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आरती (Aarti)

युगलकिशोर की कीजै आरती (Yugal Kishore ki Keejai Aarti)

जुलाई 18, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

युगलकिशोर की कीजै आरती: भगवान श्रीकृष्ण और श्री राधा को समर्पित ये एक अत्यंत लोकप्रिय और भक्तिमय आरती है। यह आरती विशेष रूप से वैष्णव परंपरा में गाई जाती है और भक्तों को राधा-कृष्ण की दिव्य प्रेम लीला का स्मरण कराती है। “युगलकिशोर” शब्द का अर्थ है राधा और कृष्ण का दिव्य युगल स्वरूप, जो प्रेम, भक्ति और आध्यात्मिक आनंद का प्रतीक माना जाता है। युगलकिशोर की कीजै आरती के माध्यम से भक्त अपने आराध्य के प्रति श्रद्धा, प्रेम और समर्पण प्रकट करते हैं।

युगलकिशोर की कीजै आरती हिन्दी में
(Yugal Kishore ki Keejai Aarti
in Hindi)

आरती युगलकिशोर की कीजै ।
तन मन धन न्योछावर कीजै ॥

गौरश्याम मुख निरखन लीजै ।
हरि का रूप नयन भरि पीजै ॥

रवि शशि कोटि बदन की शोभा ।
ताहि निरखि मेरो मन लोभा ॥

ओढ़े नील पीत पट सारी ।
कुंजबिहारी गिरिवरधारी ॥

फूलन सेज फूल की माला ।
रत्न सिंहासन बैठे नंदलाला ॥

कंचन थार कपूर की बाती ।
हरि आए निर्मल भई छाती ॥

श्री पुरुषोत्तम गिरिवरधारी ।
आरती करें सकल नर नारी ॥

नंदनंदन बृजभान किशोरी ।
परमानंद स्वामी अविचल जोरी ॥

युगलकिशोर की कीजै आरती इंग्लिश में
(Yugal Kishore ki Keejai Aarti
in English)

Aarti Yugalkishor Ki Kijiye।
Tan Man Dhan Nayochawar Kijiye॥

Gorshyam Mukh Nirkhan Lijiye।
Hari Ka Rup Nayan Bhari Pijiye॥

Ravi Shashi Koti Badan Ki Shobha।
Tahi Nirkhi Mero Mann Lobha॥

Odhe Neel Peet Pat Sari।
Kunjbihari Girivardhari॥

Fulan Sej Phul Ki Mala।
Ratan Singhasan Baatai Nandlal॥

Kanchan Thar Kapoor Ki Baati।
Hari Aae Nirmal Bhai Chati॥

Sri Purushotam Girivardhari।
Aarti Kare Sakal Nar Nari॥

Nandnandan Brijbhan Kishori।
Parmanand Sawami Avichal Jori॥

श्री युगलकिशोर जी के प्रसिद्ध मंदिर (Shri Yugal Kishore Famous Temples)

1. श्री युगल किशोर मंदिर, वृंदावन (उत्तर प्रदेश)

  • श्री युगल किशोर जी मंदिर वृंदावन के सबसे प्राचीन और ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण ‘सप्त देवालयों’ में से एक है यमुना नदी के पावन तट पर स्थित यह मंदिर अपनी अनूठी वास्तुकला, समृद्ध इतिहास और धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। मान्यता है कि संवत 1620 में प्रसिद्ध संत श्री हरिराम व्यास जी को भगवान जुगल किशोर के मूल विग्रह वृंदावन के किशोर वन में स्थित एक कुएं (युगल कूप) से प्राप्त हुए थे । इस भव्य लाल बलुआ पत्थर के मंदिर का निर्माण 1627 ईस्वी में ओरछा के राजा मधुकर शाह के परिवार द्वारा कराया गया था। यह का वातावरण शाम के समय बेहद दिव्य हो जाता है, जब यहाँ आने वाले श्रद्धालु प्रसिद्ध यमुना आरती का आनंद लेते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. श्री युगलकिशोर जी कौन हैं?
  • श्री युगलकिशोर जी, हिंदू धर्म में भगवान श्रीकृष्ण और श्री राधा रानी के संयुक्त (युगल) स्वरूप का नाम है वृन्दावन की लीलाओं में इस युगल रूप का विशेष महत्व है
  • 2. भारत में श्री युगलकिशोर का मुख्य मंदिर कहाँ स्थित है?
  • श्री युगलकिशोर जी का सबसे प्रसिद्ध और ऐतिहासिक मंदिर मध्य प्रदेश के पन्ना जिले में स्थित है। इसके अलावा, उत्तर प्रदेश के वृन्दावन में भी जुगल घाट के पास प्रसिद्ध युगलकिशोर मंदिर है।
  • 3. युगलकिशोर जी की मूल मूर्ति कहाँ प्रकट हुई थी?
  • यह दिव्य प्रतिमा वि. सं. 1620 की माघ शुक्ल एकादशी को वृन्दावन के किशोरवन नामक स्थान पर स्वामी हरिराम व्यास जी को प्राप्त हुई थी। उन्होंने ही सर्वप्रथम इसे प्रतिष्ठित किया था।
  • 4. भगवान युगलकिशोर जी के वस्त्रों और आभूषणों की क्या विशेषता है?
  • भगवान कृष्ण और राधा रानी की पोशाक और उनके आभूषण पूरी तरह से लोक शैली को दर्शाते हैं। उनके मुकुट और आभूषणों में पन्ना की खदानों के बेशकीमती हीरे जड़े हुए हैं।
  • 5. श्री युगलकिशोर जी की पूजा कैसे की जाती है?
  • उनकी पूजा में राधा-कृष्ण की मूर्ति को फूलों, तुलसी पत्र और चंदन से सजाया जाता है। उन्हें माखन, दूध और मिठाइयों का भोग लगाया जाता है। फिर ‘युगल किशोर की कीजै’ आरती गाकर उनकी पूजा की जाती है । ये आरती उनका सबसे लोकप्रिय स्तुति गान है।

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