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आरती (Aarti)

श्री कृष्ण भोग आरती (Shri Krishna Bhog Aarti)

जुलाई 18, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

श्री कृष्ण भोग आरती: हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण को प्रेम, करुणा, धर्म और भक्ति का प्रतीक माना जाता है। उनकी पूजा-अर्चना में भोग अर्पित करने की परंपरा का विशेष महत्व है। भोग आरती का अर्थ है भगवान को भोजन अर्पित करने के बाद उनकी आराधना करना। सनातन परंपरा में यह माना जाता है कि जो भी भोजन भगवान को समर्पित किया जाता है, वह प्रसाद बनकर भक्तों के जीवन में शुभता और पवित्रता लाता है। भक्तों का विश्वास है कि सच्चे मन से श्री कृष्ण भोग आरती का पाठ करने से भगवान श्रीकृष्ण प्रसन्न होते हैं और अपने भक्तों पर कृपा बरसाते हैं। इससे परिवार में सुख, शांति, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

श्री कृष्ण भोग आरती हिन्दी में
(Shri Krishna Bhog Aarti
in Hindi)

आओ भोग लगाओ मेरे मोहन

दुर्योधन को मेवा त्यागो,
साग विदुर घर खायो प्यारे मोहन,
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन.

भिलनी के बैर सुदामा के तंडुल
रूचि रूचि भोग लगाओ प्यारे मोहन,
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन.

वृदावन की कुञ्ज गली मे,
आओं रास रचाओ मेरे मोहन,
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन.

राधा और मीरा भी बोले,
मन मंदिर में आओ मेरे मोहन,
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन.

गिरी, छुआरा, किशमिश मेवा,
माखन मिश्री खाओ मेरे मोहन,
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन.

सत युग त्रेता दवापर कलयुग,
हर युग दरस दिखाओ मेरे मोहन,
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन.

जो कोई तुम्हारा भोग लगावे
सुख संपति घर आवे प्यारे मोहन,
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन.

ऐसा भोग लगाओ प्यारे मोहन
सब अमृत हो जाये प्यारे मोहन,
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन.

जो कोई ऐसा भोग को खावे
सो त्यारा हो जाये प्यारे मोहन,
आओ भोग लगाओ मेरे मोहन.

आओ भोग लगाओ मेरे मोहन

श्री कृष्ण भोग आरती इंग्लिश में
(Shri Krishna Bhog Aarti
in English)

Aao Bhog Lagao Mere Mohan

Duryodhan ko mewa tyaago,
Saaga Vidur ghar khayo pyare Mohan,
Aao Bhog Lagao Mere Mohan.

Bhilanie ke bair Sudama ke tandul,
Ruchi ruchi bhog lagawo pyare Mohan,
Aao Bhog Lagao Mere Mohan.

vrdaavan kee kunj galee me,
aaon raas rachao mere mohan,
Aao Bhog Lagao Mere Mohan.

raadha aur meera bhee bole,
man mandir mein aao mere mohan,
Aao Bhog Lagao Mere Mohan.

giree, chhuaara, kishamish meva,
maakhan mishree khao mere mohan,
Aao Bhog Lagao Mere Mohan.

sat yug treta davaapar kalayug,
har yug daras dikhao mere mohan,
Aao Bhog Lagao Mere Mohan.

Jo koyee tumhara bhoag lagawe,
Sukh sampattie ghar aaway pyare Mohan,
Aao Bhog Lagao Mere Mohan.

Aisa bhoag lagawo pyare Mohan,
Sab amrit ho jayay pyare Mohan,
Aao Bhog Lagao Mere Mohan.

Jo koyee aisa bhoag ko khaawe,
So tayra ho jayay pyare Mohan,
Aao Bhog Lagao Mere Mohan.

Aao Bhog Lagao Mere Mohan

श्री कृष्ण जी के प्रसिद्ध मंदिर (Shri Krishna Famous Temples)

1. द्वारकाधीश मंदिर , गुजरात

  • देशभर में देवी-देवताओं को समर्पित कई ऐसे मंदिर हैं, जो अपने रहस्य या अन्य कारण से प्रसिद्ध हैं। इनमें गुजरात के द्वारका में स्थित भगवान श्रीकृष्ण को समर्पित द्वारकाधीश मंदिर है। धार्मिक मान्यता है कि द्वापर युग के दौरान द्वारकाधीश मंदिर के स्थान पर भगवान कृष्ण का निवास स्थल था, जिसे हरि गृह के नाम से जाना जाता था। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा विराजमान है, लेकिन उनकी आंखे बंद हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वह सुदामा की गरीबी को नहीं देख सकते थे। ऐसा कहा जाता है कि द्वारका छह बार समुद्र में डूबी थी और अब हम जो देख रहे हैं वह उसका सातवाँ अवतार है। मूल संरचना को महमूद बेगड़ा ने 1472 में नष्ट कर दिया था, और बाद में 15वीं-16वीं शताब्दी में इसका पुनर्निर्माण किया गया था। 8वीं शताब्दी के हिंदू धर्मशास्त्री और दार्शनिक आदि शंकराचार्य ने भी इसकी पूजा की थी।

2. प्रेम मंदिर, वृंदावन

  • प्रेम मंदिर, वृंदावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश में स्थित एक अद्भुत मंदिर है। यह राधा कृष्ण को समर्पित है। इस मंदिर का निर्माण जगद्गुरु श्री कृपालु जी महाराज ने 14 जनवरी 2001 में करवाया था । ईस विशेष दिन पर हजारों भक्त उपस्थित थे। लगभग 1,000 कुशल कारीगरों की मदद से मंदिर के निर्माण में लगभग 12 वर्ष लगे। यह मंदिर परिसर 22 हेक्टेयर (55 एकड़) में फैला है। यह पूरी तरह से इतालवी संगमरमर से बना है और इसकी दीवारें श्री कृष्ण और रसिक संतों के जीवन के दृश्यों से सजी हैं। मंदिर सुंदर उद्यानों और फव्वारों से घिरा हुआ है। इसमें श्री कृष्ण के जीवन की चार महत्वपूर्ण घटनाओं – झूलन लीला, गोवर्धन लीला, रास लीला और कालिया नाग लीला – का आदमकद प्रदर्शन भी हैं।

3. बाँके बिहारी मंदिर , उत्तर प्रदेश

  • बाँके बिहारी मंदिर उत्तर प्रदेश के मथुरा के वृंदावन में स्थित है, जहाँ भगवान श्री कृष्ण और राधा की एकीकृत स्वरूप की पूजा होती है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण के बाल स्वरूप की पूजा की जाती है। मंदिर का इतिहास 19वीं शताब्दी का है जब इसका निर्माण वर्ष 1864 में हुआ था। यह मंदिर महान संत और कवि स्वामी हरिदास से जुड़ा हुआ है, जो भगवान कृष्ण के अनन्य भक्त थे। माना जाता है कि भगवान कृष्ण ने स्वामी हरिदास को आशीर्वाद दिया और उन्हें बांके बिहारी की मूर्ति प्रदान की थी जिसे बाद बाँके बिहारी मंदिर में मूर्ति की प्रतिष्ठित किया गया।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. श्री कृष्ण कौन हैं?
  • श्री कृष्ण, सनातन धर्म में पालनकर्ता भगवान विष्णु के आठवें अवतार और सृष्टि के संचालक हैं। ‘कृष्ण’ शब्द का संस्कृत में अर्थ है- “जो सबको अपनी ओर आकर्षित करे”। उन्हें पूर्ण पुरुषोत्तम और प्रेम, ज्ञान व योग के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है।
  • 2. श्री कृष्ण के गुरु कौन थे?
  • श्री कृष्ण और उनके बड़े भाई बलराम के गुरु महर्षि सांदीपनि थे। उनका आश्रम उज्जैन (मध्य प्रदेश) में था। श्री कृष्ण ने केवल 64 दिनों में 64 कलाओं और 14 विद्याओं का ज्ञान प्राप्त कर लिया था
  • 3.क्या राधा और कृष्ण की शादी हुई थी?
  • पौराणिक कथाओं के अनुसार, राधा और कृष्ण का प्रेम अलौकिक और आध्यात्मिक भक्ति का प्रतीक है, लेकिन उनका विवाह नहीं हुआ था। कृष्ण का विवाह रुक्मिणी, सत्यभामा और अन्य रानियों से हुआ था।
  • 4. कृष्ण जी की कुल कितनी पत्नियाँ थीं?
  • शास्त्रों के अनुसार, भगवान कृष्ण की 16,108 पत्नियाँ थीं। इनमें 8 उनकी प्रमुख पटरानियाँ थीं (जैसे रुक्मिणी)। बाकी 16,100 वे महिलाएं थीं जिन्हें कृष्ण ने नरकासुर नामक असुर की कैद से मुक्त कराया था और समाज में उन्हें सम्मान दिलाने के लिए उनसे विवाह किया था।
  • 5. द्वारका का क्या रहस्य है?
  • द्वारका श्री कृष्ण की बसाई हुई नगरी थी। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, महाभारत युद्ध के 36 वर्ष बाद द्वारका नगरी समुद्र में डूब गई थी। हाल के पुरातात्विक सर्वेक्षणों में समुद्र के भीतर प्राचीन नगरी के अवशेष मिले हैं, जो इसकी ऐतिहासिकता को प्रमाणित करते है
  • 6. सुदर्शन चक्र का क्या रहस्य है?
  • सुदर्शन चक्र भगवान विष्णु का अचूक अस्त्र है, जिसे श्री कृष्ण भी धारण करते थे। यह ब्रह्मांड का सबसे शक्तिशाली अस्त्र माना जाता है। इसे भगवान शिव ने देवताओं के कल्याण के लिए विष्णु जी को दिया था। यह लक्ष्य को नष्ट करके हमेशा वापस लौट आता है

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