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आरती (Aarti)

संत तुकाराम आरती (Sant Tukaram Aarti)

जुलाई 19, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

संत तुकाराम आरती: महाराष्ट्र की भक्ति परंपरा में संत तुकाराम महाराज का स्थान अत्यंत ऊँचा है। इस महान संत ने अभंगों (भजनों ) के माध्यम से भगवान विठ्ठल (विठोबा) की भक्ति को आम जन तक पहुँचाया। संत तुकाराम का जन्म 1608 ई. में देहू (पुणे के पास) में हुआ था। वे एक साधारण किराना व्यापारी थे, लेकिन भगवान विठोबा की कृपा से उन्हें संतत्व प्राप्त हुआ। उन्होंने सैकड़ों अभंग रचे, जिनमें भक्ति, वैराग्य, सामाजिक न्याय और ईश्वर प्रेम की शिक्षा थी। मान्यता है कि संत तुकाराम ने विठ्ठल की आज्ञा से अपने अभंगों की पोटली इंद्रायणी नदी में विसर्जित कर दी थी। कुछ दिनों बाद वे पुनः पानी पर तैरती हुई मिलीं – यह चमत्कार आज भी भक्तों को प्रेरित करता है। आज भी देहू और पंढरपुर में उनके समाधि स्थल पर लाखों भक्त दर्शन करते हैं। संत तुकाराम आरती उनके भक्तों के हृदय में गहरी श्रद्धा और आनंद भर देती है। यह आरती केवल पूजा का अंग नहीं, बल्कि संत तुकाराम की दिव्य उपस्थिति का अनुभव कराती है।

संत तुकाराम आरती हिन्दी में
(Sant Tukaram Aarti in Hindi)

आरती तुकाराम ।
स्वामी सद्गुरु धाम ॥
सच्चिदानंद मूर्ती ।
पाय दाखवी आम्हा ॥

आरती तुकाराम ।
स्वामी सद्गुरु धाम ॥
सच्चिदानंद मूर्ती ।
पाय दाखवी आम्हा ॥

राघवे सागरात ।
पाषाण तारीले ॥
तैसे हें तुकोबाचे ।
अभंग उदकी रक्षिले ॥
आरती तुकाराम ॥

आरती तुकाराम ।
स्वामी सद्गुरु धाम ॥
सच्चिदानंद मूर्ती ।
पाय दाखवी आम्हा ॥

तुकिता तुलनेसी ।
ब्रह्म तुकासी आले ॥
म्हणोनि रामेश्वरे ।
चरणी मस्तक ठेविले ॥

आरती तुकाराम ।
स्वामी सद्गुरु धाम ॥
सच्चिदानंद मूर्ती ।
पाय दाखवी आम्हा ॥

आरती तुकाराम ।
स्वामी सद्गुरु धाम ॥
सच्चिदानंद मूर्ती ।
पाय दाखवी आम्हा ॥

संत तुकाराम आरती इंग्लिश में
(Sant Tukaram Aarti in English)

Arati Tukarama ।
Svami Sadguru Dhama ॥
Saccidananda Murti ।
Paya Dakhavi Amha ॥

Arati Tukarama ।
Svami Sadguru Dhama ॥
Saccidananda Murti ।
Paya Dakhavi Amha ॥

Raghave Sagarata ।
Pasana Tarile ॥
Taise hem tukobace ।
Abhaṅga Udaki Raksile.
Arati Tukarama ॥

Arati Tukarama ।
Svami Sadguru Dhama ॥
Saccidananda Murti ।
Paya Dakhavi Amha ॥

Tukita Tulanesi ।
Brahma Tukasi Ale ॥
Mhanoni Ramesvare ।
Carani Mastaka Thevile ॥

Arati Tukarama ।
Svami Sadguru Dhama ॥
Saccidananda Murti ।
Paya Dakhavi Amha ॥

Arati Tukarama ।
Svami Sadguru Dhama ॥
Saccidananda Murti ।
Paya Dakhavi Amha ॥

संत तुकाराम जी के प्रसिद्ध मंदिर (Sant Tukaram Famous Temples)

1. देहू गाँव (मुख्य तीर्थ स्थल)

  • पुणे के पास इंद्रायणी नदी के तट पर बसा देहू गाँव संत तुकाराम जी का जन्मस्थान है। यहाँ मुख्य रूप से तीन पवित्र स्थान हैं:
  • मुख्य समाधि मंदिर: इसे ‘वैकुंठ स्थान’ भी कहते हैं। मान्यता है कि इसी स्थान से वे सदेह (शरीर सहित) वैकुंठ गए थे। यहाँ एक पुराना ‘नांदुरकी’ का पेड़ है, जिसके बारे में कहा जाता है कि उनके प्रस्थान के समय इसकी पत्तियाँ हिलने लगी थीं।
  • शीला मंदिर: इंद्रायणी नदी के घाट पर स्थित इस मंदिर में वह ऐतिहासिक पत्थर (शीला) रखा है, जिस पर बैठकर तुकाराम जी ने १३ दिनों तक कड़ा उपवास और ध्यान किया था।
  • संत तुकाराम गाथा मंदिर: यह मुख्य गाँव से थोड़ा दूर स्थित एक भव्य, तीन मंजिला आधुनिक मंदिर है। इस मंदिर की संगमरमर की दीवारों पर तुकाराम जी के ४,००० से अधिक अभंग (भजन) सुंदर अक्षरों में खोदे गए हैं। मंदिर के प्रवेश द्वार पर संत तुकाराम जी की एक विशाल पीतल की मूर्ति स्थापित है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. संत तुकाराम जी का जन्म कब और कहाँ हुआ था?
  • उनका जन्म 1608 ई. में महाराष्ट्र के पुणे जिले के पास देहु (Dehu) नामक गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम बोल्होबा और माता का नाम कनकाई था।
  • 2. संत तुकाराम जी के परिवार में कौन-कौन था?
  • तुकाराम जी का पुश्तैनी व्यापार था। उनकी पहली पत्नी रखमाबाई थीं, जिनसे उन्हें एक पुत्र (संतू) हुआ। भीषण अकाल के दौरान उनकी पहली पत्नी और बच्चे की भूख से तड़पते हुए मृत्यु हो गई थी। इसके बाद उन्होंने दूसरा विवाह जीजाबाई से किया।
  • 3. संत तुकाराम जी को आध्यात्मिक ज्ञान कैसे प्राप्त हुआ?
  • परिवार के निधन और भीषण गरीबी से विरक्त होकर उन्होंने भंडारा पर्वत पर एकांत में समय बिताया। उन्हें बाबाजी चैतन्य से ‘रामकृष्णहरि’ मंत्र का उपदेश मिला, जिसके बाद उन्होंने अपना पूरा जीवन भक्ति, कीर्तन और समाज सुधार को समर्पित कर दिया।
  • 4. संत तुकाराम जी के अभंगों को नदी में क्यों डुबोया गया था?
  • तुकाराम जी पिछड़ी जाति से थे और सरल भाषा में वेदों का सार (अभंग) लिखते थे। उस समय के कुछ रूढ़िवादी विद्वानों (जैसे रामेश्वर भट्ट) को यह पसंद नहीं आया। उन्होंने तुकाराम जी को आदेश दिया कि वे अपनी कविताओं की पोटली इंद्रायणी नदी में डुबो दें। तुकाराम जी ने आज्ञा का पालन किया और नदी किनारे बैठकर 13 दिनों तक उपवास और भगवान विट्ठल की प्रार्थना की। ऐसा माना जाता है कि 13वें दिन उनकी सभी कविताएँ बिना भीगे पानी के ऊपर तैरती हुई सुरक्षित वापस मिल गईं
  • 5. संत तुकाराम जी का अंतिम समय (वैकुंठ गमन) कैसा था?
  • लोक मान्यताओं के अनुसार, फाल्गुन कृष्ण द्वितीया (तुकाराम बीज) के दिन, संत तुकाराम जी ने अपने गाँव देहु में इंद्रायणी नदी के किनारे सभी भक्तों को अंतिम उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि अब उनके जाने का समय हो गया है। इसके बाद वे सशरीर (अपने भौतिक शरीर के साथ) वैकुंठ चले गए। आज भी उस स्थान पर उनकी याद में ‘तुकाराम बीज’ उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है।

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