ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
एक ही जगह: आरती, चालीसा, व्रत, कथा, मंदिर, पंचांग, ग्रंथ और उपयोगी धार्मिक जानकारी।
होम आरती (Aarti) शनिदेव आरती (Shri Shanidev Aarti – Jai Shani Dev)  
आरती (Aarti)

शनिदेव आरती (Shri Shanidev Aarti – Jai Shani Dev)  

जुलाई 19, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

शनिदेव आरती : ये आरती भगवान शनि देव जी को समर्पित है। इन्हें सूर्य पुत्र, शनैश्चर, कर्मफल दाता और दण्डनीति के देवता कहा जाता है। भगवान शनिदेव को नवग्रहों में सबसे शक्तिशाली और न्यायप्रिय ग्रह माना जाते हैं। शनिदेव सूर्य देव और छाया (संज्ञा) के पुत्र हैं। जन्म के समय भगवान शनिदेव की दृष्टि इतनी प्रचंड थी कि सूर्य देव भी प्रभावित हो गए थे। शनिदेव ने भगवान राम और कृष्ण को भी अपनी दृष्टि का प्रभाव दिखाया था। महाभारत और पुराणों में शनिदेव को कर्मफल का सबसे सख्त न्यायाधीश माना गया है। शनिदेव को साढ़े साती (7.5 वर्ष) और ढैय्या (2.5 वर्ष) का प्रभाव देने वाले ग्रह के रूप में जाना जाता है। लेकिन जो भक्त सच्ची श्रद्धा से शनिदेव आरती का पाठ करता है और उनकी पूजा करते हैं, उन्हें शनिदेव रक्षा प्रदान करते हैं। शनिवार व्रत , और शनिदेव मदिरों में ईस आरती का पाठ करने से भगवान शनि देव की विशेष कृपा प्राप्त होते है

शनिदेव आरती हिन्दी में
(Shri Shanidev Aarti – Jai Shani Dev in Hindi)

जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा ।

अखिल सृष्टि में कोटि-कोटि जन, करें तुम्हारी सेवा ।

जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा ॥

जा पर कुपित होउ तुम स्वामी, घोर कष्ट वह पावे ।

धन वैभव और मान-कीर्ति, सब पलभर में मिट जावे ।

राजा नल को लगी शनि दशा, राजपाट हर लेवा ।

जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा ॥

जा पर प्रसन्न होउ तुम स्वामी, सकल सिद्धि वह पावे ।

तुम्हारी कृपा रहे तो, उसको जग में कौन सतावे ।

ताँबा, तेल और तिल से जो, करें भक्तजन सेवा ।

जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा ॥

हर शनिवार तुम्हारी, जय-जय कार जगत में होवे ।

कलियुग में शनिदेव महात्तम, दु:ख दरिद्रता धोवे ।

करू आरती भक्ति भाव से, भेंट चढ़ाऊं मेवा ।

जय शनि देवा, जय शनि देवा, जय जय जय शनि देवा ॥

शनिदेव आरती इंग्लिश में
(Shri Shanidev Aarti – Jai Shani Dev in English)

Jai Shani Deva, Jai Shani Deva, Jai Jai Jai Shani Deva ।

Akhil Srishti Mein Koti-koti Jan, Karen Tumhari Seva ।

Jai Shani Deva, Jai Shani Deva, Jai Jai Jai Shani Deva ॥

Ja Par Kupit Hou Tum Swami, Ghor Kasht Vah Pave ।

Dhan Vaibhav Aur Maan-kirti, Sab Palbhar Mein Mit Jave ।

Raja Nal Ko Lagi Shani Dasha, Rajpat Har Leva ।

Jai Shani Deva, Jai Shani Deva, Jai Jai Jai Shani Deva ॥

Ja Par Prasann Hou Tum Swami, Sakal Siddhi Vah Pave ।

Tumhari Kripa Rahe to, Usko Jag Mein Kaun Satave ।

Tanba, Tel Aur Til Se Jo, Karen Bhaktajan Seva ।

Jai Shani Deva, Jai Shani Deva, Jai Jai Jai Shani Deva ॥

Har Shanivar Tumhari, Jai-jai Kar Jagat Mein Hove ।

Kaliyug Mein Shanidev Mahattam, Du:Kh Daridrata Dhove ।

Karu Arti Bhakti Bhav Se, Bhent Chadhaun Meva ।

Jai Shani Deva, Jai Shani Deva, Jai Jai Jai Shani Deva ॥

शनिदेव के प्रसिद्ध मंदिर (Shanidev Famous Temples)

1. शनि शिंगणापुर (महाराष्ट्र)

  • अहमदनगर जिले में स्थित यह दुनिया का सबसे प्रसिद्ध और प्रमुख शनि मंदिर है यहाँ शनि देव की प्रतिमा बिना किसी छत के, खुले आसमान के नीचे एक काले पत्थर के रूप में स्थापित है। इस गाँव की सबसे अनूठी बात यह है कि यहाँ किसी भी घर या दुकान में दरवाजे और ताले नहीं हैं। मान्यता है कि स्वयं शनिदेव गाँव की रक्षा करते हैं

2. श्री शनिधाम मंदिर (नई दिल्ली)

  • छतरपुर के पास असोला में स्थित यह मंदिर देश के सबसे भव्य शनि मंदिरों में से एक है यहाँ शनि देव की दुनिया की सबसे ऊंची (लगभग 21 फीट) प्राकृतिक चट्टान की मूर्ति स्थापित है। मंदिर का मुख्य आकर्षण यहाँ का प्राकृतिक रूप से बना तेल का कुंड है।

3. शनिदेव मंदिर, खजुराहो (मध्य प्रदेश)

  • विश्व प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो के पास लवकुशनगर क्षेत्र में यह पौराणिक मंदिर स्थित है। इस मंदिर की शनि प्रतिमा को बहुत ही जाग्रत और चमत्कारी माना जाता है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, यहाँ आकर जो भी भक्त सच्चे मन से सरसों के तेल का दीपक जलाता है, उसके जीवन की सभी आर्थिक और मानसिक बाधाएं दूर हो जाती हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. शनि देव कौन हैं?
  • हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, शनि देव सूर्य और देवी छाया (सवर्णा) के पुत्र हैं। वे यमराज के भाई हैं और उन्हें नवग्रहों में सबसे शक्तिशाली और न्यायपूर्ण देवता माना जाता है।
  • 2. शनि देव को कौन सा भोग प्रिय है?
  • शनि देव को उड़द की दाल की खिचड़ी, मीठी पूरी और सरसों के तेल में पका हुआ भोजन अर्पित किया जाता है।
  • 3.शनि देव की पूजा के लिए कौन सा दिन और रंग शुभ है?
  • शनि देव की पूजा के लिए शनिवार का दिन समर्पित है। इस दिन काला या गहरे नीले रंग के कपड़े पहनना बहुत शुभ माना जाता है।
  • 4. साढ़े साती (Sade Sati) क्या होती है?
  • जब शनि देव किसी व्यक्ति की चंद्र राशि (जन्म राशि) के पहले भाव, जन्म राशि और उसके बाद वाले भाव में गोचर करते हैं, तो उस साढ़े सात साल की अवधि को ‘साढ़े साती’ कहते हैं। यह जीवन में अनुशासन और कर्मों का लेखा-जोखा देने वाला समय माना जाता है।
  • 5. शनि देव को तेल क्यों चढ़ाया जाता है?
  • रामायण काल की कथा के अनुसार, जब हनुमान जी ने लंका में शनि देव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, तब शनि देव के शरीर में बहुत पीड़ा हो रही थी। हनुमान जी ने उनके घावों पर सरसों का तेल लगाया, जिससे उन्हें तुरंत आराम मिला। तब से प्रसन्न होकर शनि देव ने कहा कि जो भी मुझे सच्चे मन से तेल अर्पित करेगा, उसे कष्टों से मुक्ति मिलेगी।

You can download Complete Shri Shanidev Aarti – Jai Shani Dev in PDF Format in Hindi

आप सम्पूर्ण शनिदेव आरती हिंदी मे यहाँ से डाउनलोड कर सकते है

You can download Complete Shri Shanidev Aarti – Jai Shani Dev in PHOTO

आप सम्पूर्ण शनिदेव आरती हिंदी में फोटो मे यहाँ से डाउनलोड कर सकते है

You can also read Shri Shanidev Aarti – Jai Shani Dev Lyrics in English

In-Content Ad / Sponsor Slot