श्री झुलेलाल आरती : ये आरती भगवान झूलेलाल जी को समर्पित है। “ॐ जय दूलह देवा” आरती एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है। यह भगवान की पूजा और आराधना का एक तरीका है। यह मन को शांत और शांतिपूर्ण बनाता है। यह भगवान की कृपा प्राप्त करने में मदद करती है। श्री झूलेलाल आरती करने से सारी मनोकामना पूर्ण होती है और उनका आशीष प्राप्त होता है। ये चेटी चंड जैसे त्यौहारों तथा सिंधी समाज के अन्य कार्यक्रमों में सबसे ज्यादा गाई जाने वाली आरती है। भगवान झूलेलाल के प्रत्येक मंदिर में यह आरती सुवह-शाम अवश्य गायी जाती है। भगवान झूलेलाल को लाल साई, उदेरो लाल, वरुण देव, दूलह लाल, दरिया लाल और जिंदा पीर भी कहा जाता है।
श्री झूलेलाल आरती हिन्दी में
(Shri Jhulelal Aarti in Hindi)
ॐ जय दूलह देवा, साईं जय दूलह देवा ।
पूजा कनि था प्रेमी,सिदुक रखी सेवा ॥
तुहिंजे दर दे केई, सजण अचनि सवाली ।
दान वठन सभु दिलि, सां कोन दिठुभ खाली ॥
॥ ॐ जय दूलह देवा…॥
अंधड़नि खे दिनव, अखडियूँ – दुखियनि खे दारुं ।
पाए मन जूं मुरादूं, सेवक कनि थारू ॥
॥ ॐ जय दूलह देवा…॥
फल फूलमेवा सब्जिऊ, पोखनि मंझि पचिन ।
तुहिजे महिर मयासा अन्न, बि आपर अपार थियनी ॥
॥ ॐ जय दूलह देवा…॥
ज्योति जगे थी जगु में, लाल तुहिंजी लाली ।
अमरलाल अचु मूं वटी, हे विश्व संदा वाली ॥
॥ ॐ जय दूलह देवा…॥
जगु जा जीव सभेई, पाणिअ बिन प्यास ।
जेठानंद आनंद कर, पूरन करियो आशा ॥
ॐ जय दूलह देवा, साईं जय दूलह देवा ।
पूजा कनि था प्रेमी, सिदुक रखी सेवा ॥
श्री झूलेलाल आरती इंग्लिश में
(Shri Jhulelal Aarti in English)
Om jai Doolah deva, saain jay duulah devaa .
Puja kani thaa premi,siduk rakhi sevaa ॥
Tuhinje dar de kei, sajaṇ achani savaali .
Daan vaṭhan sabhu dili, saan kon diṭhubh khaali ॥
॥ Om jai Doolah deva…॥
Amdhadani khe dinav, akhaḍiyuun – dukhiyani khe daarun .
Paae man juun muraaduun, sevak kani thaaruu ॥
॥ Om jai Doolah deva…॥
Phal phuulamevaa sabjiuu, pokhani manjhi pachin .
Tuhije mahir mayaasaa ann, bi aapar apaar thiyani ॥
॥ Om jai Doolah deva…॥
Jyoti jage thi jagu men, laal tuhinji laali .
Amaralaal achu muun vaṭi, he vishv sandaa vaali ॥
॥ Om jai Doolah deva…॥
Jagu jaa jiv sabhei, paaṇia bin pyaas .
Jeṭhaanand aanand kar, puuran kariyo aashaa ॥
Om jai Doolah deva, saain jay duulah devaa .
Pujaa kani thaa premi, siduk rakhi sevaa ॥
श्री झूलेलाल जी के प्रसिद्ध मंदिर (Shri Jhulelal Famous Temples)
1. पूज्य ओडेरो लाल मंदिर और दरगाह (सिंध, पाकिस्तान)
- यह भगवान झूलेलाल जी का मूल और विश्व का सबसे ऐतिहासिक मुख्य केंद्र है। मान्यता है कि यहीं पर वे धरती में समाहित हुए थे। यह स्थान सांप्रदायिक सौहार्द का एक अद्भुत उदाहरण है, जहाँ एक ही प्रांगण में हिंदू उन्हें ‘ओडेरो लाल’ या ‘झूलेलाल’ रूप में पूजते हैं और मुस्लिम भाई उन्हें ‘जिंदा पीर’ या ‘शेख ताहिर’ के रूप में सम्मान देते हैं।
2. सिद्ध पीठ श्री झूलेलाल मंदिर, कटनी (मध्य प्रदेश)
- यह मध्य प्रदेश के सबसे प्रसिद्ध और सिद्ध मंदिरों में से एक है। वर्ष 1962 में स्थापित यह मंदिर अपनी अद्भुत वास्तुकला और आध्यात्मिक आभा के लिए जाना जाता है। यहाँ के माधव नगर क्षेत्र में स्थित इस मंदिर में हर दुखियारे की मनोकामना पूरी होने की गहरी मान्यता है।
3. पूज्य श्री झूलेलाल मंदिर, शिर्डी (महाराष्ट्र)
- साईं बाबा की पावन नगरी शिर्डी में भी भगवान झूलेलाल जी का एक बेहद खूबसूरत मंदिर स्थित है। यहाँ के लगभग 100 सिंधी परिवारों और शिर्डी आने वाले सिंधी श्रद्धालुओं द्वारा इस मंदिर की स्थापना की गई थी। साईं दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु यहाँ आकर जल देवता का आशीर्वाद जरूर लेते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1. श्री झूलेलाल जी कौन हैं?
- भगवान झूलेलाल सिंधी हिंदुओं के प्रमुख देवता (इष्ट देव) हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, वे जल के देवता ‘वरुण’ का अवतार हैं।
- 2. उनका नाम ‘झूलेलाल’ कैसे पड़ा?
- जन्म के समय भगवान झूलेलाल जब पालने में लिटाया गया, तो पालना अपने आप झूलने लगा इसलिए उन्हें ‘झूलेलाल’ कहा गया उन्हें उदेरोलाल, अमरलाल, और दरियालाल जैसे नामों से भी जाना जाता है
- 3. भगवान झूलेलाल जी के माता-पिता का नाम क्या था?
- भगवान झूलेलाल का जन्म सिंध के नसुरपुर शहर में रहने वाले एक धर्मपरायण सिंधी लोहाणा परिवार में हुआ था। उनके पिता का नाम रतनचंद शाह और माता का नाम देवकी बाई था।
- 4. झूलेलाल जी की पूजा मुसलमान क्यों करते हैं?
- भगवान झूलेलाल किसी भी तरह के धार्मिक भेदभाव से परे हैं हिंदू उन्हें वरुण का अवतार मानते हैं, जबकि सिंध के मुस्लिम समुदाय में उन्हें ‘ख्वाजा खिज्र’ या ‘जिंदा पीर’ के रूप में सम्मानित किया जाता है ओडेरो लाल (सिंध) में स्थित उनकी दरगाह दोनों समुदायों द्वारा पूजी जाती है
- 5. झूलेलाल जयंती कब और क्यों मनाई जाती है?
- भगवान झूलेलाल का जन्म सिंध (वर्तमान पाकिस्तान) में विक्रम संवत 1007 के दौरान चैत्र शुक्ल द्वितीया को हुआ था इस पावन तिथि को सिंधी समुदाय ‘चेती चंद’ के रूप में नए साल और झूलेलाल के जन्मोत्सव के तौर पर बहुत धूमधाम से मनाता है
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