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आरती (Aarti)

महावीर स्वामी आरती (Mahavir Swami Aarti)

जुलाई 22, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

महावीर स्वामी आरती: जैन धर्म में भगवान महावीर स्वामी का स्थान अत्यंत महत्वपूर्ण है। वे 24वें तीर्थंकर हैं, जिन्होंने अहिंसा, सत्य, अस्तेय, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह के पाँच महाव्रतों को प्रतिपादित किया। महावीर जयंती और प्रतिदिन मंदिरों में महावीर स्वामी आरती गाने से भक्तों के हृदय में शांति, विराग और आत्म-ज्ञान की ज्योति जगाती है। “जय सन्मति देवा” आरती जैन भक्तिमार्ग की एक लोकप्रिय रचना है, जो भगवान महावीर के जीवन, त्याग और दिव्य गुणों का सुंदर चित्रण करती है।

महावीर स्वामी आरती हिन्दी में
(Mahavir Swami Aarti
 in Hindi)

जय सन्मति देवा,
प्रभु जय सन्मति देवा।
वर्द्धमान महावीर वीर अति,
जय संकट छेवा ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥सिद्धार्थ नृप नन्द दुलारे,
त्रिशला के जाये ।
कुण्डलपुर अवतार लिया,
प्रभु सुर नर हर्षाये ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

देव इन्द्र जन्माभिषेक कर,
उर प्रमोद भरिया ।
रुप आपका लख नहिं पाये,
सहस आंख धरिया ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

जल में भिन्न कमल ज्यों रहिये,
घर में बाल यती ।
राजपाट ऐश्वर्य छोड़ सब,
ममता मोह हती ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

बारह वर्ष छद्मावस्था में,
आतम ध्यान किया।
घाति-कर्म चूर-चूर,
प्रभु केवल ज्ञान लिया ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

पावापुर के बीच सरोवर,
आकर योग कसे ।
हने अघातिया कर्म शत्रु सब,
शिवपुर जाय बसे ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

भूमंडल के चांदनपुर में,
मंदिर मध्य लसे ।
शान्त जिनेश्वर मूर्ति आपकी,
दर्शन पाप नसे ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

करुणासागर करुणा कीजे,
आकर शरण गही।
दीन दयाला जगप्रतिपाला,
आनन्द भरण तु ही ॥
॥ऊँ जय सन्मति देवा…॥

जय सन्मति देवा,
प्रभु जय सन्मति देवा।
वर्द्धमान महावीर वीर अति,
जय संकट छेवा ॥

जय सन्मति देवा,
प्रभु जय सन्मति देवा।
वर्द्धमान महावीर वीर अति,
जय संकट छेवा ॥

महावीर स्वामी आरती इंग्लिश में
(Mahavir Swami Aarti
 in English)

Jai Sanmati Deva,
Prabhu Jai Sanmati Deva ।
Vardhman Mahaveer Veer Ati,
Jai Sankat Cheva ॥
॥ Om Jai Sanmati Deva…॥

Siddharath Nrap Nand Dulare,
Trishala Ke Jaye
Kundalpur Avatar Liya,
Prabhu Surnar Harshaye ॥
॥ Om Jai Sanmati Deva…॥

Dev Indra JanmaBhishek Kar,
Ur Pramod Bhariya
Roop Aapaka Lakh Nahi Payen
Sahas Aankh Dhariya ॥
॥ Om Jai Sanmati Deva…॥

Jal Mein Bhinn Kamal Jo Rahiye,
Ghar Mein Baal Yati
Rajpat Aishwarya Chod Sab,
Mamata Moh Hati ॥
॥ Om Jai Sanmati Deva…॥

Bharah Varsh Jhadmavastha Main,
Aatma Dhyaan Kiya
Ghati Karm Choor Choor,
Prabhu Keval Gyaan Liya ॥
॥ Om Jai Sanmati Deva…॥

Pavapur Ke Bheech Sarovar,
Aakar Yog Kase
Hane Aghatiya Karm Shtru Sab,
Shivpur Jaye Base ॥
॥ Om Jai Sanmati Deva…॥

Bhomandal Ke Chandanpur Main,
Mandir Madhya Lase
Shant Jineshwar Murti Aapaki,
Darshan Paap Nase ॥
॥ Om Jai Sanmati Deva…॥

KarunaSagar Karuna Keeje,
Aakar Sharan Gahi
DeenDayala JagPratipala,
Anand Bharan Tu Hi ॥
॥ Om Jai Sanmati Deva…॥

Jai Sanmati Deva,
Prabhu Jai Sanmati Deva ।
Vardhman Mahaveer Veer Ati,
Jai Sankat Cheva ॥

महावीर स्वामी के प्रसिद्ध मंदिर (Mahavir Swami Famous Temples)

1.श्री महावीरजी मंदिर (करौली, राजस्थान)

यह भारत में दिगंबर जैन संप्रदाय के सबसे बड़े और चमत्कारी तीर्थों में से एक है। चंदनपुर में गंभीर नदी के तट पर स्थित इस मंदिर में भगवान महावीर की लगभग 1000 वर्ष पुरानी प्रतिमा स्थापित है। यहाँ के लिए भारतीय रेलवे ने ‘श्री महावीरजी’ नाम से एक अलग स्टेशन भी बनाया है।

2.जल मंदिर (पावापुरी, बिहार)

जैन धर्म के लिए अत्यंत पवित्र, यह मंदिर उस स्थान पर बना है जहाँ भगवान महावीर को महापरिनिर्वाण (मोक्ष) प्राप्त हुआ था। यह मंदिर एक सुंदर तालाब के बीचों-बीच स्थित है, जिसके कारण इसे ‘जल मंदिर’ कहा जाता है।

3.श्री दिगंबर जैन लाल मंदिर

लाल किले के ठीक सामने स्थित यह दिल्ली का सबसे पुराना जैन मंदिर है। इसका निर्माण 1656 में मुगल काल के दौरान हुआ था। लाल बलुआ पत्थर से बने इस भव्य मंदिर परिसर में एक प्रसिद्ध पक्षी अस्पताल (Bird Hospital) भी संचालित होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. भगवान महावीर का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
  • भगवान महावीर का जन्म ईसा पूर्व 599 में वैशाली (बिहार) के पास कुंडग्राम में हुआ था। उनका जन्म चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी को एक शाही क्षत्रिय परिवार में हुआ था।
  • 2. भगवान महावीर के माता-पिता का नाम क्या था?
  • उनकी माता का नाम त्रिशला (या विदेहदत्ता) और पिता का नाम राजा सिद्धार्थ था। उनके पिता ज्ञात्रक क्षत्रियों के प्रमुख थे।
  • 3. भगवान महावीर ने गृहत्याग कब किया और संन्यास क्यों लिया?
  • संसार के दुखों से विरक्त होकर उन्होंने 30 वर्ष की आयु में अपना राजपाट और परिवार त्याग दिया। वे सत्य की खोज और आत्म-कल्याण के लिए संन्यासी बन गए।
  • 4. भगवान महावीर ने अपने उपदेश किस भाषा में दिए थे?
  • महावीर स्वामी ने अपने उपदेश ‘अर्धमागधी’ (प्राकृत भाषा) में दिए थे। उस समय संस्कृत उच्च वर्ग की भाषा थी, जबकि प्राकृत आम जनता की भाषा थी। उन्होंने आम लोगों की भाषा को इसलिए चुना ताकि समाज का हर वर्ग उनके संदेश को आसानी से समझ सके।
  • 5. महावीर स्वामी को निर्वाण (मोक्ष) की प्राप्ति कब हुई?
  • 72 वर्ष की आयु में, कार्तिक कृष्ण अमावस्या के दिन बिहार के पावापुरी में उन्हें निर्वाण (मोक्ष) प्राप्त हुआ। इसी दिन जैन समुदाय द्वारा दीपावली का पर्व मनाया जाता है।

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