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आरती (Aarti)

शाकुम्भरी माता की आरती (Shakambhari Mata ki Aarti)

जुलाई 22, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

शाकुम्भरी माता की आरती: माँ शाकुम्भरी देवी आदिशक्ति दुर्गा का एक करुणामयी स्वरूप हैं। “शाकुम्भरी” नाम का अर्थ है ‘शाक’ मतलब शाकाहारी भोजन या सब्जियां की देवी और ‘म्भरी’ का मतलब धारण करने वाली करने वाली माता। पौराणिक कथा के अनुसार, जब पृथ्वी पर 100 वर्ष तक सूखा पड़ा और जल की कमी से जीव-जन्तु कष्ट में थे, तब माँ ने अपने शरीर से शाक (सब्जियाँ) उत्पन्न कर सबको भोजन प्रदान किया था इसलिए उन्हें शाकुम्भरी और शताक्षी (सौ नेत्रों वाली) भी कहा जाता है। माँ शाकुम्भरी को माँ अन्नपूर्णा और वनस्पति देवी के रूप में पूजा जाता हैं। नवरात्रि पर शाकुम्भरी माता की आरती का पाठ करने से लोगों की सभी मनोकामना पूर्ण होते है

शाकुम्भरी माता की आरती हिन्दी में
(Shakambhari Mata ki Aarti in Hindi)

हरी ॐ श्री शाकुम्भरी अम्बा जी की आरती कीजो
ऐसी अदभुत रूप ह्रदय धर लीजो |

शताक्षी दयालु की आरती कीजो
तुम परिपूर्ण आदि भवानी माँ, सब घट तुम आप बखानी माँ |

शाकुम्भरी अम्बा जी की आरती कीजो।

तुम्ही हो शाकुम्भर, तुम ही हो सताक्षी माँ,
शिवमूर्ति माया प्रकाशी माँ |

शाकुम्भरी अम्बा जी की आरती कीजो।

नित जो नर – नारी अम्बे आरती गावे माँ
इच्छा पूर्ण कीजो, शाकुम्भर दर्शन पावे माँ

शाकुम्भरी अम्बा जी की आरती कीजो।

जो नर आरती पढ़े पढावे माँ, जो नर आरती सुनावे माँ,
बस बैकुंठ शाकुम्भर दर्शन पावे |

शाकुम्भरी अंबा जी की आरती कीजो।

शाकुम्भरी माता की आरती इंग्लिश में
(Shakambhari Mata ki Aarti in English)

Hari Om Shri Shakumbhari Amba Ji Ki Aarti Kijo,
Aisi Adbhut Rup Hriday Dhar Lijo.

Shatakshi Dayalu Ki Aarti Kijo,
Tum Paripurna Aadi Bhavani Maa, Sab Ghat Tum Aap Bakhani Maa.

Shakumbhari Amba Ji Ki Aarti Kijo.

Tumhi Ho Shakumbhar, Tum Hi Ho Satakshi Maa,
Shivmurty Maya Prakashi Maa.

Shakumbhari Amba Ji Ki Aarti Kijo.

Nit Jo Nar Naari Ambe Aarti Gaawe Maa,
Ichcha Purn Kijo, Shakumbhar Darshan Paawe Maa.

Shakumbhari Amba Ji Ki Aarti Kijo.

Jo Nar Aarti Padhe Padhawe Maa, Jo Nar Aarti Sunawe Maa,
Bas Baikunth Shakumbhar Darshan Paawe.

Shakumbhari Amba Ji Ki Aarti Kijo.

शाकुम्भरी माता के प्रसिद्ध मंदिर (Shakambhari Mata Famous Temples)

1. शाकुम्भरी माता मंदिर (देहरादून, उत्तराखंड)

  • शाकुम्भरी माता मंदिर उत्तराखंड के देहरादून में झंडा बाजार के पास स्थित यह एक बहुत ही प्राचीन और सिद्ध मंदिर है। स्थानीय लोग और पहाड़ों से आने वाले श्रद्धालु यहाँ बड़ी श्रद्धा से आते हैं।

2. माँ शाकम्भरी देवी मंदिर (हरिद्वार, उत्तराखंड)

  • हरिद्वार के ऋषिकुल देवपुरा क्षेत्र में मुख्य मार्ग पर माता का एक सुंदर मंदिर स्थित है। गंगा स्नान के लिए आने वाले श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन करने अवश्य जाते हैं।

3. कनकदुर्गा मंदिर (विजयवाड़ा, आंध्र प्रदेश)

  • विजयवाड़ा के प्रसिद्ध कनक दुर्गा मंदिर में आषाढ़ मास में तीन दिवसीय ‘शाकम्भरी उत्सव’ मनाया जाता है। इस दौरान पूरी देवी प्रतिमा और गर्भगृह को तरह-तरह की हरी सब्जियों, फलों और पत्तियों से सजाया जाता है, जो देखने योग्य होता है।

4. बनशंकरी अम्मा मंदिर (बदामी, कर्नाटक)

    • माँ शाकुम्भरी को दक्षिण भारत में बनशंकरी या वनशंकरी कहा जाता है क्योंकि यह मंदिर तिलकअरण्य वन में स्थित है। पौराणिक कथा के अनुसार, माता ने इसी क्षेत्र में अकाल के समय अपने शरीर से शाक (सब्जियां) और फल उत्पन्न कर ऋषियों की भूख मिटाई थी। यह मूल रूप से 7वीं शताब्दी का चालुक्य कालीन मंदिर है।

    5. सिद्धपीठ शाकुम्भरी माता मंदिर (सहारनपुर, उत्तर प्रदेश)

    • यह भारत का सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठ है। यह उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले से लगभग 40 किमी दूर बेहट तहसील में शिवालिक पहाड़ियों के बीच स्थित है। यहाँ शाकुम्भरी माता के साथ-साथ भूरा देव (भैरव) का मंदिर भी है। मान्यता है कि शाकुम्भरी देवी के दर्शन करने से पहले भूरा देव के दर्शन करना आवश्यक होता है नवरात्रों में यहाँ भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है

    अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

    • 1. शाकम्भरी माता कौन हैं?
    • शाकम्भरी माता देवी दुर्गा का ही अवतार हैं पुराणों के अनुसार, जब पृथ्वी पर सौ वर्षों का भयंकर सूखा पड़ा था और लोग भूख से मर रहे थे, तब माँ आदिशक्ति ने अवतरित होकर अपने शरीर से फल, फूल और शाक (सब्जियां) उत्पन्न कर सभी की भूख मिटाई थी。
    • 2. शाकंभरी माता का दूसरा नाम क्या था?
    • शाकंभरी देवी को शताक्षी और दुर्गा के नाम से भी जाना जाता है। इसके अलावा उन्हें पोषण देने वाली देवी (अन्नपूर्णा) और सांभवी भी कहा जाता है। 
    • 3. माता शाकम्भरी को ‘शाकम्भरी’ क्यों कहा जाता है?
    • शाकम्भरी का अर्थ: ‘शाक’ मतलब शाकाहारी भोजन या सब्जियां और ‘म्भरी’ का मतलब धारण करने वाली होता है। चूँकि माता सभी को सात्विक और शाकाहारी भोजन प्रदान करने वाली हैं, इसलिए उनका यह नाम पड़ा
    • 4. शाकम्भरी माता का प्रिय भोग क्या है?
    • माता शाकम्भरी को प्रकृति की देवी माना जाता है, इसलिए उन्हें हरी सब्जियों, फलों, और सात्विक (शुद्ध शाकाहारी) व्यंजनों का भोग अत्यंत प्रिय है
    • 5. माता का मुख्य शक्तिपीठ कहाँ स्थित है?
    • माता का मुख्य और सबसे प्राचीन सिद्ध शक्तिपीठ उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में शिवालिक की पहाड़ियों के बीच स्थित है (सहारनपुर शहर से लगभग 40-42 किलोमीटर दूर जसमोरा गाँव के पास) राजस्थान के सांभर में भी माता का एक बहुत प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिर है

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