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आरती (Aarti)

राधा रानी आरती (Radha Rani Aarti)

जुलाई 18, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

राधा रानी आरती: ईस आरती को हिंदू धर्म में अत्यंत पवित्र और भावपूर्ण आरती मानी जाती है। राधा रानी को श्रीकृष्ण की परम प्रिय शक्ति और भक्ति का सर्वोच्च स्वरूप है। राधा रानी को भक्ति, प्रेम और समर्पण की देवी कहा जाता है। राधा’ शब्द का अर्थ है आराधना या पूजा करना। जो सदैव भगवान श्रीकृष्ण की आराधना में लीन रहती हैं, वही राधा हैं। माना जाता है की कृष्ण की आराधना करने के कारण ही उनका नाम राधा पड़ा। शास्त्रों के अनुसार, राधा रानी कोई साधारण गोपी नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं श्रीकृष्ण की आंतरिक ऊर्जा और उनकी प्रेमिका का शाश्वत रूप हैं। कृष्ण और राधा को एक ही चेतना के दो रूप माना जाता है, जिन्हें एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है राधा रानी आरती का पाठ करने से भक्त के जीवन में प्रेम, शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है। राधा रानी की आराधना विशेष रूप से राधा अष्टमी, वृंदावन, बरसाना और मथुरा में बड़े श्रद्धा भाव से की जाती है।

राधा रानी आरती हिन्दी में
(Radha Rani Aarti
in Hindi)

आरती श्री वृषभानुसुता की,
मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥

त्रिविध तापयुत संसृति नाशिनि,
विमल विवेकविराग विकासिनि ।
पावन प्रभु पद प्रीति प्रकाशिनि,
सुन्दरतम छवि सुन्दरता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥

मुनि मन मोहन मोहन मोहनि,
मधुर मनोहर मूरति सोहनि ।
अविरलप्रेम अमिय रस दोहनि,
प्रिय अति सदा सखी ललिता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥

संतत सेव्य सत मुनि जनकी,
आकर अमित दिव्यगुन गनकी ।
आकर्षिणी कृष्ण तन मनकी,
अति अमूल्य सम्पति समता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥

। आरती श्री वृषभानुसुता की ।

कृष्णात्मिका, कृष्ण सहचारिणि,
चिन्मयवृन्दा विपिन विहारिणि ।
जगजननि जग दुखनिवारिणि,
आदि अनादिशक्ति विभुता की ॥
॥ आरती श्री वृषभानुसुता की..॥

आरती श्री वृषभानुसुता की,
मंजुल मूर्ति मोहन ममता की ॥

राधा रानी आरती इंग्लिश में
(Radha Rani Aarti
in English)

Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki,
Manjul Moorti Mohan Mamta Ki ॥

Trividh Tapayut Sansrti Nashini,
Vimal Vivekavirag Vikasini ।
Paavan Prabhu Pad Preeti Prakashini,
Sundartam Chhavi Sundarta Ki ॥
॥ Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki.. ॥

Muni Man Mohan Mohan Mohani,
Madhur Manohar Moorati Sohani ।
Aviralaprem Amiy Ras Dohani,
Priya Ati Sada Sakhi Lalita Ki ॥
॥ Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki.. ॥

Santat Sevy Sat Muni Janaki,
Aakar Amit Divyagun Ganaki ।
Aakarshini Krishn Tan Manki,
Ati Amooly Sampati Samata Ki ॥
॥ Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki.. ॥

। Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki. ।

Krishnatmika, Krishn Sahacharini,
Chinmayavrinda Vipin Viharini ।
Jagjanani Jag Dukhanivarini,
Aadi Anadishakti Vibhuta Ki ॥
॥ Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki.. ॥

Aarti Shri Vrshabhanusuta Ki,
Manjul Moorti Mohan Mamta Ki ॥

राधा रानी के प्रसिद्ध मंदिर (Radha Rani Famous Temples)

1. लाड़ली जी मंदिर (बरसाना)

लाड़ली जी मंदिर (जिसे श्रीजी मंदिर भी कहा जाता है) बरसाना का सबसे प्रमुख और पवित्र धार्मिक स्थल है। यह मंदिर पूरी तरह से राधा रानी को समर्पित है, जिन्हें ब्रजवासी प्यार से ‘लाड़ली जी’ या ‘श्रीजी’ कहते हैं इस भव्य मंदिर का निर्माण सन 1614 में ओरछा के राजा वीर सिंह देव ने करवाया था। मंदिर के निर्माण में बलुआ लाल पत्थर और सफेद संगमरमर का उपयोग किया गया है, जो इसकी वास्तुकला को बेहद खूबसूरत बनाते हैं। जिस ‘ब्रह्मगिरी पर्वत’ पर यह मंदिर बना है, उसे स्वयं भगवान ब्रह्मा का रूप माना जाता है।

2. राधा वल्लभ मंदिर (वृंदावन)

उत्तर प्रदेश के वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर के समीप स्थित एक अत्यंत प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर है। मंदिर के गर्भगृह में केवल भगवान श्री कृष्ण (श्री राधा वल्लभ लाल) की ही अत्यंत सुंदर विग्रह (मूर्ति) विराजमान है। यहाँ राधा जी की कोई अलग मूर्ति नहीं है। श्री कृष्ण की प्रतिमा के ठीक बगल में एक दिव्य मुकुट और सिंहासन (गद्दी) सजाया जाता है। इसे ही श्री राधा रानी का साक्षात् प्रतीक मानकर पूजा जाता है। मान्यता है कि राधा और कृष्ण दो अलग सत्ता नहीं, बल्कि एक ही आत्मा हैं (युगल स्वरूप)। विग्रह के आधे भाग में कृष्ण और आधे में राधा समाहित हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. राधा रानी कौन हैं?
  • शास्त्रों के अनुसार, राधा रानी कोई साधारण गोपी नहीं हैं, बल्कि वे स्वयं श्रीकृष्ण की आंतरिक ऊर्जा और उनकी प्रेमिका का शाश्वत रूप हैं। कृष्ण और राधा को एक ही चेतना के दो रूप माना जाता है, जिन्हें एक-दूसरे से अलग नहीं किया जा सकता है
  • 2. राधा रानी का जन्म कहाँ हुआ था?
  • राधा जी का प्राकट्य (जन्म) बरसाना से लगभग 8 किलोमीटर दूर रावल नामक गाँव में हुआ था। बाद में उनका परिवार बरसाना में बस गया, इसलिए बरसाना को उनका मुख्य धाम माना जाता है।
  • 3. राधा रानी का नाम ‘राधा’ क्यों पड़ा?
  • ‘राधा’ शब्द का अर्थ है आराधना या पूजा करना। जो सदैव भगवान श्रीकृष्ण की आराधना में लीन रहती हैं, वही राधा हैं। शास्त्रों के अनुसार, कृष्ण की आराधना करने के कारण ही उनका नाम राधा पड़ा।
  • 4. क्या राधा रानी के अन्य नाम भी हैं?
  • हाँ, उन्हें कई अन्य प्यारे नामों से भी जाना जाता है जिनमें प्रमुख हैं:
  • राधिका
  • लाडली जी
  • किशोरी जी
  • वृजेश्वरी
  • स्वामिनी
  • 5. राधा रानी का विवाह किसके साथ हुआ था?
  • लौकिक और सामाजिक परंपरा के अनुसार, राधा रानी का विवाह अयान (या अभिमन्यु) नाम के एक गोप के साथ हुआ था। हालाँकि, शास्त्रों के अनुसार यह केवल एक सांसारिक दायित्व था, क्योंकि राधा रानी का मन और प्राण सदैव श्रीकृष्ण में ही लीन रहते थे।
  • 6. राधा अष्टमी क्या है?
  • राधा रानी के जन्म दिवस को राधा अष्टमी के रूप में मनाया जाता है। यह त्योहार भाद्रपद (भादों) महीने के शुक्ल पक्ष की अष्टमी को मनाया जाता है। मथुरा और बरसाना में यह अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है।

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