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आरती (Aarti)

संकटा माता आरती (Sankata Mata Aarti)

जुलाई 22, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

संकटा माता आरती: ये आरती माँ संकटा देवी को समर्पित है। माँ संकटा देवी (संकटा माता) को हिंदू धर्म में संकटों, कष्टों और विपत्तियों को दूर करने वाली देवी माना गया हैं। उन्हें माँ चंडी का एक रूप और माँ वैष्णो देवी की बहन माना जाता है। पुराणों में संकटा माता को ‘विकट मात्रिका’ (उग्र माता) कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि जब पांडव अपने अज्ञातवास और वनवास के दौरान संकट में थे, तब उन्होंने अपनी विपत्तियों से मुक्ति पाने के लिए एक पैर पर खड़े होकर माँ संकटा की घोर तपस्या की थी और उनसे अभय वरदान प्राप्त किया था। संकटा माता आरती संकटा माता को प्रसन्न करने का एक परम पावन माध्यम है। संकटा माता की पूजा मुख्य रूप से मंगलवार के दिन की जाती है। इसके अलावा, नवरात्रों में माता की पूजन करने से उनकी विशेष कृपा प्राप्त होती है

संकटा माता आरती हिन्दी में
(Sankata Mata Aarti in Hindi)

जय जय संकटा भवानी,
करहूं आरती तेरी ।
शरण पड़ी हूँ तेरी माता,
अरज सुनहूं अब मेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

नहिं कोउ तुम समान जग दाता,
सुर-नर-मुनि सब टेरी ।
कष्ट निवारण करहु हमारा,
लावहु तनिक न देरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

काम-क्रोध अरु लोभन के वश
पापहि किया घनेरी ।
सो अपराधन उर में आनहु,
छमहु भूल बहु मेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

हरहु सकल सन्ताप हृदय का,
ममता मोह निबेरी ।
सिंहासन पर आज बिराजें,
चंवर ढ़ुरै सिर छत्र-छतेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

खप्पर, खड्ग हाथ में धारे,
वह शोभा नहिं कहत बनेरी ॥
ब्रह्मादिक सुर पार न पाये,
हारि थके हिय हेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

असुरन्ह का वध किन्हा,
प्रकटेउ अमत दिलेरी ।
संतन को सुख दियो सदा ही,
टेर सुनत नहिं कियो अबेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

गावत गुण-गुण निज हो तेरी,
बजत दुंदुभी भेरी ।
अस निज जानि शरण में आयऊं,
टेहि कर फल नहीं कहत बनेरी ॥
जय जय संकटा भवानी..॥

जय जय संकटा भवानी,
करहूं आरती तेरी ।
भव बंधन में सो नहिं आवै,
निशदिन ध्यान धरीरी ॥

जय जय संकटा भवानी,
करहूं आरती तेरी ।
शरण पड़ी हूँ तेरी माता,
अरज सुनहूं अब मेरी ॥

संकटा माता आरती इंग्लिश में
(Sankata Mata Aarti in English)

Jai Jai Sankata Bhawani,
Karahoon Aarti Teri ।
Sharan Padi Hoon Teri Mata,
Araj Sunahoon Ab Meri ॥
॥ Jai Jai Sankata Bhawani.. ॥

Nahin Kou Tum Saman Jag Data,
Sur-nar-muni Sab Teri ।
Kasht Nivaran Karahu Hamara,
Lavahu Tanik Na Deri ॥
॥ Jai Jai Sankata Bhawani.. ॥

Kaam-krodh Aru Lobhan Ke Vash
Paapahi Kiya Ghaneri ।
So Aparadhan Ur Mein Aanahu,
Chhamahu Bhool Bahu Meri ॥
॥ Jai Jai Sankata Bhawani.. ॥

Harahu Sakal Santap Hrday Ka,
Mamta Moh Niberi ।
Sinhasan Par Aaj Birajen,
Chanvar Dhurai Sir Chhatr-chhateri .
॥ Jai Jai Sankata Bhawani.. ॥

Khappar, Khadg Hath Mein Dhare,
Wah Shobha Nahin Kahat Baneri ।
Brahmadik Sur Paar Na Paaye,
Haari Thake Hiy Heri ॥
॥ Jai Jai Sankata Bhawani.. ॥

Asuranh Ka Vadh Kinha,
Prakateu Amat Dileri ।
Santan Ko Sukh Diyo Sada Hi,
Ter Sunat Nahin Kiyo Aberi ॥
॥ Jai Jai Sankata Bhawani.. ॥

Gaavat Gun-gun Nij Ho Teri,
Bajat Dundubhi Bheri ।
As Nij Jaani Sharan Mein Aayoon,
Tehi Kar Phal Nahin Kahat Baneri ॥
॥ Jai Jai Sankata Bhawani.. ॥

Jai Jai Sankata Bhawani,
Karahoon Aarti Teri ।
Bhav Bandhan Mein So Nahin Aavai,
Nishadin Dhyaan Dhariri ॥

Jai Jai Sankata Bhawani,
Karahoon Aarti Teri ।
Sharan Padi Hoon Teri Mata,
Araj Sunahoon Ab Meri ॥

संकटा माता प्रसिद्ध मंदिर (Sankata Mata Famous Temples)

1. श्री संकटा देवी मंदिर, वाराणसी (उत्तर प्रदेश)

काशी में संकटा घाट के पास स्थित यह भारत के सबसे प्रसिद्ध संकटा माता मंदिरों में से एक है माना जाता है कि संकटा माताअपने भक्तों के सभी संकट हर लेती हैं यहाँ 18वीं सदी में बड़ौदा के राजा द्वारा मंदिर और घाट का निर्माण कराया गया था यहाँ माता के चरणों को छूने की विशेष अनुमति है हर शुक्रवार को मंदिर में भक्तों की भारी भीड़ होती है

2. माता संकटा देवी मंदिर, लखीमपुर खीरी (उत्तर प्रदेश)

लखीमपुर शहर के मध्य में स्थित यह मंदिर लगभग 5500 वर्ष से भी अधिक पुराना माना जाता है भक्तों की श्रद्धा के केंद्र इस मंदिर की स्थापना स्वयं भगवान श्रीकृष्ण द्वारा महाभारत काल में पांडवों की रक्षा के लिए किए जाने की मान्यता है

3.माता संकटा मंदिर, विंध्याचल (उत्तर प्रदेश)

शक्तिपीठ विंध्याचल की त्रिकोण यात्रा में माता संकटा का मंदिर एक प्रमुख पड़ाव है माँ के इस रूप की आराधना विशेष रूप से जीवन के कष्टों और विपत्तियों से मुक्ति पाने के लिए की जाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. संकटा माता कौन हैं?
  • संकटा माता देवी चंडी के उग्र रूपों में से एक हैं, जो भक्तों के सभी संकटों को दूर करती हैं। उन्हें विशेष रूप से विपत्तियों, रोगों और कष्टों से मुक्ति दिलाने वाली देवी माना जाता है।
  • 2. संकटा माता को किन चीजों का भोग लगाया जाता है?
  • माता संकटा को मुख्य रूप से कच्चा नारियल, चुनरी, और चावल के लड्डू (पिन्नी) का भोग लगाया जाता है।
  • 3.इनकी पूजा किस दिन की जाती है?
  • संकटा माता की पूजा मुख्य रूप से मंगलवार के दिन की जाती है। इसके अलावा, नवरात्रों में भी माता के दर्शन और पूजन का विशेष महत्व होता है।
  • 4. पौराणिक कथाओं में संकटा माता का क्या इतिहास है?
  • पुराणों में संकटा माता को ‘विकट मात्रिका’ (उग्र माता) कहा गया है. मान्यता है कि महाभारत काल में पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान कष्टों से मुक्ति पाने के लिए माता संकटा की विशेष पूजा की थी. इसके अलावा इन्हें माता वैष्णो देवी की बहन के रूप में भी जाना जाता है.
  • 5.संकटा माता व्रत की मुख्य पौराणिक कथा क्या है?
  • पद्म पुराण के अनुसार, एक बार राजा चंद्रसेन के राज्य पर शत्रुओं ने हमला कर दिया और वे अपना सब कुछ हारकर जंगलों में भटकने लगे। उनकी पत्नी, रानी सत्यवती, बेहद दुखी थीं। तब उन्हें एक ऋषि ने संकटा माता के व्रत की महिमा बताई। रानी ने पूरे नियम से माता का व्रत और पूजन की। व्रत के प्रभाव से राजा चंद्रसेन को न केवल उनका खोया हुआ राज्य वापस मिला, बल्कि उनके जीवन के सभी संकट भी समाप्त हो गए। तभी से इस व्रत की शुरुआत हुई।

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