ललिता माता आरती: आदिशक्ति माँ ललिता को दस महाविद्याओं में से एक ‘षोडशी’ या ‘त्रिपुरा सुंदरी’ के रूप में पूजा जाता है। वे अत्यंत सुंदर, दयालु और ब्रह्मांड की सर्वोच्च अधिष्ठात्री देवी (राजेश्वरी) हैं। माँ ललिता का एक प्रसिद्ध पावन धाम उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिला स्थित नैमिषारण्य में एक प्रमुख शक्तिपीठ के रूप में भी स्थापित है। ललिता माता आरती माँ महात्रिपुरसुंदरी को प्रसन्न करने का एक परम पावन माध्यम है। ललित माता व्रत , ललित जयंती और नवरात्रि पर ललित माता आरती का पाठ करने से सभी मनोकामना भी पूरी होती है
ललिता माता आरती हिन्दी में
(Lalita Mata Aarti in Hindi)
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ।
राजेश्वरी जय नमो नमः ॥
करुणामयी सकल अघ हारिणी ।
अमृत वर्षिणी नमो नमः ॥
जय शरणं वरणं नमो नमः ।
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ॥
अशुभ विनाशिनी, सब सुख दायिनी ।
खल-दल नाशिनी नमो नमः ॥
भण्डासुर वधकारिणी जय माँ ।
करुणा कलिते नमो नम: ॥
जय शरणं वरणं नमो नमः ।
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ॥
भव भय हारिणी, कष्ट निवारिणी ।
शरण गति दो नमो नमः ॥
शिव भामिनी साधक मन हारिणी ।
आदि शक्ति जय नमो नमः ॥
जय शरणं वरणं नमो नमः ।
जय त्रिपुर सुन्दरी नमो नमः ॥
श्री मातेश्वरी जय त्रिपुरेश्वरी ।
राजेश्वरी जय नमो नमः ॥
ललिता माता आरती इंग्लिश में
(Lalita Mata Aarti in English)
Shri Mateshwari Jai Tripureswari ।
Rajeshwari Jai Namo Namah ॥
Karunamayi Sakal Agh Harini ।
Amrt Varshini Namo Namah ॥
Jay Sharanan Varanan Namo Namah ।
Shri Mateshwari Jai Tripureswari ॥
Ashubh Vinashini, Sab Sukh Dayini ।
Khal-dal Nashini Namo Namah ॥
Bhandasur Vadhkarini Jai Maa ।
Karuna Kalite Namo Namah ॥
Jai Sharanan Varanan Namo Namah ।
Shri Mateshwari Jai Tripureswari ॥
Bhav Bhay Harini, Kasht Nivarini ।
Sharan Gati Do Namo Namah ॥
Shiv Bhamini Saadhak Man Harini ।
Aadi Shakti Jai Namo Namah ॥
Jay Sharanan Varanan Namo Namah ।
Jay Tripur Sundari Namo Namah ॥
Shri Mateshwari Jai Tripureswari ।
Rajeshwari Jai Namo Namah ॥
ललिता माता के प्रसिद्ध मंदिर (Lalita Mata Famous Temples)
1. त्रिपुरा सुंदरी मंदिर, उदयपुर (त्रिपुरा)
- यह मंदिर भारत के प्रसिद्ध 51 शक्तिपीठों में से एक है. माना जाता है कि यहाँ माता सती का दाहिना पैर गिरा था. इस मंदिर के नाम पर ही पूरे ‘त्रिपुरा’ राज्य का नाम पड़ा है. माता यहाँ एक कछुआ नुमा छोटी पहाड़ी पर विराजमान हैं, जिसे कूर्म पीठ कहा जाता है। यहाँ माता की पूजा ‘त्रिपुरा सुंदरी’ के रूप में की जाती है, जो कि मां ललिता का ही सर्वोच्च और अत्यंत सुंदर रूप है।
2. ललिता माता मंदिर (कामाख्या परिसर), गुवाहाटी (असम)
- गुवाहाटी की नीलाचल पहाड़ी पर स्थित मुख्य कामाख्या देवी मंदिर के मार्ग में माता ललिता का एक प्राचीन मंदिर आता है। यहाँ माता एक प्राकृतिक गुफा के रूप में (निराकार रूप में) विराजमान हैं, जहाँ से निरंतर पवित्र जल प्रवाहित होता रहता है तंत्र साधना में इस स्थान का विशेष महत्व है।
3.श्री ललिता त्रिपुरासुंदरी मंदिर, किलमबक्कम (चेन्नई, तमिलनाडु)
- दक्षिण भारत में मां ललिता त्रिपुरा सुंदरी की उपासना बहुत व्यापक है. चेन्नई के पास किलमबक्कम में स्थित यह मंदिर स्थानीय भक्तों के बीच गहरी आस्था का केंद्र है। दक्षिण भारत में माता को अक्सर ‘ललिताम्बिका’ के नाम से भी पुकारा जाता है और यहाँ श्री चक्र की पूजा का विशेष विधान है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1. माता ललिता कौन हैं?
- माता ललिता, जिन्हें ‘त्रिपुरा सुंदरी’ भी कहा जाता है, दस महाविद्याओं में से एक हैं। वे शक्ति का सबसे सुंदर और शक्तिशाली रूप मानी जाती हैं। वे ब्रह्मांड की रानी (राजराजेश्वरी) हैं और आदि शक्ति का सौम्य स्वरूप हैं।
- 2. श्री ललिता माता के पति कौन हैं?
- श्री ललिता त्रिपुर सुंदरी के पति भगवान कामेश्वर (या कामेश्वर) हैं। भगवान शिव का एक रूप।
- 3.माता ललिता का दुसरा नाम क्या है?
- माता ललिता जिन्हे त्रिपुरा सुंदरी , षोडशी , कामाक्षी और राजराजेश्वरी के नाम से भी जाना जाता है, एक हिंदू देवी है जो मुख्य रूप से शक्तिवाद परंपरा के भीतर प्रतिष्ठित है और दस महाविद्याओं में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त है।
- 4. ललिता माता की आरती करने के क्या लाभ हैं?
- माँ ललिता की प्रतिदिन आरती करने या सुनने से शत्रुओं का नाश होता है, रोगों से मुक्ति मिलती है और घर-परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसके अलावा, विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।
- 5.ललिता देवी की उत्पत्ति कैसे हुई थी?
- माता ललिता की उत्पत्ति का मुख्य कारण भंडासुर नामक दैत्य का वध करना था। कामदेव को भस्म करने के बाद, शिव के गण ‘चित्रकर्म’ ने उनकी राख से एक पुतला बनाया। जिसे भांडासुर नामक एक शक्तिशाली राक्षस पैदा हुआ, उसने तीनों लोकों में हाहाकार मचा दिया। उसके अत्याचारों से मुक्ति पाने के लिए देवराज इंद्र और अन्य देवताओं ने यज्ञ किया। इस यज्ञ की पवित्र अग्नि से आदिशक्ति ललिता देवी का प्राकट्य हुआ। देवी ललिता ने भांडासुर का वध करके संसार को उसके आतंक से मुक्त कराया।
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