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आरती (Aarti)

रामचन्द्र जी की आरती (Ramchandra Ji Ki Aarti)

जुलाई 19, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

रामचन्द्र जी की आरती: ये आरती श्री रामचन्द्र जी को समर्पित है। भगवान रामचंद्र जी हिंदू धर्म के सर्वोच्च और सबसे लोकप्रिय देवता हैं। वे भगवान विष्णु के सातवें अवतार माने जाते हैं। उन्हें आदर्श पुत्र, आदर्श पति, आदर्श राजा और धर्म रक्षक मर्यादा पुरुषोत्तम, कहा जाता है। क्योंकि उन्होंने जीवन में धर्म, कर्तव्य, सत्य और मर्यादा का आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया। राम नवमी, दीपावली और विजय दशमी पर रामचंद्र जी की आरती का पाठ करने से श्री राम और माता सीता की विशेष कृपा प्राप्त होती है

रामचन्द्र जी की आरती हिन्दी में
(Ramchandra Ji Ki Aarti
in Hindi)

आरती कीजै श्री रघुवर जी की,
सत चित आनन्द शिव सुन्दर की॥

दशरथ तनय कौशल्या नन्दन,
सुर मुनि रक्षक दैत्य निकन्दन॥

अनुगत भक्त भक्त उर चन्दन,
मर्यादा पुरुषोत्तम वर की॥

निर्गुण सगुण अनूप रूप निधि,
सकल लोक वन्दित विभिन्न विधि॥

हरण शोक-भय दायक नव निधि,
माया रहित दिव्य नर वर की॥

जानकी पति सुर अधिपति जगपति,
अखिल लोक पालक त्रिलोक गति॥

विश्व वन्द्य अवन्ह अमित गति,
एक मात्र गति सचराचर की॥

शरणागत वत्सल व्रतधारी,
भक्त कल्प तरुवर असुरारी॥

नाम लेत जग पावनकारी,
वानर सखा दीन दुख हर की॥

रामचन्द्र जी की आरती इंग्लिश में
(Ramchandra Ji Ki Aarti
in English)

Aarti Ki Jai Shri Raghubarji Ki।
Sat Chit Anand Shiv Sundar Ki॥

Dashrath-tanay Kaushila-nandan।
Sur-muni-rakshak Daitya-nikandhan॥

Anugath-bhagkt Bhagkt-ur-chandan।
Mariyada-purushotam Var Ki॥

Nirgun-sagun Aroop-roopnidhi।
Sakal Lok-vandhit Vibhinna Vidhi॥

Haran Shok-bhay, Dayak Sab Sidhi।
Mayarahit Divya Nar-var Ki॥

Janakipati Suradhipati Jagpati।
Akhil Lok Palak Trilok Gati॥

Vishwavanth Anvadh Amit-mati।
Ekmatra Gati Sachrachar Ki॥

Sharanagat Vatsal Vratdhari।
Bhagkt-kalpataru-var Asurari॥

Nam Leth Jag Pawankari।
Vanar Sakha Deen-dukh Har Ki॥

श्री रामचन्द्र जी के प्रसिद्ध मंदिर (Shri Ramchandra Ji Famous Temples)

1. रामेश्वरम मंदिर , तमिलनाडु

  • रामेश्वरम मंदिर तमिलनाडु राज्य के रामनाथपुरम जिले में स्थित है। और इसे स्थानीय लोग रामनाथस्वामी मंदिर के नाम से भी जानते हैं। यह मंदिर भारत के मुख्य चार धामों में से एक है, और यह भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंग में से प्रथम ज्योतिर्लिंग है। मान्यता है की इस मंदिर में शिवलिंग की स्थापना भगवान राम ने लंका विजय करने के लिए की थी, इसीलिए इस मंदिर का नाम भगवान राम के नाम पर ही ‘रामेश्वरम मंदिर’ पड़ा है।

2.राजा राम मंदिर (ओरछा, मध्य प्रदेश)

  • यह भारत का एकमात्र ऐसा मंदिर है जहां प्रभु श्री राम को राजा के रूप में पूजा जाता है और उन्हें प्रतिदिन शाही सम्मान (गार्ड ऑफ ऑनर) दिया जाता है।

3. कालाराम मंदिर (नासिक, महाराष्ट्र)

  • नासिक के पंचवटी क्षेत्र में स्थित इस मंदिर में भगवान राम की काले पत्थर की मूर्ति है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, वनवास के दौरान श्रीराम कुछ समय यहीं रुके थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. भगवान राम कौन थे?
  • श्री राम त्रेतायुग में अयोध्या के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के ज्येष्ठ पुत्र थे उन्हें हिंदू धर्म में भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। और वे ‘इक्ष्वाकु वंश’ के सूर्यवंशी राजा थे
  • 2. भगवान राम को 14 वर्ष का वनवास क्यों मिला?
  • राजा दशरथ की सबसे छोटी रानी कैकयी ने अपनी दासी मंथरा के कहने पर राजा दशरथ से दो वरदान मांगे थे। पहले वरदान में उन्होंने अपने पुत्र भरत के लिए अयोध्या का राजसिंहासन और दूसरे में राम के लिए 14 वर्ष का वनवास मांगा था। राजा दशरथ को अपने वचन की पालना में राम को वन भेजना पड़ा
  • 3. रामायण क्या है?
  • रामायण महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित एक प्राचीन हिंदू महाकाव्य है, जिसमें प्रभु श्री राम के संपूर्ण जीवन, उनके आदर्शों और रावण के साथ युद्ध का विस्तार से वर्णन किया गया है गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित ‘श्रीरामचरितमानस’ भी इस कथा का प्रमुख ग्रंथ है
  • 4. श्री राम के धनुष का क्या नाम था?
  • श्री राम के दिव्य धनुष का नाम कोदंड था। इसी कारण उन्हें ‘कोदंडपाणि’ भी कहा जाता है। सीता स्वयंवर में उन्होंने जिस धनुष को तोड़ा था, वह भगवान शिव का ‘पिनाक’ धनुष था।
  • 5. श्री राम के गुरु कौन थे?
  • उनके मुख्य रूप से दो गुरु थे। प्रारंभिक शिक्षा और शस्त्र विद्या उन्होंने महर्षि वसिष्ठ से सीखी थी। इसके बाद असुरों के संहार के लिए उन्हें महर्षि विश्वामित्र अपने साथ ले गए थे।
  • 6. श्री राम की बहन का क्या नाम था?
  • कथाओं के अनुसार, राजा दशरथ और रानी कौशल्या की एक पुत्री भी थीं, जिनका नाम शांता था। वे आयु में चारों भाइयों से बड़ी थीं और उन्हें अंगदेश के राजा रोमपाद ने गोद लिया था।

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