श्री राणी सती दादी आरती: भारतीय संस्कृति में सती माताओं और शक्ति स्वरूपिणी देवियों की पूजा का विशेष महत्व है। इन्हीं में श्री राणी सती दादी जी का स्थान अत्यंत पवित्र है। राणी सती दादी जी का अवतार महाभारत काल से जुड़ा माना जाता है। महाभारत युद्ध में अभिमन्यु की पत्नी उत्तरा ने सती होने की इच्छा व्यक्त की थी। तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें वरदान दिया कि अगले जन्म में वे सती का उदाहरण प्रस्तुत करेंगी। इस वरदान के फलस्वरूप विक्रम संवत 1352 में नारायणी बाई (राणी सती) का जन्म राजस्थान के डोकवा गांव में हुआ। उनका विवाह हिसार के तनधन दास जी से हुआ। पति की मृत्यु के बाद नारायणी बाई ने सती होने का संकल्प लिया। उनकी पवित्रता, साहस और सतीत्व ने उन्हें देवी स्वरूप प्रदान किया। आज वे विपत्ति हरन वाली, संकट मोचन और भक्तों की रक्षक के रूप में पूजी जाती हैं। राजस्थान के झुंझुनू में स्थित उनका प्रसिद्ध मंदिर लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। श्री राणी सती दादी जी की आरती भक्तों के हृदय में असीम शक्ति, साहस और शांति का संचार करती है। यह आरती विपत्तियों को दूर करने वाली माँ की करुणा और भक्तवत्सलता का प्रतीक है।
श्री राणी सती दादी आरती हिन्दी में
(Shri Rani Sati Dadi Aarti in Hindi)
ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ।
अपने भक्त जनन की,
दूर करन विपत्ती ॥
ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥
अवनि अननंतर ज्योति अखंडीत,
मंडितचहुँक कुंभा ।
दुर्जन दलन खडग की,
विद्युतसम प्रतिभा ॥
ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥
मरकत मणि मंदिर अतिमंजुल,
शोभा लखि न पडे ।
ललित ध्वजा चहुँ ओरे,
कंचन कलश धरे ॥
ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥
घंटा घनन घडावल बाजे,
शंख मृदुग घूरे ।
किन्नर गायन करते,
वेद ध्वनि उचरे ॥
ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥
सप्त मात्रिका करे आरती,
सुरगण ध्यान धरे ।
विविध प्रकार के व्यजंन,
श्रीफल भेट धरे ॥
ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥
संकट विकट विदारनि,
नाशनि हो कुमति ।
सेवक जन ह्रदय पटले,
मृदूल करन सुमति ॥
ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥
अमल कमल दल लोचनी,
मोचनी त्रय तापा ।
त्रिलोक चंद्र मैया तेरी,
शरण गहुँ माता ॥
ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ॥
या मैया जी की आरती,
प्रतिदिन जो कोई गाता ।
सदन सिद्ध नव निध फल,
मनवांछित पावे ॥
ॐ जय श्री राणी सती माता,
मैया जय राणी सती माता ।
अपने भक्त जनन की,
दूर करन विपत्ती ॥
श्री राणी सती दादी आरती इंग्लिश में
(Shri Rani Sati Dadi Aarti in English)
Om Jai Sri Ranisatiji Mata,
Maiya Jai Rani Sati Mata ।
Apne Bhakt Janan Ki,
Door Karan Vipada ॥
Avani Anantar Jyoti Akhandit,
Mandit Chahunk Kumbha ।
Durjan Dalan Khadg ki,
Vidhut Sam Pratibha ॥
Om Jai Sri Ranisatiji Mata,
Maiya Jai Rani Sati Mata ॥
Markat Mani Mandir Ati Manjul,
Shobha Lakhi Na Pare ।
Lalit Dhvaja Chahun Aure,
Kanchan Kalash Dhare ॥
Om Jai Sri Ranisatiji Mata,
Maiya Jai Rani Sati Mata ॥
Ghanta Ghanan Ghadaval Baje,
Shankh Mridang Dhure ।
Kinnar Gayan Karte,
Ved Dhwani Uchare ॥
Om Jai Sri Ranisatiji Mata,
Maiya Jai Rani Sati Mata ॥
Sapta Matrika Kare Aarti,
Surgan Dhyan Dhare ।
Vividh Prakar Ke Vyanjan,
Sriphal Bhentha Dhare ॥
Om Jai Sri Ranisatiji Mata,
Maiya Jai Rani Sati Mata ॥
Sankat Vikat Vidarani,
Nashani Ho Komati ।
Sevak Jan Hriday Patale,
Mridul Karan Sumati ॥
Om Jai Sri Ranisatiji Mata,
Maiya Jai Rani Sati Mata ॥
Amal Kamal Dal Lochani,
Mochani Traya Tapa ।
Sevan Aayo Sharan Aapki,
Laaj Rakho Mata ॥
Om Jai Sri Ranisatiji Mata,
Maiya Jai Rani Sati Mata ॥
Ya Miyaji Ki Aarti pratidin,
Parti Din Jo Koi Gata ।
Sadan Siddhi Nav Nidhiphal,
Mann Vancchit Paave ॥
Om Jai Sri Ranisatiji Mata,
Maiya Jai Rani Sati Mata ।
Apne Bhakt Janan Ki,
Door Karan Vipada ॥
श्री राणी सती दादी जी के प्रसिद्ध मंदिर (Shri Rani Sati Dadi Ji Famous Temples)
1. श्री राणी सती मंदिर, झुंझुनू (राजस्थान)
- श्री राणी सती मंदिर यह सबसे प्राचीन और मुख्य मंदिर है । ये मंदिर राजस्थान के झुंझुनू में स्थित है । राजमहल की तरह दिखने वाले इस भव्य संगमरमर मंदिर में श्री राणी सती दादी जी का त्रिशूल स्थापित है । यहाँ आवास, कैंटीन और गौशाला की बेहतरीन सुविधा उपलब्ध है
2. श्री राणी सती मंदिर, कोलकाता (पश्चिम बंगाल)
- कोलकाता का बड़ाबाजार क्षेत्र मारवाड़ी संस्कृति का बड़ा केंद्र है। यहाँ स्थित राणी सती दादी जी का मंदिर कोलकाता के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक है।भाद्रपद अमावस्या और मंगला पाठ के दौरान यहाँ पैर रखने की जगह नहीं होती है। मंदिर में संगमरमर का बेहतरीन काम और आकर्षक नक्काशी की गई है।
3. श्री राणी सती मंदिर, हैदराबाद (तेलंगाना)
- दक्षिण भारत में रहने वाले उत्तर भारतीय और मारवाड़ी प्रवासियों के लिए यह सबसे बड़ा आस्था का केंद्र है। यह मंदिर सिकंदराबाद और हैदराबाद के सीमावर्ती क्षेत्र में स्थित है। यहाँ दादी जी के उत्सवों पर राजस्थानी शैली में भजन संध्या, चुनरी उत्सव और छप्पन भोग का भव्य आयोजन किया जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1 रानी सती दादी जी का मूल नाम क्या था?
- रानी सती जी का वास्तविक नाम नारायणी देवी था
- 2. नारायणी देवी का विवाह किससे हुआ था और उनके पति कौन थे?
- नारायणी देवी का विवाह हिसार के सेठ जालीराम जी के पुत्र तनधन दास जी से हुआ था। तांधन दास जी एक वीर और स्वाभिमानी व्यक्ति थे।
- 3. उनकी पूजा कब और कैसे की जाती है?
- उत्तर: भाद्रपद (भादो) मास की अमावस्या जिसे ‘सतियों की अमावस्या’ भी कहा जाता है, पर दादी जी का भव्य पूजन होता है। इस दिन भक्त मंदिर में जाकर ‘दादी जी’ की पूजा करते हैं और मनोकामना मांगते हैं
- 4. रानी सती दादी जी का मुख्य मंदिर कहाँ स्थित है?
- रानी सती दादी का मुख्य और सबसे बड़ा ऐतिहासिक मंदिर राजस्थान के झुंझुनू जिले में स्थित है। इसके अलावा देश भर में उनके कई अन्य मंदिर भी बने हुए हैं
- 5. रानी सती दादी जी की कहानी क्या है?
- पौराणिक मान्यताओं और जनश्रुतियों के अनुसार, राणी सती जी महाभारत काल की उत्तरा (अभिमन्यु की पत्नी) का अवतार थीं| कलयुग में उनका जन्म राजस्थान के डोकवा गाँव में सेठ गुरसामल के यहाँ नारायणी देवी के रूप में हुआ| उनका विवाह तनधन दास जी (अभिमन्यु का पुनर्जन्म) से हुआ था| किंवदंती है कि हिसार के नवाब के सैनिकों द्वारा उनके पति की हत्या किए जाने के बाद, उन्होंने बहादुरी से युद्ध किया और सती हो गईं।
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