ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
एक ही जगह: आरती, चालीसा, व्रत, कथा, मंदिर, पंचांग, ग्रंथ और उपयोगी धार्मिक जानकारी।
होम धार्मिक स्थल 108 फीट संकट मोचन धाम, दिल्ली (108 Feet Sankat Mochan Dham, Delhi)- ज्ञान की बातें
धार्मिक स्थल

108 फीट संकट मोचन धाम, दिल्ली (108 Feet Sankat Mochan Dham, Delhi)- ज्ञान की बातें

अप्रैल 2, 2026 अमित भारद्वाज 0 comments

करोल बाग हनुमान मंदिर, दिल्ली का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जिसमें हनुमान जी की108 फीट ऊंची मूर्ति स्थापित है। इस मंदिर को संकट मोचन धाम व झंडेवालान मंदिर के नाम से जाना जाता है। इसका विशाल प्रांगण और आध्यात्मिक माहौल यहां के भक्तों को प्रभावित करता है। यहां विभिन्न हिंदू देवी-देवताओं की सुंदर मूर्तियां हैं, जिनमें भगवान हनुमान की 108 फीट ऊंची प्रतिमा भी शामिल है, जो दर्शनीय स्थलों को शांतिपूर्ण और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करती हैं। मंदिर अपनी कलात्मकता और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे शांति और आध्यात्मिक जुड़ाव की तलाश करने वाले भक्तों के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है।

संकट मोचन धाम मंदिर का इतिहास

मंदिर की मान्यता है कि इस जगह पर कभी एक छोटी हनुमान मूर्ति हुआ करती थी। एक बार स्व. नाग बाबा सेवागीर जी महाराज यहां तपस्या कर रहे थे, तभी भगवान हनुमान जी उनके सामने प्रकट हुए। हनुमान जी ने सपने में आकर उनसे अपनी एक बड़ी मूर्ति वहां स्थापित करने की इच्छा व्यक्त की। इस सपने को देखने के बाद, उन्होंने इस जगह पर हनुमान मंदिर का निर्माण करने का निर्णय लिया। यह मंदिर वर्ष 1994 में बनना शुरू हुआ और लगभग 13 साल में बनकर तैयार हुआ।

संकट मोचन धाम मंदिर के खुलने और बंद होने का समय

सुबह : 6:00 – 1:00 बजे

शाम : 4:00 बजे तक विश्राम के लिए बंद रहता है

शाम : 4: 00 – 10:00 बजे तक  (मंगलवार, शनिवार और रविवार को यह पूरे दिन खुला रहता है।)

संकट मोचन धाम मंदिर पूजा का समय

सुबह की आरती: 6:00 – 6:30 बजे

शाम की आरती:  7:00 – 8:00 बजे तक

संकट मोचन धाम मंदिर की वास्तुकला

संकटमोचन मंदिर की कला, को इंजीनियरिंग और तकनीक का सुंदर उदाहरण माना जाता है। इसमें जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी की तरह एक गुफा है। इस गुफा में माता वैष्णो देवी की पिंडी है और गंगा नदी के रूप में यहां पानी बहता रहता है। मंदिर का प्रवेश द्वार एक राक्षस के खुले मुंह जैसा दिखता है। मूर्ति के चरणों के बगल में, देवी काली को समर्पित एक मंदिर भी बना हुआ है। इस मंदिर में मंगलवार और शनिवार को भक्तों की सबसे ज्यादा भीड़ होती है। हनुमान जयंती के दिन हनुमान मंदिर दिल्ली का सबसे व्यस्त मंदिर होता है। इसके साथ ही अन्य त्यौहार जैसे रामनवमी, शिवरात्रि, जन्माष्टमी को भी इस मंदिर में बड़े उल्लास के साथ मनाया जाता है। मंगलवार और शनिवार को यहां भव्य आरती होती है। शाम की आरती के दौरान, बड़ी संख्या में भक्त हनुमान जी के इस सुंदर दृश्य को देखने के लिए इकट्ठा होते है।

संकट मोचन धाम मंदिर कथा

कई वर्ष पूर्व गंगा सहाय मीणा नाम का ग्वाला अपनी गाय को बेचने हेतु गाय के मेले में गया। वहां पर उसकी गाय रस्सी छुड़ाकर भाग गई। कई जगह देखने पर भी उसे अपनी गाय नहीं मिली। इससे वह बहुत दुखी हो गया क्योंकि वह बहुत गरीब ग्वाला था। अपनी गाय की खोज में वह जंगल-जंगल भटक रहा था। तभी उसकी नजर पत्तों से ढके हुए एक स्थल पर पड़ी। उसने उस जगह की साफ सफाई की , पत्ते हटाए, तो वहां पर उसे पत्तों से ढकी हुई हनुमान जी की मूर्ति दिखाई थी। उसने वहां पर बड़ी श्रद्धा से हनुमान जी से प्रार्थना की, कि वह बहुत ही निर्धन परिवार से है और यह सोचकर यहां पर आया था की गाय को बेचकर कुछ पैसे प्राप्त होंगे, जिससे वह अपने परिवार का लालन पालन कर पाएगा। परंतु गाय खो जाने के कारण वह बहुत ही परेशान होकर हनुमान जी से श्रद्धा पूर्वक प्रार्थना करने लगा और कहने लगा ‘हे हनुमान जी आप मेरी गाय को मुझसे मिला दीजिए, अगर मुझे मेरी गाय फ़िर से मिल जाएगी तो मैं आपके यहां भोग लगाऊंगा। यह कहकर जैसे ही वह उस स्थल से नीचे उतरा तो उन्हें अपनी गाय नीचे खड़ी हुई मिली। वह बहुत खुश हुआ और ग्यारस के दिन उसने हनुमान जी के भोग लगाया तथा प्रण किया की हर महीने की ग्यारस को वह यहां आकर हनुमान जी के भोग लगाएगा। इसी क्रम में अन्य ५-६ लोग भी इसमें शामिल हो गए। इस प्रकार धीरे धीरे मंदिर का विकास प्रारंभ होने लगा।

दूसरी कथा के अनुसार 

1560 के आसपास यहां के जंगलों में गोस्वामी तुलसीदास भक्त‍ों के बीच राम की स्तुती करते थे। उनको सुनने के लिए एक कुष्ट रोगी भी रोज आता था और सबसे पीछे बैठ जाता था। एक बार तुलसीदास ने उस रोगी के पास जाने की कोशि‍श की, लेकिन वह वहां से निकल गया। पीछा करते हुए तुलसीदास वन में पहुंचे और उसके पैर पड़क बोल पड़े- प्रभु दर्शन दीजिए। उन्होंने जिस स्थान पर प्रभु का पैर पकड़ा उस स्थान पर आज भी हनुमान जी मूर्ति स्थापित है। तुलसीदास ने अपने इसी हनुमान का नाम संकटमोचन रखा।

कैसे पहुंचे मंदिर

मेट्रो का सफर – करोल बाग मेट्रो स्टेशन और झंडेवाला मेट्रो स्टेशन के बीच में ये मंदिर है। झंडेवाला मेट्रो स्टेशन मंदिर के सबसे नजदीक है। यहां जाने के लिए आपको ब्लू लाइन मेट्रो लेनी होगी।

बस से सफर – झंडेवाला बस स्टॉप पर उतरकर आप प्राइवेट टैक्सी या ऑटो लेकर मंदिर तक पहुंच सकते हैं। ये मंदिर सड़क के किनारे बना हुआ है, इसलिए यहां पार्किंग की सुविधा नहीं है।

ज्वाला जी से लाई गई अखंड ज्योत

मंदिर में जल रही अखंड ज्योत के बारे में कहा जाता है कि 30 सितंबर 2006 को ब्रह्मलीन नाग बाबा हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के ज्वाला जी मंदिर से पवित्र अखंड ज्योति को इस मंदिर में लेकर आए थे। इसके बाद से अभी तक ये ज्योति लगातार मंदिर में जल रही है। यहां पर हर साल 25 जनवरी के दिन मंदिर में भंडारा होता है।

निष्कर्ष

संकट मोचन धाम मंदिर दिल्ली सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उन भक्तों के लिए आशा का केंद्र है जो जीवन के किसी भी संकट से गुजर रहे हैं। 108 फुट ऊंचे हनुमान जी के दर्शन मात्र से मन में नई ऊर्जा और विश्वास का संचार होता है। अगर आप दिल्ली में हैं या यहां घूमने आए हैं, तो एक बार जरूर इस पावन धाम में दर्शन करें। जय बजरंग बली – संकट मोचन हनुमान जी की कृपा से जीवन के सभी संकट दूर  होते है और सुख-शांति बनी रहे। हमारी वेबसाईट ज्ञान की बातें पर अधिक पढ़ें: https://www.gyankibaatein.comजय श्री राम | जय हनुमान

In-Content Ad / Sponsor Slot