धर्मराज आरती: धर्मराज, जिन्हें यम के नाम से भी जाना जाता है, हिंदू धर्मग्रंथों में एक प्रमुख पात्र हैं जो नैतिक व्यवस्था और नैतिक आचरण के सिद्धांतों को मूर्त रूप देते हैं। “धर्मराज कर सिद्ध काज है “। ये आरती धर्मराज को समर्पित एक पवित्र भजन है, जो हिंदू पौराणिक कथाओं में धार्मिकता और न्याय के देवता के रूप में पूजे जाने वाले दिव्य व्यक्तित्व हैं। यह आरती केवल एक भक्ति गीत नहीं है। बल्कि चुनौतियों पर विजय पाने, सफलता प्राप्त करने और धार्मिक प्रयासों की पूर्ति सुनिश्चित करने के लिए धर्मराज का आशीर्वाद मांगने वाली एक गहन प्रार्थना है। धर्मराज आरती के बोल धर्मराज के गुणों का सार प्रस्तुत करते हैं, तथा सत्य, न्याय और नैतिक अखंडता के महत्व पर जोर देते हैं। धर्मराज आरती का सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महत्व बहुत अधिक है, जिसे अक्सर धार्मिक समारोहों, त्यौहारों और व्यक्तिगत प्रार्थनाओं के दौरान गाया जाता है।
धर्मराज आरती हिन्दी में
(Dharmraj ki Aarti in Hindi)
धर्मराज कर सिद्ध काज,
प्रभु मैं शरणागत हूँ तेरी ।
पड़ी नाव मझदार भंवर में,
पार करो, न करो देरी ॥
॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥
धर्मलोक के तुम स्वामी,
श्री यमराज कहलाते हो ।
जों जों प्राणी कर्म करत हैं,
तुम सब लिखते जाते हो ॥
अंत समय में सब ही को,
तुम दूत भेज बुलाते हो ।
पाप पुण्य का सारा लेखा,
उनको बांच सुनते हो ॥
भुगताते हो प्राणिन को तुम,
लख चौरासी की फेरी ॥
॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥
चित्रगुप्त हैं लेखक तुम्हारे,
फुर्ती से लिखने वाले ।
अलग अगल से सब जीवों का,
लेखा जोखा लेने वाले ॥
पापी जन को पकड़ बुलाते,
नरको में ढाने वाले ।
बुरे काम करने वालो को,
खूब सजा देने वाले ॥
कोई नही बच पाता न,
याय निति ऐसी तेरी ॥
॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥
दूत भयंकर तेरे स्वामी,
बड़े बड़े दर जाते हैं ।
पापी जन तो जिन्हें देखते ही,
भय से थर्राते हैं ॥
बांध गले में रस्सी वे,
पापी जन को ले जाते हैं ।
चाबुक मार लाते,
जरा रहम नहीं मन में लाते हैं ॥
नरक कुंड भुगताते उनको,
नहीं मिलती जिसमें सेरी ॥
॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥
धर्मी जन को धर्मराज,
तुम खुद ही लेने आते हो ।
सादर ले जाकर उनको तुम,
स्वर्ग धाम पहुचाते हो ।
जों जन पाप कपट से डरकर,
तेरी भक्ति करते हैं ।
नर्क यातना कभी ना करते,
भवसागर तरते हैं ॥
कपिल मोहन पर कृपा करिये,
जपता हूँ तेरी माला ॥
॥ धर्मराज कर सिद्ध काज..॥
धर्मराज आरती इंग्लिश में
(Dharmraj ki Aarti in English)
Dharmraj Kar Siddh Kaaj,
Prabhu Main Sharnaagat Hoon Teri ।
Padi Naav Majhdar Bhanwar Mein,
Paar Karo, Na Karo Deri ॥
॥ Dharmraj Kar Siddh Kaaj ॥
Dharmalok Ke Tum Swami,
Shri Yamraj Kahlate Ho ।
Jon Jon Prani Karm Karat Hain,
Tum Sab Likhte Jate Ho ॥
Ant Samay Mein Sab Hi Ko,
Tum Doot Bhej Bulate Ho ।
Paap Puny Ka Sara Lekha,
Unko Banch Sunte Ho ॥
Bhugtate Ho Pranin Ko Tum,
Lakh Chaurasi Ki Pheri ॥
॥ Dharmraj Kar Siddh Kaaj.. ॥
Chitragupt Hain Lekhak Tumhare,
Phurti Se Likhne Wale ।
Alag Agal Se Sab Jeevon Ka,
Lekha Jokha Lene Vaale ॥
Paapi Jan Ko Pakad Bulate,
Narko Mein Dhane Wale ।
Bure Kaam Karne Walo Ko,
Khoob Saja Dene Wale ॥
Koi Nahi Bach Pata Na,
Yaay Niti Aisi Teri ॥
॥ Dharmraj Kar Siddh Kaaj.. ॥
Doot Bhayankar Tere Swami,
Bade Bade Dar Jate Hain ।
Papi Jan to Jinhen Dekhte Hi,
Bhay Se Tharrate Hain ॥
Bandh Gale Mein Rassi Ve,
Paapi Jan Ko Le Jate Hain ।
Chabuk Maar Late,
Jara Raham Nahin Man Mein Late Hain ॥
Narak Kund Bhugtate Unko,
Nahin Milti Jisamen Seri ॥
॥ Dharmraj Kar Siddh Kaaj.. ॥
Dharmi Jan Ko Dharmraj,
Tum Khud Hi Lene Aate Ho ।
Sadar Le Jakar Unko Tum,
Swarg Dham Pahuchate Ho ॥
Jon Jan Paap Kapat Se Darkar,
Teri Bhakti Karte Hain ।
Nark Yaatna Kabhi Na Karte,
Bhavsagar Tarte Hain ॥
Kapil Mohan Par Krpa Kariye,
Japta Hoon Teri Mala ॥
॥ Dharmraj Kar Siddh Kaaj ॥
धर्मराज के प्रसिद्ध मंदिर (Dharmraj Famous Temples)
1. यम धर्मराज मंदिर – तिरुचित्रमबलम, तमिलनाडु
- यह दक्षिण भारत में भगवान यमराज को समर्पित सबसे प्रमुख मंदिरों में से एक है। मान्यता है कि कामदेव को जब भगवान शिव ने भस्म कर दिया था, तब यमराज की प्रार्थना पर ही शिव जी ने कामदेव को यहाँ पुनर्जीवित किया था। ईस मंदिर में यमराज के साथ उनके सहायक चित्रगुप्त की भी मूर्ति स्थापित है।
2. श्री यम धर्मराज मंदिर – धर्मपुरी, तेलंगाना
- यह तेलंगाना के धर्मपुरी में गोदावरी नदी के तट पर स्थित एक प्राचीन मंदिर है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर में दर्शन करने से व्यक्ति को यम की यातनाओं और अकाल मृत्यु के भय से मुक्ति मिलती है। अक्सर लोग यहाँ गोदावरी में स्नान के बाद पूजा करने आते हैं।
3. तिरुप्पायनजीली यम धर्मराज मंदिर – त्रिची, तमिलनाडु
- तिरुचिरापल्ली (त्रिची) के पास स्थित यह एक अत्यंत प्राचीन शिव मंदिर परिसर है। यहाँ भगवान शिव ने यमराज को पुनर्जीवित कर उन्हें उनका पद वापस लौटाया था। मंदिर के भीतर एक गुफानुमा गर्भगृह है, जहाँ यमराज की एक दुर्लभ प्रतिमा भी स्थापित है
4. धर्मराज मंदिर – पाई बाग, भरतपुर, राजस्थान
उत्तर भारत में राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थित यह धर्मराज (यमराज) का एक प्राचीन मंदिर है। स्थानीय लोगों के बीच इस मंदिर की गहरी मान्यता है। यहाँ विशेष अवसरों और यम द्वितीया (भाई दूज) के दिन विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
5. यमराज मंदिर – करीमनगर, तेलंगाना
यह तेलंगाना के करीमनगर क्षेत्र में स्थित यमराज को समर्पित एक और विशिष्ट मंदिर है। इस मंदिर का इतिहास भी न्याय के देवता यमराज की पूजा और कर्मों के फल की धार्मिक मान्यताओं से जुड़ा हुआ है।.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
1.धर्मराज का दूसरा नाम क्या है?
- धर्मराज को हम कई नामों से जानते हैं जिनमें से मुख्य नाम यमराज या यम है। इसके अलावा धर्मराज को मृत्यु के देवता या काल के नाम से भी जाना जाता है।
2.धर्मराज की माता कौन है?
- धर्मराज की माता का नाम सरण्यू है किन्तु यदि आप युधिष्ठिर जो धर्मराज के अवतार थे, उनकी माता का नाम जानना चाहते हैं तो युधिष्ठिर की माता का नाम कुंती है।
3.धर्मराज के पिता का क्या नाम था?
- धर्मराज जिन्हें हम यमराज के नाम से भी जानते हैं, उनके पिता का नाम सूर्य देव है। वहीं धर्मराज के अवतार युधिष्ठिर के पिता का नाम पांडू है।
4. धर्मराज किसे और क्यों कहा गया है?
- धर्मराज मृत्यु के देवता यमराज को कहा गया है। अब उन्हें धर्मराज इसलिए कहा गया है क्योंकि वे मनुष्यों के सभी पापों व पुण्यों का लेखा-जोगा रखते हैं और उसी के अनुसार ही उसको फल देते हैं।
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