah Duhkh Harini,
Shri Madhusoodan Ki Aarti,
Papiyon Ko Paap Se Hai Tarti.
Shri Bhagwat Bhagwan Ki.
Ye Madhur Bol,
Jag Phand Khol,
Sanmarg Dikhane Wala,
Bigadee Ko Banane Wala.
Shri Ram Yahi,
Ghanashyam Yahi,
Yahi Prabhu Ki Mahima Ki Aarti
Papiyon Ko Paap Se Hai Tarti.
Shri Bhagwat Bhagwan Ki Hai Aarti,
Papiyon Ko Paap Se Hai Tarti.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1.भागवत महापुराण को “पंचम वेद” क्यों कहा गया है?
- आरती की पंक्तियों में आता है— ये अमर ग्रन्थ ये मुक्ति पन्थ, ये पंचम वेद निराला। हिंदू धर्म में चार मुख्य वेद (ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद, अथर्ववेद) हैं। भगवान वेदव्यास जी ने आम जनमानस के लिए वेदों के कड़े ज्ञान को सरल और भक्ति रस में डुबोकर भागवत पुराण के रूप में लिखा, इसलिए इसे पांचवां वेद माना जाता है।
- 2. भागवत आरती के रचयिता कौन हैं?
- पारंपरिक रूप से यह आरती विभिन्न संतों और विद्वानों द्वारा जन-कल्याण के लिए संकलित की गई है, जिसमें भागवत ग्रंथ की महिमा, मुक्ति पथ और हरि नाम का गुणगान किया गया है
- 3. क्या स्त्रियाँ या बच्चे भी भागवत आरती का पाठ कर सकते हैं?
- हाँ, भागवत महापुराण भक्ति मार्ग का ग्रंथ है। इसमें जाति, लिंग या आयु का कोई बंधन नहीं है। शुद्ध मन से कोई भी इस आरती को गा या सुन सकता है।
- 4. भागवत महापुराण की मुख्य विषय-वस्तु क्या है?
- भागवत पुराण में भगवान के अवतारों (विशेष रूप से श्रीकृष्ण अवतार) का विस्तृत और मधुर वर्णन है। इसके दशम स्कंध (10th Chapter) में श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं और महिमा का ऐसा वर्णन है जो किसी भी दुखी मन को आनंद से भर देता है।
- 5. भागवत आरती कब और कैसे करनी चाहिए?
- इसे घर में सुबह या शाम के समय दैनिक पूजा के दौरान किया जा सकता है। भागवत कथा (सप्ताह) के दौरान इसका आयोजन प्रतिदिन कथा के समापन पर किया जाता है। आरती करते समय धूप, दीप, और कपूर का प्रयोग किया जाता है।
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