भगवान विश्वकर्मा आरती: सनातन धर्म में भगवान विश्वकर्मा को देवताओं के दिव्य वास्तुकार, शिल्पकार और अभियंता के रूप में पूजा जाता है। उन्हें निर्माण, वास्तुकला, कला, शिल्प और तकनीकी कौशल का देवता माना जाता है। विश्वकर्मा जी की आराधना विशेष रूप से कारीगरों, इंजीनियरों, वास्तुकारों, मशीन ऑपरेटरों और उद्योगों से जुड़े लोगों द्वारा की जाती है। पौराणिक ग्रंथों के अनुसार भगवान विश्वकर्मा सृष्टि के प्रथम शिल्पकार और वास्तु विशेषज्ञ हैं। मान्यता है कि उन्होंने स्वर्गलोक, इंद्रपुरी, द्वारका नगरी, लंका और हस्तिनापुर जैसे भव्य नगरों का निर्माण किया था। उन्हें देवताओं के लिए दिव्य भवन, अस्त्र-शस्त्र का निर्माण भी किया है जिनमें भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र और इंद्र का वज्र प्रमुख हैं। उनकी अद्वितीय कला और निर्माण कौशल के कारण उन्हें शिल्प विज्ञान का अधिष्ठाता देव माना जाता है। विश्वकर्मा जी का उल्लेख ऋग्वेद सहित कई प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। वे सृजन, नवाचार और तकनीकी विकास के प्रतीक माने जाते हैं। यही कारण है कि आज भी कारखानों, उद्योगों और कार्यस्थलों में विश्वकर्मा पूजा का विशेष महत्व है। इस दिन लोग अपने औजारों, मशीनों और वाहनों की पूजा भी करते हैं और भगवान विश्वकर्मा से सुरक्षित तथा सफल कार्य जीवन की प्रार्थना करते हैं।
भगवान विश्वकर्मा आरती हिन्दी में
(Bhagwan Vishwakarma Aarti in Hindi)
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा ॥
आदि सृष्टि मे विधि को, श्रुति उपदेश दिया ।
जीव मात्र का जग मे, ज्ञान विकास किया ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान किया जब प्रभु का, सकल सिद्धि आई ।
ऋषि अंगीरा तप से, शांति नहीं पाई ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
रोग ग्रस्त राजा ने, जब आश्रय लीना ।
संकट मोचन बनकर, दूर दुःखा कीना ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
जब रथकार दंपति, तुम्हारी टेर करी ।
सुनकर दीन प्रार्थना, विपत हरी सगरी ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
एकानन चतुरानन, पंचानन राजे।
त्रिभुज चतुर्भुज दशभुज, सकल रूप साजे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
ध्यान धरे तब पद का, सकल सिद्धि आवे ।
मन द्विविधा मिट जावे, अटल शक्ति पावे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
श्री विश्वकर्मा की आरती, जो कोई गावे ।
भजत गजानांद स्वामी, सुख संपाति पावे ॥
जय श्री विश्वकर्मा प्रभु, जय श्री विश्वकर्मा ।
सकल सृष्टि के करता, रक्षक स्तुति धर्मा ॥
भगवान विश्वकर्मा आरती इंग्लिश में
(Bhagwan Vishwakarma Aarti in English)
Jai Shri Vishwakarma Prabhu, Jai Shri Vishwakarma,
Sakal Srashti Ke Karata, Rakshak Stuti Dharma.
Aadi Srashti Me Vidhi Ko, Shruti Upadesh Diya,
Jeev Maatra Ka Jag Me, Gyan Vikas Kiya.
Jai Shri Vishwakarma.
Dhyan Kiya Jab Prabhu Ka, Sakal Siddhi Aai,
Rishi Angeera Tap Se, Shanti Nahin Pai.
Jai Shri Vishwakarma.
Rog Grast Raja Ne, Jab Aashray Leena.
Sankat Mochan Banakar, Door Duhkha Keena.
Jai Shri Vishwakarma.
Jab Rathakar Dampati, Tumhari Ter Kari,
Sunakar Deen Prarthana, Vipat Hari Sagari.
Jai Shri Vishwakarma.
Ekanan Chaturanan, Panchanan Raje,
Tribhuj Chaturbhuj Dashabhuj, Sakal Roop Saaje.
Jai Shri Vishwakarma.
Dhyan Dhare Tab Pad Ka, Sakal Siddhi Aave,
Man Dwuvidha Mit Jave, Atal Shakti Pave.
Jai Shri Vishwakarma.
Shri Vishwakarma Ki Aarti, Jo Koi Gaave,
Bhajat Gajanand Swami, Sukh Sampati Pave.
Jai Shri Vishwakarma Prabhu, Jai Shri Vishwakarma,
Sakal Srashti Ke Karata, Rakshak Stuti Dharma.
भगवान विश्वकर्मा के प्रसिद्ध मंदिर (Bhagwan Vishwakarma Famous Temples)
1. विश्वकर्मा मंदिर, गुवाहाटी (असम)
- गुवाहाटी (असम) का विश्वकर्मा मंदिर उत्तर-पूर्वी भारत में भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है । ये एकमात्र और सबसे पुराना मंदिर माना जाता है। यह मंदिर अपनी अनूठी स्थापना और धार्मिक महत्व के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। 1960 के दशक में मंदिर निर्माण कार्य में कई प्राकृतिक बाधाएं आ रही थीं और क्षेत्र में लगातार सड़क दुर्घटनाएं हो रही थीं। तब कामाख्या मंदिर के पुजारी पंडित भवकांत सरमा ने अपनी निजी भूमि दान की और सड़क निर्माण के ठेकेदार महाबीर प्रसाद धीरसारिया के सहयोग से यहाँ भगवान विश्वकर्मा की मूर्ति स्थापित करवाई। मान्यता है कि मंदिर निर्माण के बाद यहाँ दुर्घटनाएं रुक गईं और सड़क का काम सुचारू रूप से पूरा हुआ।
2. पंचमुखी विश्वकर्मा मंदिर, दांगियावास (जोधपुर, राजस्थान)
- राजस्थान के जोधपुर जिले में स्थित पंचमुखी विश्वकर्मा मंदिर, दांगियावास पश्चिमी राजस्थान के सबसे प्रसिद्ध और पूजनीय विश्वकर्मा मंदिरों में से एक है। यह मंदिर अपनी धार्मिक भव्यता, वास्तुकला और सामाजिक महत्व के लिए विशेष रूप से जाना जाता है इस मंदिर की मुख्य विशेषता यह है कि यहाँ भगवान विश्वकर्मा पंचमुखी (पांच मुखों वाले) रूप में विराजमान हैं। सनातन परंपरा में भगवान विश्वकर्मा के पांच पुत्र (मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी और दै्वज्ञ) माने जाते हैं, जो विभिन्न शिल्प कलाओं के जनक हैं। उनका यह पांच मुखों वाला स्वरूप ब्रह्मांड के निर्माण की पांचों शक्तियों को दर्शाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1. भगवान विश्वकर्मा कौन हैं?
- भगवान विश्वकर्मा को वेदों और पुराणों में ‘देवताओं का शिल्पकार’ बताया गया है वह कला, कौशल, वास्तुकला और तकनीकी के सर्वोच्च ज्ञाता हैं।
- 2. विश्वकर्मा पूजा उत्पत्ति और परिवार (जन्म की कथा)
- माता-पिता: पौराणिक ग्रंथों और महाभारत के अनुसार, ब्रह्मा जी के पुत्र ‘धर्म’ (ऋषि) थे। धर्म के आठवें पुत्र वास्तुदेव (शिल्पशास्त्र के आदि प्रवर्तक) हुए। वास्तुदेव का विवाह अंगिरसी (भुवना ब्रह्मवादिनी) से हुआ, और इन्हीं के पुत्र भगवान विश्वकर्मा हैं।
- पुत्रियाँ और दामाद: भगवान विश्वकर्मा की चार पुत्रियाँ थीं – ऋद्धि, सिद्धि, संज्ञा और छाया।
- ऋद्धि और सिद्धि का विवाह भगवान गणेश से हुआ था।
- संज्ञा और छाया का विवाह सूर्य देव से हुआ था। इस नाते यमराज, यमुना और अश्विनी कुमार भगवान विश्वकर्मा के नाती-नातिन हैं
- 3. विश्वकर्मा पूजा में औजारों और मशीनों की पूजा क्यों की जाती है?
- भगवान विश्वकर्मा को मशीनों, औजारों और निर्माण का देवता माना जाता है कारीगर, इंजीनियर, और व्यवसायी अपने औजारों/मशीनों की पूजा करके उनके सुचारू संचालन, सुरक्षा और बेहतर उत्पादन के लिए उनका आशीर्वाद मांगते हैं
- 4 . उन्होंने किन प्रसिद्ध नगरों और महलों का निर्माण किया था?
- पौराणिक कथाओं के अनुसार, उन्होंने कई चमत्कारी निर्माण किए, जिनमें शामिल हैं:
- सतयुग में स्वर्ग लोक
- त्रेतायुग में सोने की लंका (लंकापुरी)
- द्वापर युग में भगवान कृष्ण की नगरी द्वारका
- पांडवों के लिए इंद्रप्रस्थ और माया सभा
- 5. देवताओं के अस्त्र-शस्त्र किसने बनाए?
- भगवान विश्वकर्मा ने ही देवताओं के लिए शक्तिशाली अस्त्र-शस्त्र बनाए थे। इनमें भगवान शिव का त्रिशूल, भगवान विष्णु का सुदर्शन चक्र, यमराज का कालदंड, और इंद्र का वज्र शामिल हैं।
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