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आरती (Aarti)

श्री गौरीनंदन की आरती (Gouri Nandan Ki Aarti)

जुलाई 22, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

श्री गौरीनंदन की आरती: श्री गौरीनंदन भगवान शिव और माता पार्वती (गौरी) के पुत्र भगवान गणेश का एक प्यारा नाम है। “गौरीनंदन” का अर्थ है गौरी का पुत्र ‘गौरी’ माता पार्वती का ही एक रूप और नाम है। इसलिए, माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र भगवान गणेश को गौरी नंदन कहा जाता है भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि दाता, सिद्धि विनायक और गणपति भी कहा जाता है। श्री गौरीनंदन की आरती गणेश पूजा का अभिन्न अंग है। यह आरती भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप, उनके माता-पिता के प्रति प्रेम और विघ्नों को दूर करने वाली शक्ति का वर्णन करती है। ये आरती गणेश चतुर्थी , सकट चौथ , दिवाली और गणेश मंदिरों में गाने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और उन्हे जीवन में बुद्धि, बुद्धिमत्ता एवं सफलता प्राप्त होती है।

श्री गौरीनंदन की आरती हिन्दी में
(Gouri Nandan Ki Aarti in Hindi)

ओम जय गौरी नन्दन, प्रभु जय गौरी नंदन
गणपति विघ्न निकंदन, मंगल नि:स्पन्दन
ओम जय गौरी नन्दन प्रभु जय गौरी नंदन

ऋषि सिद्धियाँ जिनके, नित ही चवर करे
करिवर मुख सुखकारक, गणपति विध्न हरे
ओम जय गौरी नन्दन प्रभु जय गौरी नंदन

देवगणो मे पहले तव पूजा होती
तव मुख छवि भक्तो के दुख दारिद खोती
ओम जय गौरी नन्दन प्रभु जय गौरी नंदन

गुड का भोग लगत है कर मोदक सोहे
ऋषि सीद्धि सह शोभित, त्रिभुवन मन मोहै
ओम जय गौरी नन्दन प्रभु जय गौरी नंदन

लंबोदर भय हारी, भक्तो के त्राता
मातु भक्त हो तुम्ही, वांछित फल दाता
ओम जय गौरी नन्दन प्रभु जय गौरी नंदन

मूषक वाहन राजत कनक छत्रधारी
ओम जय गौरी नन्दन प्रभु जय गौरी नंदन
विघ्नारन्येदवानल, शुभ मंगलकारी
ओम जय गौरी नन्दन प्रभु जय गौरी नंदन

धरणीधर कृत आरती गणपति की गावे
सुख सम्पत्ति युत होकर वह वांछित पावे
ओम जय गौरी नन्दन प्रभु जय गौरी नंदन

श्री गौरीनंदन की आरती इंग्लिश में
(Gouri Nandan Ki Aarti in English)

Om Jai Gauri Nandan, Prabhu Jai Gauri Nandan
Ganapati Vighna Nikandan, Mangal Nispandan || Om Jai ||

Ridhi Sidhiya Jinke, Nit Hi Chanwar Kare
Karivar Mukh Sukhkaarak, Ganapati Vighan Hae || Om Jai ||

Devganno Me Pehle Tav Pooja Hoti
Tab Mukh Chavi Bhakto Ke Nidaarid Khoti || Om Jai ||

Gud Ka Bhog Lagat Hain Akr Modak Sohe
Ridhi Sidhi Seh Shobhit, Tribhuvan Man Mohe || Om Jai ||

Lambodar Bhay Haari, Bhakto Ke Trata
Matra- Bhakt Ho Tumhi, Vaanchit Phal Daata || Om Jai ||

Mushak Vaahan Raajat, Kanak Chatradhaari
Vighnaaranyadavaanal, Subh Mangalkaari || Om Jai ||

Dharnidhar Krit Aarti Ganpati Ki Gaave
Sukh Sanpati Yukt Hokar Wah Vaanchit Paave || Om Jai ||

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श्री गौरीनंदन जी के प्रसिद्ध मंदिर (Gouri Nandan Famous Temples)

1. सिद्धिविनायक मंदिर , मुंबई

मुंबई के प्रभादेवी स्थित श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर है, जो दो शताब्दी पुराना है। मुंबई शहर पूजा स्थलों और ऐतिहासिक रुचि के स्थलों का मूक गवाह है, जो न केवल लोकप्रिय हैं बल्कि पुरातात्विक महत्व के भी हैं। इस मंदिर की पहली बार प्राण प्रतिष्ठा गुरुवार 19 नवंबर 1801 को हुई थी।

2. मोती डूंगरी गणेश मंदिर (जयपुर, राजस्थान)
जयपुर की एक छोटी पहाड़ी (डूंगरी) पर स्थित यह मंदिर 18वीं सदी पुराना है। ईस मंदिर की गणेश प्रतिमा बहुत ही प्राचीन और चमत्कारी मानी जाती है।

3. बड़ा गणेश मंदिर

महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित इस मंदिर में भगवान गणेश की एक विशाल प्रतिमा स्थापित है। इस भव्य मूर्ति का निर्माण सीमेंट से नहीं बल्कि गुड़, मेथी के दाने, पवित्र नदियों के जल और मिट्टियों से किया गया है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1. ‘गौरी नंदन’ नाम का क्या अर्थ है?
  • ‘गौरी नंदन’ का अर्थ है गौरी का पुत्र ‘गौरी’ माता पार्वती का ही एक रूप और नाम है। इसलिए, माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र भगवान गणेश को गौरी नंदन कहा जाता है
  • 2. श्री गौरीनंदन की पत्नियाँ और संतानें कौन हैं?
  • पत्नियाँ: उनकी दो पत्नियाँ हैं — रिद्धि (समृद्धि) और सिद्धि (आध्यात्मिक शक्ति)।
  • संतान: उनके दो पुत्र हैं — शुभ और लाभ। उनकी पुत्रियों के रूप में संतोषी माता को माना जाता है।
  • 3. श्री गौरीनंदन के प्रिय भोग और वाहन क्या हैं?
  • प्रिय भोग: उन्हें मोदक, लड्डू और गुड़ का भोग अत्यंत प्रिय है。
  • प्रिय पुष्प: लाल गुड़हल के फूल (जपाकुसुम) उन्हें बहुत पसंद हैं।
  • वाहन: उनका वाहन मूषक (चूहा) है
  • 4. श्री गौरीनंदन का एक दाँत क्यों टूटा हुआ है और उन्हे एकदंत क्यों कहलाते हैं ?
  • इसके पीछे दो प्रमुख कथाएँ हैं:
  • महर्षि वेदव्यास और महाभारत: जब महर्षि वेदव्यास महाभारत महाकाव्य बोल रहे थे, तब गणेश जी उसे लिख रहे थे। लिखते-लिखते अचानक उनकी कलम टूट गई। बिना रुके लिखने के लिए उन्होंने अपना एक दाँत तोड़कर उसे कलम बना लिया।
  • परशुराम जी से युद्ध: एक अन्य कथा के अनुसार, जब परशुराम जी भगवान शिव से मिलने आए, तो गणेश जी ने उन्हें द्वार पर रोक दिया। इस दौरान हुए युद्ध में परशुराम जी के फरसे से गणेश जी का एक दाँत टूट गया।
  • 5. श्री गौरीनंदन की पूजा में तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती?
  • एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवी तुलसी ने गणेश जी को विवाह का प्रस्ताव दिया था, जिसे गणेश जी ने अस्वीकार कर दिया। क्रोधित होकर तुलसी जी ने उन्हें दो विवाह होने का श्राप दिया, और बदले में गणेश जी ने तुलसी जी को एक राक्षस से विवाह का श्राप दिया। तब से गणेश जी की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित माना जाता है।

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