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आरती (Aarti)

श्री गोरखनाथ आरती (Shri Goraknath Aarti)

जुलाई 19, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

श्री गोरखनाथ आरती: नाथ संप्रदाय के आदि गुरु श्री गोरखनाथ जी योग, सिद्धि और तपस्या के प्रतीक हैं। श्री गोरखनाथ जी नाथ संप्रदाय के संस्थापक और भगवान शिव के अवतार माने जाते हैं। वे मत्स्येंद्रनाथ जी के शिष्य थे। उनका जन्म लगभग 11वीं शताब्दी में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन में अनेक चमत्कार किए और योग-तंत्र की परंपरा को मजबूत बनाया। गोरखपुर शहर का नाम भी श्री गोरखनाथ जी के नाम पर पड़ा है। गोरखनाथ जी को “गोरख देवा”, “योगिराज” और “अवधूत” भी कहा जाता है। उनकी पूजा से भक्तों को सिद्धि, शारीरिक-मानसिक स्वास्थ्य, शत्रु नाश और आध्यात्मिक उन्नति प्राप्त होती है। गोरखपुर में स्थित उनके प्रसिद्ध मंदिर में प्रतिदिन उनकी आरती बड़ी श्रद्धा से की जाती है। श्री गोरखनाथ आरती भक्तों के हृदय में आध्यात्मिक शक्ति, साहस और गुरु भक्ति का संचार करती है। यह आरती केवल पूजा का अंग नहीं, बल्कि गुरु गोरखनाथ की कृपा प्राप्त करने का प्रमुख माध्यम है।

श्री गोरखनाथ आरती हिन्दी में
(Shri Goraknath Aarti in Hindi)

जय गोरख योगी (श्री गुरु जी) हर हर गोरख योगी ।
वेद पुराण बखानत, ब्रह्मादिक सुरमानत, अटल भवन योगी ।
ऊँ जय गोरख योगी ॥

बाल जती ब्रह्मज्ञानी योग युक्ति पूरे (श्रीगुरुजी) योग युक्ति पूरे ।
सोहं शब्द निरन्तर (अनहद नाद निरन्तर) बाज रहे तूरे ।
ऊँ जय गोरख योगी ॥

रत्नजड़ित मणि माणिक कुण्डल कानन में (श्री गुरुजी) कुंडल कानन में
जटा मुकुट सिर सोहत मन मोहत भस्मन्ती तन में ।
ऊँ जय गोरख योगी ॥

आदि पुरुष अविनाशी, निर्गुण गुणराशी (श्री गुरुजी) निर्गुण गुणराशी,
सुमिरण से अघ छूटे, सुमिरन से पाप छूटे, टूटे यम फाँसी ।
ऊँ जय गोरख योगी ॥

ध्यान कियो दशरथ सुत रघुकुल वंशमणी (श्री गुरुजी) रघुकुल वंशमणि,
सीता शोक निवारक, सीता मुक्त कराई, मार्यो लंक धनी ।
ऊँ जय गोरख योगी ॥

नन्दनन्दन जगवन्दन, गिरधर वनमाली, (श्री गुरुजी) गिरधर वनमाली
निश वासर गुण गावत, वंशी मधुर वजावत, संग रुक्मणी बाली ।
ऊँ जय गोरख योगी ॥

धारा नगर मैनावती तुम्हरो ध्यानधरे (श्रीगुरुजी) तुम्हरो ध्यान धरे
अमर किये गोपीचन्द, अमर किये पूर्णमल, संकट दूर करे ।
ऊँ जय गोरख योगी ॥

चन्द्रावल लखरावल निजकर घातमरी, (श्रीगुरुजी) निजकर घातमरी,
योग अमर फल देकर, 2 क्षण में अमर करी ।
ऊँ जय गोरख योगी ॥

भूप अमित शरणागत जनकादिक ज्ञानी, (श्रीगुरुजी)जनकादिक ज्ञानी
मान दिलीप युधिष्ठिर 2 हरिश्चन्द्र से दानी ।
ऊँ जय गोरख योगी ॥

वीर धीर संग ऋद्धि सिद्धि गणपति चंवर करे (श्रीगुरुजी) गणपति चँवर करे
जगदम्बा जगजननी 2 योगिनी ध्यान धरे ।
ऊँ जय गोरख योगी ॥

दया करी चौरंग पर कठिन विपतिटारी (श्रीगुरुजी) कठिन विपतिटारी
दीनदयाल दयानिधि 2 सेवक सुखकारी ।
ऊँ जय गोरख योगी ॥

इतनी श्री नाथ जी की मंगल आरती निशदिन जो गावे (श्रीगुरुजी)
प्रात समय गावे, भणत विचार पद (भर्तृहरि भूप अमर पद)सो निश्चय पावे ।
ऊँ जय गोरख योगी ॥

श्री गोरखनाथ आरती इंग्लिश में
(Shri Goraknath Aarti in English)

Jai Gorakh Yogi (Shri Guru Ji) Har Har Gorakh Yogi ।
Ved Puran Bakhanat, Brahmadik Surmaanat, Atal Bhawan Yogi ।
Omm Jai Gorakh Yogi ॥

Baal Jati Brahmgyani Yog Yukti Poore (Shriguruji) Yog Yukti Poore ।
Sohan Shabd Nirantar (Anhad Naad Nirantar) Baaj Rahe Toore ।
Omm Jai Gorakh Yogi ॥

Ratnjadit Mani Manik Kundal Kanan Mein (Shri Guruji) Kundal Kanan Mein
Jata Mukut Sir Sohat Man Mohat Bhasmanti Tan Mein ।
Omm Jai Gorakh Yogi ॥

Aadi Purush Avinashi, Nirgun Gunrashi (Shri Guruji) Nirgun Gunrashi,
Sumiran Se Agh Chhute, Sumiran Se Paap Chhute, Tute Yam Phaansi ।
Omm Jai Gorakh Yogi ॥

Dhyan Kiyo Dashrath Sut Raghukul Vanshmani (Shri Guruji) Raghukul Vanshmani,
Sita Shok Nivarak, Sita Mukt Karai, Maaryo Lank Dhani ।
Omm Jai Gorakh Yogi ॥

Nandnandan Jagvandan, Girdhar Vanmali, (Shri Guruji) Girdhar Vanmali
Nish Vassar Gun Gavat, Vanshi Madhur Vajavat, Sang Rukmani Baali ।
Omm Jai Gorakh Yogi ॥

Dhara Nagar Mainawati Tumharo Dhyandhare (Shri Guruji) Tumharo Dhyaan Dhare
Amar Kiye Gopichand, Amar Kiye Poornmal, Sankat Door Kare ।
Omm Jai Gorakh Yogi ॥

Chandraval Lakhraval Nijkar Ghatmari, (Shri Guruji) Nijkar Ghaatmari,
Yog Amar Phal Dekar, 2 Kshan Mein Amar Kari ।
Omm Jai Gorakh Yogi ॥

Bhoop Amit Sharanagat Jankadik Gyani, (Shri Guruji)jankadik Gyani
Maan Dilip Yudhishthir 2 Harishchandr Se Daani ।
Omm Jai Gorakh Yogi ॥

Veer Dheer Sang Riddhi Siddhi Ganpati Chanvar Kare (Shri Guruji) Ganapati Chanvar Kare
Jagdamba Jagjanani 2 Yogini Dhyan Dhare ।
Omm Jai Gorakh Yogi ॥

Daya Kari Chaurang Par Kathin Vipatitari (Shri Guruji) Kathin Vipatitari
Deendayal Dayanidhi 2 Sevak Sukhakari ।
Omm Jai Gorakh Yogi ॥

Itni Shri Nath Ji Ki Mangal Aarti Nishdin Jo Gaave (Shri Guruji)
Praat Samay Gaave, Bhanat Vichar Pad (Bhartruhari Bhoop Amar Pad)so Nishchay Paave
Omm Jai Gorakh Yogi ॥

श्री गोरखनाथ जी के प्रसिद्ध मंदिर (Shri Goraknath Famous Temples)

1. श्री गोरखनाथ मंदिर, गोरखपुर (उत्तर प्रदेश)

  • यह नाथ संप्रदाय का सबसे मुख्य और प्रसिद्ध मठ है। संत गोरखनाथ जी ने यहीं राप्ती नदी के तट पर तपस्या की थी यह मंदिर करीब 52 एकड़ में फैला हुआ है। यहाँ हर साल मकर संक्रांति पर ‘खिचड़ी मेला’ का बहुत बड़ा आयोजन किया जाता है। वर्तमान में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इसके मुख्य पीठाधीश्वर (महंत) हैं

2. श्री गुरु गोरक्षनाथ मंदिर गोरख धूना, चंपावत (उत्तराखंड)

  • उत्तराखंड के चंपावत जिले के तल्लादेश क्षेत्र में स्थित यह एक अत्यंत पवित्र और ऐतिहासिक धार्मिक स्थल है मान्यता है कि सतयुग में महायोगी गुरु गोरखनाथ जी ने यहाँ तपस्या की थी। इस स्थान की विशेषता यह है कि यहाँ सतयुग से अनवरत (लगातार) अखंड धूनी जल रही है

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. गुरु गोरखनाथ कौन थे और उनका जन्म कब हुआ था?
  • गुरु गोरखनाथ नाथ संप्रदाय के प्रमुख प्रवर्तक और एक महान सिद्ध संत थे उनके जन्मकाल को लेकर इतिहासकारों में मतभेद है विद्वान उनका समय 11वीं से 14वीं शताब्दी के बीच मानते हैं, जबकि पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार वे अमर हैं और हर युग में प्रकट होते हैं
  • 2. गुरु गोरखनाथ के माता-पिता कौन थे?
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार, उनका जन्म सामान्य माता-पिता से नहीं हुआ था उनके गुरु, मत्स्येंद्रनाथ जी ने एक निःसंतान स्त्री को भभूत दी थी, जिसे अज्ञानतावशा उसने गोबर में फेंक दिया था। 12 वर्ष बाद जब मत्स्येंद्रनाथ जी वहां पहुंचे और उस गोबर के ढेर से आवाज़ लगाई, तो उसमें से 12 वर्षीय तेजस्वी बालक (गोरखनाथ जी) प्रकट हुआ
  • 3. गुरु गोरखनाथ जी का मुख्य मंदिर और समाधि कहाँ है?
  • गुरु गोरखनाथ जी का सबसे प्रसिद्ध और मुख्य मंदिर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में स्थित है। इस स्थान को उनकी तपस्थली और समाधि स्थल माना जाता है। इसके अलावा, भारत और नेपाल में उनके कई मठ और मंदिर मौजूद हैं।
  • 4. गुरु गोरखनाथ द्वारा लिखी गई प्रमुख पुस्तकें कौन सी हैं?
  • गुरु गोरखनाथ जी को कई प्रामाणिक योग ग्रंथों का रचयिता माना जाता है। उनकी प्रमुख रचनाओं में गोरक्ष संहिता, सिद्ध सिद्धांत पद्धति, गोरक्ष गीता और योग बीज शामिल हैं।
  • 5. बाबा गोरखनाथ की पूजा विधि क्या है?
  • सात्विक पूजा: उनकी पूजा बहुत ही सरल और सात्विक होती है। उन्हें मुख्य रूप से रोट (आटे और गुड़ से बना मीठा रोट), खिचड़ी, फल और भभूत चढ़ाई जाती है।
  • मंत्र: उनकी कृपा पाने के लिए भक्त “ॐ शिव गोरक्ष योगीश्वर नमः” या “अलख निरंजन” का जाप करते हैं।

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