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आरती (Aarti)

तुलसी माता आरती (Tulsi Mata Aarti)

जुलाई 19, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

तुलसी माता आरती: हिंदू धर्म में तुलसी माता को भगवान विष्णु की प्रिय पत्नी और पवित्रता की प्रतीक माना जाता है। वे माँ लक्ष्मी का स्वरूपा और पाप नाशिनी देवी है। कथा के अनुसार वृंदा के पति, राक्षस जालंधर के अत्याचारों को रोकने के लिए भगवान विष्णु को छल का सहारा लेना पड़ा। जब वृंदा को इसका पता चला, तो उन्होंने विष्णु जी को पत्थर (शालिग्राम) बन जाने का श्राप दिया। बाद में देवताओं के आग्रह पर उन्होंने श्राप वापस ले लिया और स्वयं अग्नि में सती हो गईं। उनकी राख से तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। तब भगवान विष्णु ने उनके प्रति अपनी अगाध भक्ति और सम्मान प्रकट करते हुए कहा कि “तुम मुझे मेरी आत्मा से भी अधिक प्रिय रहोगी”। इसी आशीर्वाद के रूप में हर साल प्रबोधिनी एकादशी को शालिग्राम जी के साथ तुलसी विवाह कराया जाता है। हर घर के आँगन में तुलसी का पौधा लगाया जाता है और रोजाना उनकी पूजा की जाती है।

तुलसी माता आरती हिन्दी में
(Tulsi Mata Aarti
in Hindi)

जय जय तुलसी माता,
मैया जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता,
सबकी वर माता ॥
॥ जय तुलसी माता…॥

सब योगों से ऊपर,
सब रोगों से ऊपर ।
रज से रक्ष करके,
सबकी भव त्राता ॥
॥ जय तुलसी माता…॥

बटु पुत्री है श्यामा,
सूर बल्ली है ग्राम्या ।
विष्णुप्रिय जो नर तुमको सेवे,
सो नर तर जाता ॥
॥ जय तुलसी माता…॥

हरि के शीश विराजत,
त्रिभुवन से हो वंदित ।
पतित जनों की तारिणी,
तुम हो विख्याता ॥
॥ जय तुलसी माता…॥

लेकर जन्म विजन में,
आई दिव्य भवन में ।
मानव लोक तुम्हीं से,
सुख-संपति पाता ॥
॥ जय तुलसी माता…॥

हरि को तुम अति प्यारी,
श्याम वर्ण सुकुमारी ।
प्रेम अजब है उनका,
तुमसे कैसा नाता ॥
हमारी विपद हरो तुम,
कृपा करो माता ॥
॥ जय तुलसी माता…॥

जय जय तुलसी माता,
मैया जय तुलसी माता ।
सब जग की सुख दाता,
सबकी वर माता ॥

तुलसी माता आरती इंग्लिश में
(Tulsi Mata Aarti
in English)

Jai Jai Tulsi Mata, Maiya Jai Tulsi Mata।
Sab Jag Ki Sukh Data, Sabki var Mata॥
॥Jai Jai Tulsi Mata…॥

Sab Yugon Ke Upar, Sab Logon Ke Upar।
Raj Se Raksha Karke, Sabki Bhav Trata॥
॥Jai Jai Tulsi Mata…॥

Batu Putri Hai Shyama, Sur Balli Hai Gramya।
Vishnu Priye Jo Nar Tumko Seve, So Nar Tar Jata॥
॥Jai Jai Tulsi Mata…॥

Hari Ke Shish Virajat, Tribhuvan Se Ho Vandit।
Patit Jano Ki Tarini, Tum Ho Vikhyata॥
॥Jai Jai Tulsi Mata…॥

Lekar Janam Vijan Mein, Aayi Divya Bhavan Me।
Manavlok Tumhi Se, Sukh -Sampati Pata॥
॥Jai Jai Tulsi Mata…॥

Hari Ko Tum Ati Pyari, Shyam Varan Kumari।
Prem Ajab Hai Unka, Tumse Kaisa Nata॥
Hamari Vipad Haro Tum, Kripa Karo Mata॥ [Extra]

Jai Jai Tulsi Mata, Maiya Jai Tulsi Mata।
Sab Jag Ki Sukh Data, Sabki var Mata॥

तुलसी माता के प्रसिद्ध मंदिर (Tulsi Mata Famous Temples)

1. तुलसी मानस मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)

  • यह काशी का एक बहुत प्रसिद्ध और आधुनिक मंदिर है। सफेद संगमरमर से बने इस मंदिर का निर्माण 1964 में हुआ था। मान्यता है कि यहीं बैठकर महान संत गोस्वामी तुलसीदास जी ने महाकाव्य ‘रामचरितमानस’ की रचना की थी। मंदिर की दीवारों पर रामचरितमानस की चौपाइयां और दोहे भी खुदे हुए हैं।

2. तुलसी कुण्ड और वृंदा देवी मंदिर (नंदगांव, उत्तर प्रदेश)

  • तुलसी कुण्ड (जिसे वृंदा कुण्ड भी कहा जाता है) और वृंदा देवी मंदिर, उत्तर प्रदेश के मथुरा जिले में नंदगांव से लगभग 1 से 1.5 किलोमीटर पश्चिम में स्थित एक अत्यंत पवित्र, प्राचीन और शांत आध्यात्मिक स्थल है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह स्थान श्री राधा-कृष्ण की नित्य लीलाओं का मुख्य केंद्र और ब्रज के 8 प्रमुख योगपीठों में से पहला ‘गुप्त कुण्ड’ माना जाता है।

3. काम्यवन वृंदा देवी मंदिर (कामां, राजस्थान)

  • ब्रज चौरासी कोस परिक्रमा के अंतर्गत आने वाले काम्यवन में यह मंदिर स्थित है। जब मुगलों के आक्रमण के समय वृंदावन से मूर्तियों को सुरक्षित निकाला जा रहा था, तब देवी वृंदा की मूल प्रतिमा को यहाँ लाया गया था। लोक मान्यता है कि जब पुजारियों ने बाद में इस मूर्ति को जयपुर ले जाने के लिए उठाने का प्रयास किया, तो माता की मूर्ति इतनी भारी हो गई कि उसे हिलाया भी नहीं जा सका। तब से देवी वृंदा यहीं विराजमान हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. तुलसी का विवाह भगवान विष्णु से कैसे हुआ?
  • वृंदा के पति, राक्षस जालंधर के अत्याचारों को रोकने के लिए भगवान विष्णु को छल का सहारा लेना पड़ा। जब वृंदा को इसका पता चला, तो उन्होंने विष्णु जी को पत्थर (शालिग्राम) बन जाने का श्राप दिया। बाद में देवताओं के आग्रह पर उन्होंने श्राप वापस ले लिया और स्वयं अग्नि में सती हो गईं। उनकी राख से तुलसी का पौधा उत्पन्न हुआ। इसी आशीर्वाद के रूप में हर साल प्रबोधिनी एकादशी को शालिग्राम जी के साथ तुलसी का विवाह (तुलसी विवाह) कराया जाता है।
  • 2. उनका नाम ‘वृंदा’ क्यों था और इसका क्या अर्थ है?
  • ‘वृंदा’ का अर्थ होता है “समूह” या “जत्था” (विशेषकर पवित्र पौधों या सखियों का समूह)। वे दिव्य वनों और प्रकृति की अधिष्ठात्री देवी मानी जाती हैं, इसलिए उन्हें वृंदा कहा गया। उन्हीं के नाम पर भगवान कृष्ण की लीला स्थली का नाम ‘वृंदावन’ पड़ा
  • 3.तुलसी विवाह कब और क्यों मनाया जाता है?
  • हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की एकादशी (देवउठनी एकादशी) या द्वादशी को तुलसी विवाह मनाया जाता है। इस दिन तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी से कराया जाता है। माना जाता है कि इससे कन्यादान के बराबर पुण्य मिलता है।
  • 4. घर में सूखी हुई तुलसी का क्या करना चाहिए?
  • यदि तुलसी का पौधा सूख जाए, तो उसे आदरपूर्वक गमले से निकालकर किसी पवित्र नदी या जलाशय में प्रवाहित कर देना चाहिए। सूखे पौधे को घर में रखना वास्तु के अनुसार ठीक नहीं माना जाता।
  • 5. क्या तुलसी माता का जन्म किसी मानव गर्भ से हुआ था?उत्तर:
  • पौराणिक ग्रंथों के अनुसार, जब वे धरती पर प्रकट हुईं, तो राजा धर्मध्वज और उनकी पत्नी माधवी के यहाँ एक अत्यंत सुंदर कन्या का जन्म हुआ। जन्म के समय ही उनके मुख पर दिव्य तेज था, इसलिए उन्हें साक्षात देवी का रूप माना गया।

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