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आरती (Aarti)

नरसिंह भगवान की आरती (Narsingh Bhagwan Ki Aarti)

जुलाई 19, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

नरसिंह भगवान की आरती: भगवान विष्णु के चौथे अवतार भगवान नरसिंह (नृसिंह) हिंदू धर्म में भक्तों की रक्षा के प्रतीक हैं। अर्ध-नर और अर्ध-सिंह रूप में उन्होंने दैत्य राजा हिरण्यकशिपु का संहार कर प्रह्लाद महाराज की रक्षा की थी। भगवान नरसिंह की कथा भागवत पुराण में विस्तार से वर्णित है। प्रह्लाद महाराज विष्णु भक्त थे, जबकि उनके पिता हिरण्यकशिपु विष्णु के विरोधी। जब हिरण्यकशिपु ने प्रह्लाद को मारने की कोशिश की, तब भगवान नरसिंह अवतरित हुए। यह कथा सत्य, भक्ति और धर्म की विजय का प्रतीक है। नरसिंह भगवान की आरती भक्तों के मन में विशेष श्रद्धा जगाती है। नरसिंह भगवान की आरती न केवल भजन है, बल्कि भगवान की उस अद्भुत लीला की स्मृति है जिसमें उन्होंने भक्त की रक्षा के लिए असंभव को संभव बनाया। नरसिंह जयंती (वैशाख शुक्ल चतुर्दशी) पर इस आरती का विशेष महत्व माना जाता है। मंगलवार को भी नरसिंह पूजा और आरती करने का विधान है। कई भक्त नरसिंह कवच और उग्र नरसिंह मंत्र (“ॐ उग्रं वीरं महाविष्णुं”) के साथ आरती का पाठ करते हैं।

नरसिंह भगवान की आरती हिन्दी में
(Narsingh Bhagwan Ki Aarti
in Hindi)

आरती कीजै नरसिंह कुंवर की ।
वेद विमल यश गाउँ मेरे प्रभुजी ॥

पहली आरती प्रह्लाद उबारे ।
हिरणाकुश नख उदर विदारे ॥

दुसरी आरती वामन सेवा ।
बल के द्वारे पधारे हरि देवा ॥

तीसरी आरती ब्रह्म पधारे ।
सहसबाहु के भुजा उखारे ॥

चौथी आरती असुर संहारे ।
भक्त विभीषण लंक पधारे ॥

पाँचवीं आरती कंस पछारे ।
गोपी ग्वाल सखा प्रतिपाले ॥

तुलसी को पत्र कंठ मणि हीरा ।
हरषि-निरखि गावे दास कबीरा ॥

नरसिंह भगवान की आरती इंग्लिश में
(Narsingh Bhagwan Ki Aarti
in English)

Aarti Keejai Narasinh Kunvar Ki ।
Ved Vimal Yash Gaun Mere Prabhuji ॥

Pahali Aarti Prahlad Ubare ।
Hiranakush Nakh Udar Vidare ॥

Dusari Aarti Vaaman Seva ।
Bal Ke Dware Padhare Hari Deva ॥

Teesari Aarti Brahm Padhare ।
Sahasabahu Ke Bhuja Ukhare ॥

Chauthi Aarti Asur Sanhare ।
Bhakt Vibhishan Lank Padhare ॥

Panchavin Aarti Kans Pachhare ।
Gopi Gwal Sakha Pratipale ॥

Tulasi Ko Patr Kanth Mani Heera ॥
Harashi-Nirakhi Gave Das Kabira ॥

नरसिंह भगवान के प्रसिद्ध मंदिर (Narsingh Bhagwan Famous Temples)

1.मंगलगिरी पनाकल नरसिंह स्वामी मंदिर (आंध्र प्रदेश)

  • यह मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है। यहाँ भगवान की मूर्ति को गुड़ का पानी (पनाकल) चढ़ाया जाता है। ऐसा माना जाता है कि भगवान स्वयं आधा पानी पी जाते हैं और बाकी आधा पानी प्रसाद के रूप में भक्तों को मिलता है। यहाँ आश्चर्यजनक रूप से एक भी चींटी या मक्खी नहीं लगती।

2. नरसिंह मंदिर, हिंडौन (करौली)

  • यह राजस्थान का एक बहुत ही प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिर है। यहाँ भगवान नरसिंह की एक विशाल और भव्य प्रतिमा स्थापित है। नरसिंह जयंती के अवसर पर यहाँ बहुत बड़ा मेला लगता है और रथयात्रा निकाली जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार क्यों लिया?
  • दैत्यराज हिरण्यकशिपु को भगवान ब्रह्मा से एक अद्भुत वरदान प्राप्त था, जिसके अनुसार उसे कोई मनुष्य, देवता या जानवर ; दिन या रात ; घर के अंदर या बाहर ; और किसी भी अस्त्र-शस्त्र से नहीं मार सकता था । इस वरदान के अहंकार में आकर वह खुद को भगवान मानने लगा था। इस परिस्थिति से निपटने और हिरण्यकशिपु का वध करने के लिए विष्णु जी ने नरसिंह भगवान,(आधे मानव और आधे सिंह) का रूप लिया।
  • 2. नरसिंह अवतार कहाँ से प्रकट हुए थे?
  • सनातन शास्त्रों और पुराणों के अनुसार, भगवान नरसिंह अपने भक्त प्रह्लाद की पुकार पर महल के एक खंभे (स्तंभ) को चीरकर प्रकट हुए थे।
  • 3. हिरण्यकशिपु का वध कब और कहाँ हुआ?
  • भगवान नरसिंह ने वरदान की शर्तों का पालन करते हुए, हिरण्यकशिपु का वध संध्या काल (गोधूलि बेला) में किया था। यह समय न दिन था और न रात। वध का स्थान महल की देहली (चौखट) थी, जो न अंदर थी और न बाहर।भगवान ने उसे न तो भूमि पर मारा और न आकाश में, बल्कि अपनी जंघा (जांघ) पर लिटाकर वध किया। किसी हथियार का उपयोग करने के बजाय, उन्होंने अपने पैने नाखूनों का इस्तेमाल करके उसका पेट फाड़ दिया था
  • 4. नरसिंह अवतार के बाद प्रह्लाद का क्या हुआ?
  • भगवान नरसिंह ने शांत होने के बाद प्रह्लाद को आशीर्वाद दिया और उन्हें दैत्यों का राजा नियुक्त किया। प्रह्लाद ने लंबे समय तक धर्मपूर्वक राज्य किया और अंत में मोक्ष प्राप्त किया
  • 5. नरसिंह जयंती कब मनाई जाती है?
  • नरसिंह भगवान के प्रकट होने के इस पावन उत्सव को नरसिंह जयंती कहा जाता है। यह त्योहार हर वर्ष वैशाख मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है।

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