गायत्री माता की आरती: माँ गायत्री हिंदू धर्म की परम शक्ति और वेदमाता के रूप में पूजी जाती हैं। मान्यता है की उनके नाम पर ही सबसे शक्तिशाली वैदिक भजन, गायत्री मंत्र आधारित है सभी चार वेद माता गायत्री से ही उत्पन्न हुए हैं माँ गायत्री को सरस्वती माता का ही एक रूप माना जाता है गायत्री ज्ञान का आंतरिक प्रकाश हैं, जबकि सरस्वती उस ज्ञान की अभिव्यक्ति हैं। वे भगवान ब्रह्मा की पत्नी और गायत्री मंत्र की अधिष्ठात्री देवी हैं। माँ गायत्री के पांच मुख और दस भुजाएं है जो ब्रह्मांड के पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश) का प्रतिनिधित्व करते हैं उनके दस हाथ भगवान विष्णु, ब्रह्मा और शिव के सम्मिलित दिव्य हथियारों और शक्तियों का प्रतीक हैं, जो धर्म की रक्षा और दुष्टों के विनाश को दर्शाते हैं माता गायत्री का वाहन हंस है। हंस अपनी ‘नीर-क्षीर विवेक’ शक्ति के लिए जाना जाता है। माँ गायत्री को ज्ञान, बुद्धि, विवेक और सकारात्मक ऊर्जा की देवी माना जाता है। उनकी आरती भक्तों के मन में आध्यात्मिक जागरण लाती है और जीवन के अंधकार को दूर करती है। जयति जय गायत्री माता वाली यह आरती गायत्री जयंती, बसंत पंचमी, नवरात्रि, दैनिक पूजा और शान्तिकुंज हरिद्वार जैसे केंद्रों में बड़े भक्तिभाव से गाई जाती है।
गायत्री माता की आरती हिन्दी में
(Gayatri Mata Ki Aarti in Hindi)
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता ।
सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता ।।
जयति जय गायत्री माता
आदि शक्ति तुम अलख निरञ्जन जग पालन कर्त्री ।
दुःख, शोक, भय, क्लेश, कलह दारिद्रय दैन्य हर्त्री ।।
जयति जय गायत्री माता
ब्रहृ रुपिणी, प्रणत पालिनी, जगतधातृ अम्बे ।
भवभयहारी, जनहितकारी, सुखदा जगदम्बे ।।
जयति जय गायत्री माता
भयहारिणि भवतारिणि अनघे, अज आनन्द राशी ।
अविकारी, अघहरी, अविचलित, अमले अविनाशी ।।
जयति जय गायत्री माता
कामधेनु सत् चित् आनन्दा, जय गंगा गीता ।
सविता की शाश्वती शक्ति तुम सावित्री सीता ।।
जयति जय गायत्री माता
ऋग्, यजु, साम, अथर्व, प्रणयिनी, प्रणव महामहिमे ।
कुण्डलिनी सहस्त्रार सुषुम्ना, शोभा गुण गरिमे ।।
जयति जय गायत्री माता
स्वाहा, स्वधा, शची, ब्रहाणी, राधा, रुद्राणी ।
जय सतरुपा, वाणी, विघा, कमला, कल्याणी ।।
जयति जय गायत्री माता
जननी हम है, दीन हीन, दुःख दरिद्र के घेरे ।
यदपि कुटिल, कपटी कपूत, तऊ बालक है तेरे ।।
जयति जय गायत्री माता
स्नेहसनी करुणामयि माता, चरण शरण दीजै ।
बिलख रहे हम शिशु सुत तेरे, दया दृष्टि कीजै ।।
जयति जय गायत्री माता
काम, क्रोध, मद, लोभ, दम्भ, दुर्भाव, द्वेष हरिये ।
शुद्ध बुद्धि, निष्पाप हृदय, मन को पवित्र करिये ।।
जयति जय गायत्री माता
तुम समर्थ सब भाँति तारिणी, तुष्टि, पुष्टि त्राता ।
सत् मार्ग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता ।।
जयति जय गायत्री माता
जयति जय गायत्री माता, जयति जय गायत्री माता ।
सत् मारग पर हमें चलाओ, जो है सुखदाता ।।
जयति जय गायत्री माता..
गायत्री माता की आरती इंग्लिश में
(Gayatri Mata Ki Aarti in English)
Jayti jai gayatri mata, jayti jai gayatri mata
Sat maarag par hamen chalaao, jo hai sukhadaataa
Jayti jai gayatri mata
Aadi shakti tum alakh nirañjan jag paalan kartrii
Duahkh, shok, bhay, klesh, kalah daaridray dainy hartrii
Jayti jai gayatri mata
Brahṛ rupiṇii, praṇat paalinii, jagatadhaatṛ ambe
Bhavabhayahaarii, janahitakaarii, sukhadaa jagadambe
Jayti jai gayatri mata
Bhayahaariṇi bhavataariṇi anaghe, aj aanand raashii
Avikaarii, aghaharii, avichalit, amale avinaashii
Jayti jai gayatri mata
Kaamadhenu sat chit aanandaa, jai gangaa giitaa
Savitaa kii shaashvatii shakti tum saavitrii siitaa
Jayti jai gayatri mata
Rig, yaju, saam, atharv, praṇayinii, praṇav mahaamahime
Kuṇḍalinii sahastraar sushumnaa, shobhaa guṇ garime
Jayti jai gayatri mata
Svaahaa, svadhaa, shachii, brahaaṇii, raadhaa, rudraaṇii
Jai satarupaa, vaaṇii, vighaa, kamalaa, kalyaaṇii
jayti jai gayatri mata
Jananii ham hai, diin hiin, duahkh daridr ke ghere
Yadapi kuṭil, kapaṭii kapuut, tauu baalak hai tere
Jayti jai gayatri mata
Snehasanii karuṇaamayi mata, charaṇ sharaṇ diijai
Bilakh rahe ham shishu sut tere, dayaa dṛshṭi kiijai
Jayti jai gayatri mata
Kaam, krodh, mad, lobh, dambh, durbhaav, dvesh hariye
Shuddh buddhi, nishpaap hṛday, man ko pavitr kariye
Jayti jai gayatri mata
Tum samarth sab bhaanti taariṇii, tushṭi, pushṭi traataa
Sat maarg par hamen chalaao, jo hai sukhadaataa
Jayti jai gayatri mata
Jayti jai gayatri mata, jayti jai gayatri mata
Sat maarag par hamen chalaao, jo hai sukhadaataa
Jayti jai gayatri mata..
गायत्री माता के प्रसिद्ध मंदिर (Gayatri Mata Famous Temples)
विश्व का पहला गायत्री मंदिर, मथुरा (उत्तर प्रदेश)
- युग निर्माण योजना के संस्थापक पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य द्वारा 1953 में स्थापित यह मंदिर मथुरा-वृंदावन मार्ग पर स्थित है इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ 2400 करोड़ बार हाथों से लिखे हुए गायत्री मंत्र सुरक्षित रखे गए हैं।
गायत्री मंदिर, मनाली (हिमाचल प्रदेश):
- जगतसुख नामक स्थान पर स्थित यह ऐतिहासिक मंदिर महाभारत काल (लगभग 5500 वर्ष पूर्व) का माना जाता है ईस मंदिर की मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों द्वारा इस स्थान पर पूजा-अर्चना की गई थी
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1. गायत्री माता कौन हैं और उन्हें ‘वेद माता’ क्यों कहा जाता है?
- माँ गायत्री को ‘वेद माता’ (वेदों की जननी) और ‘विश्व माता’ कहा जाता है उनके नाम पर ही सबसे शक्तिशाली वैदिक भजन, गायत्री मंत्र आधारित है मान्यता है कि सभी चार वेद माता गायत्री से ही उत्पन्न हुए हैं और इस मंत्र में चारों वेदों का संपूर्ण सार समाहित है
- 2. माता गायत्री के पांच मुख और दस भुजाएं क्या दर्शाती हैं?
- माता को पंचमुखी माना जाता है, जो ब्रह्मांड के पांच तत्वों (पृथ्वी, जल, वायु, अग्नि और आकाश) का प्रतिनिधित्व करते हैं उनके दस हाथ भगवान विष्णु, ब्रह्मा और शिव के सम्मिलित दिव्य हथियारों और शक्तियों का प्रतीक हैं, जो धर्म की रक्षा और दुष्टों के विनाश को दर्शाते हैं
- 3. गायत्री माता की उत्पत्ति कैसे हुई?
- पौराणिक कथाओं के अनुसार, सृष्टि के प्रारंभ में ब्रह्मा जी को ब्रह्मांड की रचना के लिए ज्ञान की आवश्यकता थी। तब उन्होंने आदि शक्ति का आह्वान किया। माता आदि शक्ति अपने सबसे पवित्र रूप ‘गायत्री’ में प्रकट हुईं। उनके सहयोग से ब्रह्मा जी ने चारों वेदों और संसार की रचना की।
- 4. माता गायत्री का वाहन क्या है और यह क्या सिखाता है?
- माता गायत्री का वाहन हंस है। हंस अपनी ‘नीर-क्षीर विवेक’ शक्ति (दूध और पानी को अलग करने की क्षमता) के लिए जाना जाता है। यह प्रतीक हमें सिखाता है कि हमें जीवन में अच्छे और बुरे की पहचान कर केवल अच्छाई को अपनाना चाहिए।
- 5.क्या गायत्री माता और माता सरस्वती एक ही हैं?
- हाँ, मूल रूप से वे एक ही दिव्य चेतना के विभिन्न रूप हैं। ज्ञान, संगीत और कला की देवी माता सरस्वती को ब्रह्मा जी की शक्ति के रूप में गायत्री का ही एक रूप माना जाता है। गायत्री ज्ञान का आंतरिक प्रकाश हैं, जबकि सरस्वती उस ज्ञान की अभिव्यक्ति हैं।
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