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आरती (Aarti)

एकादशी माता की आरती (Ekadashi Mata Ki Aarti)

जुलाई 22, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

एकादशी माता की आरती: ये आरती एकादशी माता को समर्पित है। एकादशी माता हिंदू धर्म में भगवान विष्णु की प्रिय शक्ति के रूप में पूजी जाती हैं। “एकादशी” शब्द का अर्थ ग्यारह होता है। यह चंद्रमा की गति के अनुसार आने वाली तिथि है, जो हर महीने दो बार (शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष) आती है। एकादशी माता को पाप नाशिनी, पुण्य दायिनी और मोक्ष प्रदायिनी माना जाता है। पुराणों के अनुसार, देवताओं और असुरों के बीच भयंकर युद्ध हो गया था।असुरों के राजा मुर ने देवताओं को पराजित कर दिया। तब भगवान विष्णु ने अपनी योग निद्रा से एक दिव्य शक्ति का सृजन किया। इस शक्ति का नाम एकादशी पड़ा। जो भी व्यक्ती एकादशी का दिन व्रत कर एकादशी माता की आरती का पाठ करता है उसे सभी पापों से मुक्ति मिलती है और मोक्ष की प्राप्ति होगी।

एकादशी माता की आरती हिन्दी में
(Ekadashi Mata Ki Aarti
in Hindi)

ॐ जय एकादशी, जय एकादशी, जय एकादशी माता।
विष्णु पूजा व्रत को धारण कर, शक्ति मुक्ति पाता॥
ॐ जय एकादशी…॥

तेरे नाम गिनाऊं देवी, भक्ति प्रदान करनी।
गण गौरव की देनी माता, शास्त्रों में वरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥

मार्गशीर्ष के कृष्णपक्ष की उत्पन्ना, विश्वतारनी जन्मी।
शुक्ल पक्ष में हुई मोक्षदा, मुक्तिदाता बन आई॥
ॐ जय एकादशी…॥

पौष के कृष्णपक्ष की, सफला नामक है।
शुक्लपक्ष में होय पुत्रदा, आनन्द अधिक रहै॥
ॐ जय एकादशी…॥

नाम षटतिला माघ मास में, कृष्णपक्ष आवै।
शुक्लपक्ष में जया, कहावै, विजय सदा पावै॥
ॐ जय एकादशी…॥

विजया फागुन कृष्णपक्ष में शुक्ला आमलकी।
पापमोचनी कृष्ण पक्ष में, चैत्र महाबलि की॥
ॐ जय एकादशी…॥

चैत्र शुक्ल में नाम कामदा, धन देने वाली।
नाम बरुथिनी कृष्णपक्ष में, वैसाख माह वाली॥
ॐ जय एकादशी…॥

शुक्ल पक्ष में होय मोहिनी अपरा ज्येष्ठ कृष्णपक्षी।
नाम निर्जला सब सुख करनी, शुक्लपक्ष रखी॥
ॐ जय एकादशी…॥

योगिनी नाम आषाढ में जानों, कृष्णपक्ष करनी।
देवशयनी नाम कहायो, शुक्लपक्ष धरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥

कामिका श्रावण मास में आवै, कृष्णपक्ष कहिए।
श्रावण शुक्ला होय पवित्रा आनन्द से रहिए॥
ॐ जय एकादशी…॥

अजा भाद्रपद कृष्णपक्ष की, परिवर्तिनी शुक्ला।
इन्द्रा आश्चिन कृष्णपक्ष में, व्रत से भवसागर निकला॥
ॐ जय एकादशी…॥

पापांकुशा है शुक्ल पक्ष में, आप हरनहारी।
रमा मास कार्तिक में आवै, सुखदायक भारी॥
ॐ जय एकादशी…॥

देवोत्थानी शुक्लपक्ष की, दुखनाशक मैया।
पावन मास में करूं विनती पार करो नैया॥
ॐ जय एकादशी…॥

परमा कृष्णपक्ष में होती, जन मंगल करनी।
शुक्ल मास में होय पद्मिनी दुख दारिद्र हरनी॥
ॐ जय एकादशी…॥

जो कोई आरती एकादशी की, भक्ति सहित गावै।
जन गुरदिता स्वर्ग का वासा, निश्चय वह पावै॥
ॐ जय एकादशी…॥

एकादशी माता की आरती इंग्लिश में
(Ekadashi Mata Ki Aarti
in English)

Om Jai Ekadashi, Jai Ekadashi, Jai Ekadashi Mata.
Vishnu Pooja Vrat Ko Dharan Kar, Shakti Mukti Pata ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Tere Naam Ginaoon Devi, Bhakti Pradan Karni.
Gan Gaurav Ki Deni Mata, Shastron Mein Varni ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Margashirsh Ke Krshnapaksh Ki Utpanna, Vishwatarani Janmi.
Shukl Paksh Mein Hui Mokshada, Muktidata Ban Aai ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Paush Ke Krshnapaksh Ki, Saphla Namak Hai.
Shuklapaksh Mein Hoy Putrada, Anand Adhik Rahai ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Naam Shatatila Magh Maas Mein, Krshnapaksh Avai.
Shuklapaksh Mein Jaya, Kahavai, Vijay Sada Pavai ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Vijaya Phagun Krshnapaksh Mein Shukla Amalaki.
Papmochani Krshn Paksh Mein, Chaitr Mahabali Ki ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Chaitr Shukl Mein Naam Kamada, Dhan Dene Wali.
Naam Baruthini Krshnapaksh Mein, Vaisakh Maah Wali ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Shukl Paksh Mein Hoy Mohini Apara Jyeshth Krshnapakshi.
Naam Nirjala Sab Sukh Karani, Shuklapaksh Rakhi ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Yogini Naam Aashadh Mein Janon, Krshnapaksh Karani.
Devashayani Naam Kahayo, Shuklapaksh Dharani ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Kamika Shravan Maas Mein Aavai, Krshnapaksh Kahie.
Shravan Shukla Hoy Pavitra Anand Se Rahie ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Aja Bhadrapad Krshnapaksh Ki, Parivartini Shukla.
Indra Ashchin Krshnapaksh Mein, Vrat Se Bhavasagar Nikala ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Papankusha Hai Shukl Paksh Mein, Aap Haranahari.
Rama Maas Kartik Mein Aavai, Sukhadayak Bhari ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Devotthani Shuklapaksh Ki, Dukhanashak Maiya.
Pavan Maas Mein Karoon Vinati Paar Karo Naiya ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Parama Krshnapaksh Mein Hoti, Jan Mangal Karani.
Shukl Maas Mein Hoy Padmini Dukh Daridr Harani ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

Jo Koi Aarti Ekadashi Ki, Bhakti Sahit Gavai.
Jan Guradita Swarg Ka Vasa, Nishchay Vah Pavai ॥
Om Jai Ekadashi… ॥

एकादशी माता के प्रसिद्ध मंदिर (Ekadashi Mata Famous Temples)

1.एकादशी माता मंदिर (जबलपुर, मध्य प्रदेश)

  • भेड़ाघाट के पास स्थित यह मंदिर लगभग 1100 वर्ष प्राचीन (कलचुरि कालीन) है यह भारत के सबसे अनूठे मंदिरों में से एक है, जहाँ मुख्य गर्भगृह में विष्णु जी के साथ माता एकादशी की भी मूर्ति स्थापित है

2. एकादशी देवी मंदिर (खोड़ गाँव, हरियाणा)

  • महेंद्रगढ़ जिले (अटेली क्षेत्र) के खोड़ गाँव में स्थित यह मंदिर देश के पांच प्रमुख एकादशी स्थलों में से एक माना जाता है यहाँ देवउठनी एकादशी पर भव्य मेला लगता है और नारियल-मिसरी का प्रसाद चढ़ाया जाता है

3. एकादशी गुफा (बद्रीनाथ, उत्तराखंड)

  • बद्रीनाथ स्थित एकादशी गुफा को माता एकादशी का प्राकट्य स्थल माना जाता है。 हर वर्ष मार्गशीर्ष (अघन) मास की कृष्ण पक्ष की एकादशी को “उत्पन्ना एकादशी” के रूप में मनाया जाता है, जो माता के जन्म का उत्सव है

4. जगन्नाथ पुरी की “उल्टी एकादशी” (ओडिशा)

  • पुरी के प्रसिद्ध जगन्नाथ मंदिर में एकादशी माता की मूर्ति उल्टी स्थिति (सिर नीचे, पैर ऊपर) में स्थापित है पौराणिक कथा के अनुसार, जब एकादशी माता ने पुरी धाम में प्रवेश कर रहे भक्तों को व्रत न करने के कारण दंडित करना चाहा, तब भगवान जगन्नाथ ने उन्हें अपने धाम की मर्यादा (जहाँ महाप्रसाद का अपमान नहीं किया जा सकता) का उल्लंघन करने पर यहाँ उल्टा लटका दिया था

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. एकादशी माता कौन हैं?
  • पौराणिक कथा के अनुसार, मुर नामक दैत्य से युद्ध के समय भगवान विष्णु के मन से एक दिव्य शक्ति उत्पन्न हुई थी, जिसने उस राक्षस का वध कर दिया । भगवान विष्णु ने प्रसन्न होकर उस शक्ति को ‘एकादशी’ नाम दिया तब से एकादशी को देवी रूप में पूजा जाता है।
  • 2. एकादशी व्रत कब और कितनी बार रखा जाता है?
  • हर माह में दो एकादशी (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) आती हैं इस प्रकार पूरे वर्ष में कुल 24 (मलमास या अधिक मास होने पर 26) एकादशियां होती हैं। प्रत्येक एकादशी का अपना अलग नाम और महत्व है
  • 3. एकादशी व्रत करने से क्या लाभ होता है?
  • एकादशी का दिन भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने के लिए सर्वोत्तम माना जाता है। इस व्रत के प्रभाव से शारीरिक और मानसिक शुद्धि होती है, जाने-अनजाने में हुए पापों का नाश होता है और व्यक्ति को बैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है
  • 4. एकादशी के दिन क्या खाना चाहिए और क्या नहीं?
  • क्या खाएं (सात्विक): व्रत में आप फल, दूध, साबूदाना, उबले आलू, और कुट्टू या सिंघाड़े के आटे से बनी चीजें खा सकते हैं।
  • क्या न खाएं: एकादशी के दिन चावल का सेवन पूरी तरह वर्जित माना जाता है। इसके अलावा प्याज, लहसुन, दालें, और सामान्य अनाज (गेहूं, मक्का आदि) नहीं खाया जाता।

5. एकादशी के दिन ‘चावल’ खाना क्यों वर्जित है?

  • पौराणिक कथा के अनुसार, महर्षि मेधा ने माता दुर्गा के क्रोध से बचने के लिए अपने शरीर का त्याग कर दिया था और उनका अंश पृथ्वी के भीतर समा गया था। बाद में उसी स्थान से जौ और चावल उत्पन्न हुए।
  • माना जाता है कि एकादशी के दिन चावल में महर्षि मेधा का अंश जीव रूप में विद्यमान रहता है, इसलिए इस दिन चावल खाना जीव-हत्या या पाप के समान माना जाता है।
  • वैज्ञानिक कारण: चावल में जल तत्व को सोखने की क्षमता सबसे अधिक होती है। एकादशी के दिन चंद्रमा का प्रभाव अधिक होने के कारण यदि शरीर में पानी की मात्रा (चावल खाने से) बढ़ेगी, तो मन विचलित और अशांत हो सकता है, जिससे व्रत और ध्यान में बाधा आती है।

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