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गुरु नानक जयंती 2025

अक्टूबर 24, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

सिख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानक देव जी के जन्मदिन पर गुरु नानक जयंती मनाई जाती है। गुरु नानक जयंती को गुरु पर्व या प्रकाश पर्व भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार, यह पर्व हर साल कार्तिक मास की पूर्णिमा तिथि को बड़े हर्ष और श्रद्धा से मनाया जाता है। दीपावली के लगभग 15 दिन बाद आने वाला यह दिन सिख समुदाय के सबसे बड़े त्योहारों में से एक है। इस दिन गुरुद्वारे में भजन कीर्तन के साथ-साथ लंगर का आयोजन किया जाता है। बता दें कि गुरु नानक देव जी का जन्म 1469ईस्वी को हुआ था और तब से लेकर अब तक हर साल उनकी जयंती मनाई जाती है।

गुरु नानक जयंती का महत्व

गुरु नानक जी का जन्म 1469 में हुआ था और वे 15वीं शताब्दी के घोर असमानता के दौर में रहे। वे सिख धर्म के संस्थापक और पहले सिख गुरु बने। एकता और पवित्रता का संदेश फैलाने के लिए उन्होंने कई मील की यात्राएँ कीं।

उनकी शिक्षाओं में मुख्यतः तीन बातें शामिल थीं: ‘वंड चक्को’, ‘किरत करो’ और ‘नाम जपना’। ‘वंड चक्को’ का अर्थ है दूसरों के साथ बाँटना और ज़रूरतमंदों की मदद करना। ‘किरत करो’ का अर्थ है बिना किसी का शोषण किए और बिना किसी धोखाधड़ी के ईमानदारी से जीवनयापन करना, और ‘नाम जपना’ का अर्थ है ईश्वर के नाम का ध्यान करके अपनी बुराइयों पर नियंत्रण करना।

गुरु नानक देव जी कौन थे?

गुरु नानक देव पहले सिख गुरु और सिख धर्म के संस्थापक थे। उन्हें उनके अनुयायियों में नानक देव जी, बाबा नानक और नानकशाह के नाम से जाना जाता है। लद्दाख और तिब्बत में नानक देव जी को नानक लामा के नाम से जाना जाता है। उन्होंने अपना पूरा जीवन मानव जाति की सेवा में समर्पित कर दिया। अपनी शिक्षाओं और संदेश का प्रचार करने के लिए, नानक जी ने न केवल दक्षिण एशिया में बल्कि अफगानिस्तान, ईरान और अरब देशों तक के क्षेत्रों में व्यापक यात्रा की। पंजाबी भाषा में उनकी यात्राओं को उदासी के नाम से जाना जाता है।

उन्होंने अपनी पहली उदासी यात्रा 1507 ईसवी से 1515 ईस्वी के बीच की। सोलह वर्ष की आयु में, उन्होंने सुलखनी देवी से विवाह किया और दो पुत्रों, श्री चंद और लखमी दास के पिता बने। 

नानक देव जी ने 1539 ई. में वर्तमान पाकिस्तान के करतारपुर जिले की एक धर्मशाला में अंतिम सांस ली। अपनी मृत्यु से पहले, उन्होंने भाई लहना को अपना उत्तराधिकारी घोषित किया था, जिसे बाद में गुरु अंगद देव के नाम से जाना जाने लगा। गुरु अंगद देव सिखों के दूसरे गुरु थे। गुरु नानक देव जी पहले सिख गुरु थे। उन्होंने करतारपुर साहिब गुरुद्वारे की नींव रखी। उनकी जयंती को गुरु पर्व के रूप में मनाया जाता है, जिसे गुरु पर्व और प्रकाश पर्व के नाम से भी जाना जाता है।

गुरु नानक जयंती 2025 मुहूर्त

गुरु नानक की 556वाँ जन्म वर्षगाँठ

गुरु नानक जयन्ती बुधवार, नवम्बर 5, 2025 को

पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 04, 2025 को सुबह 10:36 बजे

पूर्णिमा तिथि समाप्त – नवम्बर 05, 2025 को सुबह 06:48 बजे

गुरु नानक जयंती पूजा विधि

सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्म करके स्नान आदि करके साफ या नये कपड़े पहनकर गुरुद्वारे में जाकर पूजा पाठ करते है। और मंदिर में अपने सामर्थ्य के अनुसार कुछ दान-दक्षिणा देते है। और गुरू नानक देव जी द्वारा बतलाये गए वचन को सुनने है। और धर्म के पथ पर चलने का प्रण लेते है। और शाम को अपनी श्रद्धा के अनुसार भोजन आदि कराते है।

गुरु नानक जयंती की कथा

एक बार नानक जी ने घोड़े के व्यापार से मिले पैसों को साधु सेवा में लगा दिया। जब उनके पिता ने इस बारे में पूछा तो नानक जी ने जवाब दिया कि यह सच्चा व्यापार है। बाद में पिता ने नानक जी को उनके बहनोई जयराम के पास सुल्तानपुर भेज दिया।

बहनोई के प्रयासों से नानक जी को सुल्तानपुर के गवर्नर दौलत खां के यहां काम पर रख लिया गया। नानक जी बहुत ईमानदारी से काम करते थे। इस कारण जनता के साथ शासक दौलत खां भी नानक से बेहद खुश रहते।

हालांकि नानक में जनसेवा की भावना हमेशा रही। वह जो भी आय अर्जित करते उसका एक बड़ा हिस्सा गरीबों और साधुओं को दान कर देते। कभी कभी तो पूरी रात परमात्मा के भजन में लीन रहते। बाद में मरदाना से उनकी मुलाकात हुई, जो गुरु नानक के सेवक बन गए और आखिरी समय तक उनके साथ रहे।

रोजाना सुबह गुरु नानक देव जी बई नदी में स्नान के लिए जाया करते थे। कहा जाता है कि एक रोज जब स्नान के बाद वह जंगल में गए तो एकाएक वन में अंतर्धान हो गए। मान्यता है कि वहां उनका परमात्मा से साक्षात्कार हुआ। इसके बाद उनके जीवन में बदलाव आया। अपने परिवार की जिम्मेदारी ससुर मूला को सौंपकर गुरु नानक देव धर्म के प्रचार के मार्ग पर चल दिए और एक संत बन गए। 

गुरु नानक जयंती पर नगर कीर्तन का महत्व

गुरु नानक देव जी की जयंती पर प्रभात फेरी का भी बहुत महत्व है। गुरु नानक जयंती से कुछ दिन पहले ही सुबह-सुबह प्रभात फेरियां निकालनी शुरू हो जाती है लेकिन गुरु नानक जयंती पर एक विशाल नगर कीर्तन भी निकाला जाता है जिसकी अगुवाई पंज प्यारे करते हैं। श्री गुरु ग्रंथ साहिब को फूलों से सजी पालकी में रखकर पूरे नगर में घुमाया जाता है और अंत में गुरुद्वारे वापस लाया जाता है। इन प्रभात फेरियों में श्रद्धालु भजन-कीर्तन करते हुए गुरु नानक देव जी के उपदेशों का प्रचार करते हैं। रास्ते में जगह-जगह श्रद्धालुओं का स्वागत किया जाता है। प्रभात फेरियों के साथ-साथ घर-घर जाकर भी कीर्तन किया जाता है। लोगों के घरों में कीर्तन करने वालों का स्वागत फूलों और आतिशबाजी से किया जाता है।

गुरु नानक देव जी के 10 अनमोल वचन

1. ईश्वर एक है और वह सभी जगह विद्यमान हैं.

2. हमेशा एक ईश्वर की साधना में मन लगाना चाहिए.

3. हमें हमेशा खुश रहना चाहिए और ईश्वर से अपनी गलतियों के लिए क्षमा-याचना करना चाहिए.

4. समाज के सभी लोगों को समान नजरिये से देखना चाहिए, स्त्री-पुरुष में भेदभाव नहीं करना चाहिए.

5. संसार को जीतने की भावना मन में है तो पहले खुद की बुराइयों और गलत आदतों पर विजय पाने की कोशिश करना चाहिए.

6. हमें कभी भी किसी दूसरे व्यक्ति का हक नहीं मारना चाहिए.

7. अपनी मेहनत और ईमानदारी की कमाई में से कुछ हिस्सा गरीबों और जरूरतमंदों को दान करना चाहिए.

8. पैसे का स्थान हमेशा अपनी जेब में ही रहना चाहिए. इसे कभी भी अपने ह्रदय से लगाकर नहीं रखना चाहिए.

9. हमें कभी भी अपने अंदर अहंकार नहीं लाना चाहिए और हमेशा ही विनम्रता से जीवन जीना चाहिए.

10. हमें सभी लोगों से प्रेम करना चाहिए और हमेशा समाज में एकता, समानता व भाईचारा का संदेश देना चाहिए




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