नरक चतुर्दशी 2026
त्योहार

नरक चतुर्दशी 2026 (Naraka Chauth 2026) – ज्ञान की बातें

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नरक चतुर्दशी, जिसे छोटी दिवाली या काली चौदस के नाम से भी जाना जाता है, यह पर्व दीवाली के एक दिन पहले मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से यमराज, जो मृत्यु के देवता हैं, को प्रसन्न करने के लिए एक दीपक (यम का दीप) जलाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन विधिपूर्वक और श्रद्धा से दीप जलाने से अकाल मृत्यु, विपत्तियां और बाधाएं दूर हो जाती हैं।अगर इस दिन सही विधि और श्रद्धा से यम का दीप जलाया जाए, तो यमदेवता प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों को दीर्घायु व आरोग्यता का आशीर्वाद देते हैं।

नरक चतुर्दशी का महत्व

जैसा ही हम सभी जानते हैं, छोटी दिवाली को नरक चतुर्दशी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन यम की पूजा करने से जातक अकाल मृत्यु से बच सकता है। यह मृत्यु के बाद नरक में जाने से बचने का उपाय भी है। ऐसा भी कहा जाता है, कि इस दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद भगवान कृष्ण की पूजा करने से आपको रूप सौंदर्य की प्राप्ति होती है।

नरक चतुर्दशी 2026 मुहूर्त

नरक चतुर्दशी रविवार, नवम्बर 8, 2026 को

अभ्यंग स्नान मुहूर्त – 05:36 AM से 06:38 AM

चतुर्दशी तिथि प्रारम्भ – नवम्बर 07, 2026 को 10:47 AM बजे

चतुर्दशी तिथि समाप्त – नवम्बर 08, 2026 को 11:27 AM बजे

नरक चतुर्दशी पूजा विधि

  • नरक चतुर्दशी के दिन सूर्य उदय से पहले स्नान करने का महत्व है। इस दौरान तिल के तेल से शरीर की मालिश करना शुभ होता है
  • स्नान करने के बाद अपामार्ग यानि चिरचिरा को सिर के ऊपर से चारों ओर 3 बार घुमाया जाता है।
  • स्नान के बाद हाथ जोड़कर यमराज से प्रार्थना की जाती है। कहते हैं ऐसा करने से मनुष्य द्वारा वर्ष भर में किए गए पापों से मुक्ति मिल जाती है।
  • इस दिन शाम के समय यमराज के निमित्त तेल का दीया मुख्य द्वार से बाहर की दक्षिण दिशा की तरफ जलाया जाता है।
  • छोटी दिवाली यानी नरक चतुर्दशी के दिन शाम के समय सभी देवताओं की पूजा करने के बाद तेल का दीपक जलाकर घर की चौखट के दोनों ओर, घर के बाहर और कार्य स्थल के प्रवेश द्वार पर रखने से लक्ष्मी जी प्रसन्न होती हैं।

नरक चतुर्दशी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार नरकासुर नामक एक राक्षस ने अपनी शक्तियों से देवता और साधु संतों को परेशान कर दिया था। नरकासुर का अत्याचार इतना बढ़ने लगा कि उसने देवताओं और उस समय के संतों की 16 हजार स्त्रियों को बंधक बना लिया। नरकासुर के अत्याचारों से परेशान होकर समस्त देवता और साधु-संत भगवान श्री कृष्ण की शरण में गए। इसके बाद भगवान श्री कृष्ण ने सभी को नरकासुर के आतंक से मुक्ति दिलाने का आश्वासन दिया। नरकासुर को स्त्री के हाथों से मरने का श्राप था, इसलिए भगवान श्री कृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा की मदद से कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को नरकासुर का वध किया और उसकी कैद से 16 हजार स्त्रियों को आजाद कराया और उनसे विवाह किया। बाद में ये सभी स्त्रियां भगवान श्री कृष्ण की 16 हजार पटरानियों के नाम से जानी जानी गईं। नरकासुर के वध के बाद लोगों ने कार्तिक मास की अमावस्या के साथ चतुर्दशी को भी घरों में दीये जलाए और तभी से नरक चतुर्दशी और दीपावली का त्यौहार मनाया जाने लगा।

नरक चतुर्दशी के दिन क्या करें 

  • नरक चतुर्दशी के दिन हनुमान जी और यम की पूजा करें।
  • इसके अलावा भगवान कृष्ण की भी पूजा करने का विधान है।
  • घर की विशेष सफाई करें।
  • घर और मंदिर में गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें।
  • संध्याकाल में दीपक जलाएं।
  • घर में से खराब चीजों का हटा दें।
  • पूजा के दौरन मंत्रो का जप करें।

नरक चतुर्दशी के दिन क्या न करें

  • नरक चतुर्दशी के दिन घर को गंदा न रखें।
  • किसी से वाद-विवाद न करें।
  • बड़े-बुजुर्ग और महिलाओं का अपमान न करें।
  • धन की बर्बादी न करें।
  • तामसिक चीजों का सेवन न करें।
  • गरीब लोगों में अन्न, धन और वस्त्र समेत आदि चीजों का दान करें।
  • घर को लाइट और दीपक से सजाएं।

निष्कर्ष

नरक चतुर्दशी 2026 हमें सिखाती है कि पापों का त्याग कर अच्छे कर्म करने से आपके जीवन में सुख और समृद्धि आती है। तो आप भी इस नरक चतुर्दशी 2026 को पूरे विधि-विधान से मनाएं और अपने जीवन से नकारात्मकता को दूर करे । 8 नवंबर 2026 को इस पावन अवसर पर अभ्यंग स्नान करें, पूजा करें और अपने परिवार के साथ छोटी दीवाली की खुशियां मनाएं। ऐसे ही और आर्टिकल जिसे फुलेरा दूज 2026 और हरितालिका तीज 2026 भी हमारी वेबसाईट ज्ञान की बातें पर जरूर पढे तथा इस आर्टिकल को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें और कमेंट में बताएं – आप इस त्योहार को कैसे मनाते हैं? नरक चतुर्दशी की शुभकामनाएं!

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