चन्द्र देव आरती: हिंदू धर्म में नवग्रहों की पूजा का विशेष महत्व है। इनमें श्री चन्द्र देव को शांति, मन, और भावनाओं के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। सोमवार को उनकी विशेष पूजा की जाती है। चन्द्र देव को सोम देव, निशाकर और राकेश भी कहा जाता है। पुराणों के अनुसार चन्द्र देव ब्रह्माजी के मानस पुत्र हैं। वे सफेद रंग के, हाथ में कमल और गदा लिए, रथ पर सवार दिखाए जाते हैं। उनका वाहन घोड़ा या हंस है। कथा के अनुसार, चन्द्र देव ने तारकामय युद्ध में देवताओं की सहायता की थी। वे भगवान शिव के जटाओं से प्रकट हुए थे। चन्द्रमा की पूजा से कुंडली में चन्द्र दोष (मानसिक अशांति, माता संबंधी समस्या) का निवारण होता है। श्री चन्द्र देव आरती भक्तों के मन में शांति, सुख और मानसिक संतुलन लाती है। पूर्णिमा और सोमवार को इस आरती का गान करने से जीवन में सुख-समृद्धि आती है।
चन्द्र देव आरती हिन्दी में
(Chandra Dev Aarti in Hindi)
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
दुःख हरता सुख करता, जय आनन्दकारी ।
रजत सिंहासन राजत, ज्योति तेरी न्यारी ।
दीन दयाल दयानिधि, भव बन्धन हारी ।
जो कोई आरती तेरी, प्रेम सहित गावे ।
सकल मनोरथ दायक, निर्गुण सुखराशि ।
योगीजन हृदय में, तेरा ध्यान धरें ।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव, सन्त करें सेवा ।
वेद पुराण बखानत, भय पातक हारी ।
प्रेमभाव से पूजें, सब जग के नारी ।
शरणागत प्रतिपालक, भक्तन हितकारी ।
धन सम्पत्ति और वैभव, सहजे सो पावे ।
विश्व चराचर पालक, ईश्वर अविनाशी ।
सब जग के नर नारी, पूजा पाठ करें ।
ॐ जय सोम देवा, स्वामी जय सोम देवा ।
चन्द्र देव आरती इंग्लिश में
(Chandra Dev Aarti in English)
Om Jay Som Deva, Swami Jay Som Deva ।
Duhkh Harata Sukh Karata, Jay Aanandkari ।
Rajat Sinhaasan Raajat, Jyoti Teri Nyari ।
Deen Dayal Dayanidhi, Bhav Bandhan Hari ।
Jo Koi Aarati Teri, Prem Sahit Gaave ।
Sakal Manorath Dayak, Nirgun Sukhrashi ।
Yogijan Hrday Mein, Tera Dhyaan Dharen ।
Brahma Vishnu Sadashiv, Sant Karen Seva ।
Ved Puran Bakhanat, Bhay Patak Hari ।
Premabhaav Se Poojen, Sab Jag Ke Nari ।
Sharanaagat Pratipaalak, Bhaktan Hitakari ।
Dhan Sampatti Aur Vaibhav, Sahaje so Paave ।
Vishv Charachar Palak, Ishwar Avinashi ।
Sab Jag Ke Nar Nari, Pooja Paath Karen ।
Om Jay Som Deva, Swami Jay Som Deva ।
चन्द्र देव जी के प्रसिद्ध मंदिर (Chandra Dev Ji Famous Temples)
1. सोमनाथ मंदिर , गुजरात
- सोमनाथ ज्योतिर्लिंग गुजरात के काठियावाड़ क्षेत्र में समुद्र के किनारे स्थापित है यह 12 ज्योतिर्लिंगों में से पहला ज्योतिर्लिंग माना जाता है, जहां भगवान शिव एक ज्योति के रूप में प्रकट हुए थे। इस मंदिर के निर्माण, विध्वंस और फिर से बनने की यात्रा बड़ी रोचक है। कहते हैं कि सोमनाथ मंदिर का शिवलिंग हवा में तैरता रहता था। इस मंदिर का संबंध भगवान चंद्रदेव से है, जिन्होंने अपने ससुर दक्ष प्रजापति के श्राप से मुक्त होने के लिए यहां पर भगवान भोलेनाथ की आराधना की थी।
2. चंद्रेश्वर महादेव मंदिर (वाराणसी, उत्तर प्रदेश)
- मान्यता है कि यहाँ स्थापित चंद्रेश्वर लिंग की पूजा करने से मानसिक तनाव दूर होता है। पूर्णिमा और सोमवार के दिन इस मंदिर में दर्शन का विशेष महत्व है। काशी (वाराणसी) में स्थित यह मंदिर नवग्रह शिवलिंगों में विशेष स्थान रखता है।
3.सोमेश्वर मंदिर (नासिक, महाराष्ट्र)
- गोदावरी नदी के तट पर स्थित यह प्राचीन मंदिर भी चंद्र देव को समर्पित माना जाता है। यहाँ चंद्र देव ने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए यज्ञ किया था। यह स्थान अपनी प्राकृतिक सुंदरता और धार्मिक शांति के लिए जाना जाता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1. चंद्र देव के माता-पिता कौन हैं?
- पुराणों के अनुसार, चंद्र देव के पिता महर्षि अत्रि और माता देवी अनुसूया हैं
- 2. चंद्र देव की पत्नियां कौन हैं?
- चंद्र देव का विवाह राजा दक्ष प्रजापति की 27 कन्याओं के साथ हुआ था, जिन्हें ज्योतिष में 27 नक्षत्र कहा जाता है
- 3. चंद्र देव के पुत्र कौन हैं?
- चंद्र देव के पुत्र बुध (बुध ग्रह के देवता) हैं, जिनका जन्म तारा नाम की देवी से हुआ था।
- 4. चंद्र देव का भगवान शिव से क्या संबंध है?
- जब राजा दक्ष ने चंद्र देव को क्षय (घटने) होने का श्राप दिया, तब चंद्र देव ने भगवान शिव की तपस्या की शिव जी ने प्रसन्न होकर उन्हें अपने मस्तक पर धारण किया जिससे शिव जी को सोमनाथ भी कहा जाता है
- 5. राजा दक्ष ने चंद्र देव को क्या श्राप दिया था और क्यों?
- चंद्र देव अपनी 27 पत्नियों में से रोहिणी से सबसे ज्यादा प्रेम करते थे और अपना पूरा समय उन्हीं के साथ बिताते थे बाकी 26 पत्नियों ने अपने पिता दक्ष से इसकी शिकायत की क्रोधित होकर राजा दक्ष ने चंद्र देव को क्षय रोग (धीरे-धीरे नष्ट होने) का श्राप दे दिया
- 6. चंद्रमा को मजबूत करने या प्रसन्न करने के लिए क्या करना चाहिए?
- चंद्र देव की कृपा पाने के लिए सोमवार व्रत रखें ‘ॐ सोमाय नमः’ या चंद्र बीज मंत्र (ॐ श्रां श्रीं श्रौं सः चन्द्रमसे नमः) का जाप करें और शिवलिंग पर जल अर्पित करें
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