बाबोसा आरती: भारतीय संस्कृति में संतों, लोकदेवताओं और महापुरुषों की आराधना का विशेष महत्व है। इन्हीं पूजनीय विभूतियों में बाबोसा भगवान का नाम श्रद्धा और आस्था के साथ लिया जाता है। बाबोसा का अर्थ राजस्थानी संस्कृति में आदरणीय या पूजनीय पुरुष होता है.बचपन में उनका नाम पन्नालाल था, लेकिन उनकी अद्भुत दिव्य शक्तियों, शांत स्वभाव और परोपकारी प्रवृत्तियों के कारण लोग उन्हें आदर से “बाबोसा महाराज” कहकर पुकारने लगे। बाबोसा भगवान को भगवान हनुमान (बालाजी महाराज) का अवतार माना जाता है लोक मान्यता के अनुसार, उनका जन्म राजस्थान के चूरू जिले में कोठारी परिवार में हुआ था । उनके पिता का नाम श्री गेवरचंद जी कोठारी और माता का नाम श्रीमती छगनी देवी था। वे दोनों ही हनुमान जी के परम और अनन्य भक्त थे. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर हनुमान जी ने उनके घर पुत्र रूप में जन्म लिया था। राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली तथा देश के अनेक भागों में बाबोसा भगवान के लाखों भक्त हैं। भक्तजन उनकी आरती, भजन और सत्संग के माध्यम से उनका स्मरण करते हैं तथा जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त करने की कामना करते हैं। बाबोसा आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह भक्त और भगवान के बीच प्रेम, विश्वास तथा समर्पण का माध्यम भी है।
बाबोसा आरती हिन्दी में
(Babosa Aarti in Hindi)
देवा बाबोसा चूरू वाले,
भक्तो के है रखवाले,
रिम झिम उतारे तेरी आरती,
बाबोसा रिम झिम उतारे तेरी आरती ॥
सिर पे मुकुट कान में कुंडल,
हाथ में सोटा साजे,
जग मग जग मग रूप निराला,
जग मग जग मग रूप निराला,
भुत प्रेत सब भागे,
जय हो माता छगनी के लाले,
कोठारी कुल के तारे,
रिम झिम उतारे तेरी आरती,
बाबोसा रिम झिम उतारे तेरी आरती ॥
बालाजी ने राज तिलक से,
अपनी गोद बिठाया,
मृगसर पांचू भरे है मेला,
मृगसर पांचू भरे है मेला,
भक्तो के मन है भाया,
सबके मन को हरषाने वाले,
विपदा मिटाने वाले,
रिम झिम उतारे तेरी आरती,
बाबोसा रिम झिम उतारे तेरी आरती ॥
भक्ति भाव से करे आरती,
तेरे सारे पुजारी,
मन दर्पण में बसों बाबोसा,
मन दर्पण में बसों बाबोसा,
कलयुग के अवतारी,
तेरा मंजूदेवी गुण गाये,
गोपाला शीश नवाये,
रिम झिम उतारे तेरी आरती,
बाबोसा रिम झिम उतारे तेरी आरती ॥
देवा बाबोसा चूरू वाले,
भक्तो के है रखवाले,
रिम झिम उतारे तेरी आरती,
बाबोसा रिम झिम उतारे तेरी आरती ॥
बाबोसा आरती इंग्लिश में
(Babosa Aarti in English)
Deva Babosa Churu Wale,
Bhakto Ke Hai Rakhwale,
Rim Jhim Utare Teri Aarti,
Babosa Rim Jhim Utare Teri Aarti.
Sir Pe Mukut Kaam Mein Kundal,
Haath Mein Sota Saaje,
Jag Mag Jag Mag Roop Niraala,
Jag Mag Jag Mag Roop Niraala,
Bhoot Pret Sab Bhaage,
Jai Ho Mata Chhagini Ke Laale,
Kothari Kul Ke Taare,
Rim Jhim Utare Teri Aarti,
Babosa Rim Jhim Utare Teri Aarti.
Balaji Ne Raj Tilak Se,
Apni God Bithaaya,
Mrigasar Paachu Bhare Hai Mela,
Mrigasar Paachu Bhare Hai Mela,
Bhakto Ke Mann Hai Bhaya,
Sabke Mann Ko Harshane Wale,
Vipda Mitaane Wale,
Rim Jhim Utare Teri Aarti,
Babosa Rim Jhim Utare Teri Aarti.
Bhakti Bhav Se Kare Aarti,
Tere Saare Pujari,
Mann Darpan Mein Baso Babosa,
Mann Darpan Mein Baso Babosa,
Kalyug Ke Avataari,
Tera Manjudevi Gun Gaaye,
Gopala Sheesh Nawaaye,
Rim Jhim Utare Teri Aarti,
Babosa Rim Jhim Utare Teri Aarti.
Deva Babosa Churu Wale,
Bhakto Ke Hai Rakhwale,
Rim Jhim Utare Teri Aarti,
Babosa Rim Jhim Utare Teri Aarti.
भगवान बाबोसा के प्रसिद्ध मंदिर (Bhagwan Babosa Famous Temples)
1.श्री बाबोसा धाम , राजस्थान
- श्री बाबोसा धाम, राजस्थान का सबसे प्रसिद्ध और प्रमुख धाम राजस्थान के चूरू जिले में स्थित माना जाता है। यह स्थान लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और इसे श्री बालाजी बाबोसा महाराज धाम के नाम से जाना जाता है। भक्त बाबोसा महाराज को कलियुग में कृपा करने वाले देव स्वरूप के रूप में पूजते हैं। सभी श्रद्धालुओं का विश्वास है कि बाबोसा महाराज अपने भक्तों की मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1. भगवान बाबोसा कौन हैं?
- बाबोसा भगवान को भगवान हनुमान (बालाजी महाराज) का अवतार माना जाता है लोक मान्यता के अनुसार, उनका जन्म राजस्थान के चूरू जिले में कोठारी परिवार में हुआ था
- 2. बाबोसा भगवान का सांसारिक जन्म कब और कहाँ हुआ था?
- जन्म स्थान: उनका जन्म राजस्थान के चरू शहर में कोठारी परिवार (ओसवाल जैन समाज) में हुआ था.
- जन्म तिथि: हिंदी पंचांग के अनुसार, उनका जन्म माघ शुक्ल पंचमी (बसंत पंचमी) के पावन दिन हुआ था
- 3. बाबोसा महाराज के माता-पिता कौन थे?
- उनके पिता का नाम श्री गेवरचंद जी कोठारी और माता का नाम श्रीमती छगनी देवी था। वे दोनों ही हनुमान जी के परम और अनन्य भक्त थे. उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर हनुमान जी ने उनके घर पुत्र रूप में जन्म लिया।
- 4. भगवान बाबोसा को “बाबोसा” नाम कैसे मिला?
- बाबोसा का अर्थ राजस्थानी संस्कृति में आदरणीय या पूजनीय पुरुष होता है.बचपन में उनका नाम पन्नालाल था, लेकिन उनकी अद्भुत दिव्य शक्तियों, शांत स्वभाव और परोपकारी प्रवृत्तियों के कारण लोग उन्हें आदर से “बाबोसा महाराज” कहकर पुकारने लगे.
- 5. बाबोसा भगवान ने किस आयु में महाप्रयाण (देह त्याग) किया था?
- बाबोसा महाराज का सांसारिक जीवन बहुत छोटा था. उन्होंने मात्र 17 वर्ष की अल्पायु में ही अपने प्राण त्याग दिए थे। तिथि के अनुसार, भाद्रपद शुक्ल पंचमी (ऋषि पंचमी) के दिन वे स्वर्ग सिधारे थे
- 6. बाबोसा महाराज का मुख्य मंदिर कहाँ है?
- उनका मुख्य और ऐतिहासिक मंदिर राजस्थान के चूरू शहर (चूरू धाम) में स्थित है यह स्थान नई दिल्ली से लगभग 256 किलोमीटर दूर दिल्ली-बीकानेर रेलवे लाइन पर स्थित है।
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