अहोई माता की आरती: अहोई माता हिंदू धर्म में मातृत्व, संतान सुख और परिवार की खुशहाली की देवी मानी जाती हैं। अहोई माता देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं। ‘अहोई’ का अर्थ है । अनहोनी को होनी में बदलने की शक्ति । माताएँ अपनी संतान के सुखी जीवन, अच्छे स्वास्थ्य, और लंबी आयु की कामना के लिए उनकी पूजा करती हैं हर वर्ष कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को अहोई अष्टमी का व्रत रखा जाता है। पौराणिक कथा के अनुसार एक साहूकार की पत्नी जंगल में मिट्टी खोदने गई थी। मिट्टी खोदते समय उसके हाथों से एक स्याऊ (साही) के बच्चे की मृत्यु हो गई। तब स्याऊ माता ने उसे श्राप दे दिया, जिसके कारण उसके बच्चों पर संकट आने लगा। अपने बच्चों की रक्षा के लिए साहूकार की पत्नी ने कठोर तप और पूजा की। उसकी भक्ति और पश्चाताप से प्रसन्न होकर देवी ने उसे क्षमा कर दिया तथा उसके बच्चों को पुनः सुख और समृद्धि का आशीर्वाद दिया। तभी से अहोई अष्टमी का व्रत और अहोई माता की पूजा की परंपरा शुरू हुई। इस दिन अहोई माता की पूजा के साथ उनकी आरती का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है की माँ की पूजा और अहोई माता की आरती का पाठ करने से संतान से जुड़े कष्ट दूर होते हैं और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
अहोई माता की आरती हिन्दी में
(Ahoi Mata Ki Aarti in Hindi)
जय अहोई माता,जय अहोई माता।
तुमको निसदिन ध्यावतहर विष्णु विधाता॥
जय अहोई माता…॥
ब्रह्माणी, रुद्राणी, कमलातू ही है जगमाता।
सूर्य-चन्द्रमा ध्यावतनारद ऋषि गाता॥
जय अहोई माता…॥
माता रूप निरंजनसुख-सम्पत्ति दाता।
जो कोई तुमको ध्यावतनित मंगल पाता॥
जय अहोई माता…॥
तू ही पाताल बसंती,तू ही है शुभदाता।
कर्म-प्रभाव प्रकाशकजगनिधि से त्राता॥
जय अहोई माता…॥
जिस घर थारो वासावाहि में गुण आता।
कर न सके सोई कर लेमन नहीं धड़काता॥
जय अहोई माता…॥
तुम बिन सुख न होवेन कोई पुत्र पाता।
खान-पान का वैभवतुम बिन नहीं आता॥
जय अहोई माता…॥
शुभ गुण सुंदर युक्ताक्षीर निधि जाता।
रतन चतुर्दश तोकूकोई नहीं पाता॥
जय अहोई माता…॥
श्री अहोई माँ की आरतीजो कोई गाता।
उर उमंग अति उपजेपाप उतर जाता॥
जय अहोई माता…॥
अहोई माता की आरती इंग्लिश में
(Ahoi Mata Ki Aarti in English)
Jai Ahoi MataJai Ahoi Mata।
Tumko Nisdin DhyavatHari Vishnu Vidhata॥
Jai Ahoi Mata…॥
Brahamni Rudrani KamlaTu He Hai Jag Mata।
Surya Chandrama DhyavatNarad Rishi Gata॥
Jai Ahoi Mata…॥
Mata Roop NiranjanSukh Sampatti Data।
Jo Koi Tumko DhyavatNit Mangal Pata॥
Jai Ahoi Mata…॥
Tu He Hai Pataal BasantiTu He Hai Sukh Data।
Karma Prabhav PrakashakJagniddhi Se Trata॥
Jai Ahoi Mata…॥
Jis Ghar Tharo VaasWahi Mein Gunna Aata।
Kar Na Sake Soi Kar LeMann Nahi Ghabrata॥
Jai Ahoi Mata…॥
Tum Bin Sukh Na HovayPutra Na Koi Pata।
Khan-Paan Ka VaibhavTum Bin Nahi Aata॥
Jai Ahoi Mata…॥
Subh Gun Sundar YuktaSheer Niddhi Jata।
Ratan ChaturdarshaToku Koi Nahi Pata॥
Jai Ahoi Mata…॥
Shree Ahoi Maa Ki AartiJo Koi Gata।
Ur Umang Ati UpjayPaap Utar Jata॥
Jai Ahoi Mata…॥
अहोई माता के प्रसिद्ध मंदिर (Ahoi Mata Famous Temples)
1. अहोई माता मंदिर, राधा कुंड (मथुरा, उत्तर प्रदेश)
- मथुरा के गोवर्धन क्षेत्र में स्थित अहोई माता मंदिर और पवित्र राधा कुंड निसंतान दंपत्तियों के लिए पूरे भारत में सबसे श्रद्धेय और चमत्कारी तीर्थ स्थलों में से एक माना जाता है । ऐसी मान्यता है कि कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की अष्टमी (अहोई अष्टमी) की मध्यरात्रि को इस कुंड में एक साथ डुबकी लगाने से निसंतान दंपत्तियों को संतान सुख की प्राप्ति होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- प्रश्न 1. अहोई माता कौन हैं और उनका क्या महत्व है?
- अहोई माता देवी पार्वती का ही स्वरूप हैं। ‘अहोई’ का अर्थ है अनहोनी को होनी में बदलने की शक्ति माताएँ अपनी संतान के सुखी जीवन, अच्छे स्वास्थ्य, और लंबी आयु की कामना के लिए उनकी पूजा करती हैं
- प्रश्न 2. अहोई माता का व्रत कब रखा जाता है?
- यह व्रत प्रतिवर्ष कार्तिक माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को रखा जाता है यह मुख्य रूप से उत्तर भारत का एक प्रसिद्ध त्योहार है जो दीपावली से लगभग आठ दिन पहले पड़ता है
- 3. क्या इस व्रत में पानी पिया जाता है?
- नहीं, करवा चौथ की तरह ही यह व्रत भी निर्जला (बिना पानी के) रखा जाता है महिलाएँ पूरे दिन उपवास रखती हैं और शाम को तारों (या चंद्रमा) को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलती हैं
- 4. अहोई माता की पूजा कैसे की जाती है?
- शाम के समय दीवार या कैलेंडर पर अहोई माता और उनके सात पुत्रों का चित्र बनाया जाता है
- उनके साथ स्याहू (सेई) के बच्चों का भी चित्र अंकित किया जाता है
- पूजा में आटे और चीनी से बने मीठे पकवान (पूए), हलवा और पूरी का भोग लगाया जाता है
- 5 .क्या निःसंतान महिलाएँ भी अहोई माता का व्रत रख सकती हैं?
- हाँ, जिन महिलाओं को संतान सुख नहीं है या जो संतान प्राप्ति की कामना करती हैं, वे भी अहोई माता का व्रत रखकर आशीर्वाद प्राप्त कर सकती हैं
- 6. अहोई अष्टमी के दिन किन कामों को करने की सख्त मनाही होती है?
उत्तर: संतान की सुरक्षा और कल्याण से जुड़े इस व्रत में कुछ कड़े नियम होते हैं: - धारदार चीजों का निषेध: इस दिन सुई-धागा, कैंची या चाकू जैसी नुकीली चीजों का उपयोग नहीं करना चाहिए। सिलाई, कढ़ाई या बुनाई का काम पूरी तरह वर्जित होता है।
- मिट्टी खोदना मना है: कथा के अनुसार मिट्टी खोदते समय ही अनहोनी हुई थी, इसलिए इस दिन जमीन या मिट्टी खोदने, पौधों को उखाड़ने या बागवानी करने की सख्त मनाही होती है।
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