माँ कूष्मांडा आरती: नवरात्रि के पावन पर्व में माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है। इनमें चौथा स्वरूप माँ कूष्मांडा का है, जिन्हें ब्रह्मांड की सृष्टिकर्त्री माना जाता है। “कूष्मांडा” नाम संस्कृत के शब्दों से मिल कर बना है। कू’ का अर्थ है छोटा, ‘उष्मा’ का अर्थ है ऊर्जा या गर्मी, और ‘अंडा’ का अर्थ है ब्रह्मांडीय अंडा। देवी ने इसी ब्रह्मांडीय अंडे से पूरी सृष्टि की रचना की है, इसलिए उन्हें कूष्मांडा कहा जाता है। माँ कूष्मांडा आठ भुजाओं वाली देवी हैं। उनके सात हाथों में कमल, गदा, चक्र, तलवार, धनुष-बाण, कमंडल और माला हैं, जबकि आठवें हाथ में अभय मुद्रा है। वे सिंह पर सवार रहती हैं। उनकी पूजा से भक्तों को रोग-शोक से मुक्ति, तेजस्विता और आत्मविश्वास प्राप्त होता है। नवरात्रि के चौथे दिन माँ कूष्मांडा देवी व्रत कर उनकी उपासना करने से व्यक्ती की सभी मनोकामना पूरी होती है।
माँ कूष्मांडा आरती हिन्दी में
(Maa Kushmanda Aarti in Hindi)
कूष्मांडा जय जग सुखदानी ।
मुझ पर दया करो महारानी ॥
पिगंला ज्वालामुखी निराली ।
शाकंबरी मां भोली भाली ॥
लाखों नाम निराले तेरे ।
भक्त कई मतवाले तेरे ॥
भीमा पर्वत पर है डेरा ।
स्वीकारो प्रणाम ये मेरा ॥
सबकी सुनती हो जगदंबे ।
सुख पहुंचती हो मां अंबे ॥
तेरे दर्शन का मैं प्यासा ।
पूर्ण कर दो मेरी आशा ॥
मां के मन में ममता भारी ।
क्यों ना सुनेगी अरज हमारी ॥
तेरे दर पर किया है डेरा ।
दूर करो माँ संकट मेरा ॥
मेरे कारज पूरे कर दो ।
मेरे तुम भंडारे भर दो ॥
तेरा दास तुझे ही ध्याए ।
भक्त तेरे दर शीश झुकाए ॥
माँ कूष्मांडा आरती इंग्लिश में
(Maa Kushmanda Aarti in English)
Kushmanda Jai Jag Sukhdani ।
Mujh Par Daya Karo Maharani ॥
Piganla Jwalamukhi Nirali ।
Shakambari Maan Bholi Bhali ॥
Lakhon Naam Nirale Tere ।
Bhakt Kai Matwale Tere ॥
Bheema Parvat Par Hai Dera ।
Sweekaro Pranam Ye Mera ॥
Sabaki Sunti Ho Jagdambe ।
Sukh Pahunchati Ho Maan Ambe ॥
Tere Darshan Ka Main Pyasa ।
Poorn Kar Do Meri Aasha ॥
Maan Ke Man Mein Mamta Bhaari ।
Kyon Na Sunegi Araj Hamari ॥
Tere Dar Par Kiya Hai Dera ।
Door Karo Maan Sankat Mera ॥
Mere Kaaraj Poore Kar Do ।
Mere Tum Bhandare Bhar Do ॥
Tera Daas Tujhe Hi Dhyae ।
Bhakt Tere Dar Sheesh Jhukaye ॥
माँ कूष्मांडा के प्रसिद्ध मंदिर (Maa Kushmanda Famous Temples)
1. श्री कुष्मांडा देवी मंदिर, कानपुर (उत्तर प्रदेश)
- कानपुर जिले के घाटमपुर तहसील में। यह एशिया का सबसे बड़ा और सबसे प्राचीन माँ कूष्मांडा मंदिर माना जाता है। यहाँ माता एक पिंडी के रूप में विराजमान हैं। इस रहस्यमय पिंडी से लगातार जल रिसता रहता है। मान्यता है कि इस पवित्र जल (नीर) से आँखों की बीमारियां और कई असाध्य रोग दूर हो जाते हैं।
2. माँ कूष्मांडा मंदिर (दुर्गा मंदिर), वाराणसी (उत्तर प्रदेश)
- काशी (वाराणसी) के दुर्गा कुंड इलाके में। देवी भागवत पुराण और लिंग पुराण जैसे प्राचीन ग्रंथों में इस सिद्ध शक्तिपीठ का उल्लेख है। इसे ‘दुर्गा मंदिर’ या ‘मंकी टेंपल’ भी कहा जाता है। यह मंदिर नागर शैली की वास्तुकला में निर्मित है और इसके समीप स्थित ‘दुर्गा कुंड’ काफी प्रसिद्ध है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1. माँ कूष्मांडा कौन हैं और उनका नाम ‘कूष्मांडा’ क्यों पड़ा?
- ‘कू’ का अर्थ है छोटा, ‘उष्मा’ का अर्थ है ऊर्जा या गर्मी, और ‘अंडा’ का अर्थ है ब्रह्मांडीय अंडा। देवी ने इसी ब्रह्मांडीय अंडे से पूरी सृष्टि की रचना की है, इसलिए उन्हें कूष्मांडा कहा जाता है। उन्हें आदि शक्ति और आदिसवरूप भी माना जाता है।
- 2. नवरात्रि के चौथे दिन माता को कौन सा फूल चढ़ाना सबसे उत्तम है?
- माता को चमेली का फूल या पीले रंग के गेंदे के फूल अर्पित करना बहुत शुभ माना जाता है।
- 3. माँ कूष्मांडा का रूप कैसा है?
- माता का वाहन सिंह (शेर) है उनकी अष्टभुजाएँ (आठ हाथ) हैं। जिनमें वे कमंडलु, धनुष, बाण, कमल-पुष्प, अमृत से भरा कलश, चक्र, गदा और जपमाला धारण करती हैं।
- 4. माँ कूष्मांडा को किस चीज का भोग लगाया जाता है?
- माता को हरा कद्दू (कुम्हड़ा), मालपुआ, और हलवे का भोग अत्यंत प्रिय है। इसके अलावा पीले रंग के फल और फूल भी अर्पित किए जाते हैं
- 5. माँ कूष्मांडा की पूजा का क्या लाभ है?
- माता की कृपा से भक्तों के पुराने रोग और कष्ट दूर होते हैं । बुद्धि, तेज और यश की प्राप्ति होती है इसके अलावा, ज्योतिष में इन्हें सूर्य ग्रह का नियंत्रक माना जाता है जिससे आत्मविश्वास बढ़ता है।
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