गौरीनंदन आरती: श्री गौरीनंदन भगवान शिव और माता पार्वती (गौरी) के पुत्र भगवान गणेश का एक प्यारा नाम है। “गौरीनंदन” का अर्थ है गौरी का पुत्र ‘गौरी’ माता पार्वती का ही एक रूप और नाम है। इसलिए, माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र भगवान गणेश को गौरी नंदन कहा जाता है भगवान गणेश को विघ्नहर्ता, बुद्धि दाता, सिद्धि विनायक और गणपति भी कहा जाता है। गौरीनंदन आरती गणेश पूजा का अभिन्न अंग है। यह आरती भगवान गणेश के दिव्य स्वरूप, उनके माता-पिता के प्रति प्रेम और विघ्नों को दूर करने वाली शक्ति का वर्णन करती है। ये आरती गणेश चतुर्थी , सकट चौथ , दिवाली और गणेश मंदिरों में गाने से भक्तों के सभी संकट दूर होते हैं और उन्हे जीवन में बुद्धि, बुद्धिमत्ता एवं सफलता प्राप्त होती है।
गौरीनंदन आरती हिन्दी में
(Gouri Nandan Aarti in Hindi)
जय हो जय जय है गौरी नंदन
देवा गणेशा गजानन
चरणों को तेरे हम पखारते
हो देवा आरती तेरी हम उतारते
शुभ कार्यो में सबसे पहले
तेरा पूजन करते
विघ्न हटाते काज बनाते
सभी अमंगल हरते
ओ देवा सिद्धि और सिद्धि बाटे
चुनते राहो के काटे
खुशियों के रंग को बिखारते
हो देवा आरती तेरी हम उतारते
जय हो जय जय है गौरी नंदन
देवा गणेशा गजानन
चरणों को तेरे हम पखारते
हो देवा आरती तेरी हम उतारते
ओमकार है रूप तिहारा
अलौकिक है माया
लम्ब कर्ण तेरे उज्जवल नैना
धुम्रवर्ण है काया
ओम्हर है रूप तिहारा
अलौकिक है माया
ओ देवा शम्भू के लाल दुलारे
संतो के नैनन तारे
मस्तक पे चन्द्रमा को वारते
हो देवा आरती तेरी हम उतारते
जय हो जय जय है गौरी नंदन
देवा गणेशा गजानन
चरणों को तेरे हम पखारते
हो देवा आरती तेरी हम उतारते
गणपति बाप्पा घर में आना
सुख वैभव कर जाना
एक दन्त लम्बोदर स्वामी
सारे कष्ट मिटाना
गणपति बाप्पा घर में आना
सुख वैभव बरसाना
देवा लडूअन का भोग लगाते
मूषक वहानपे आते
भक्तो की बिगड़ी संवारते
हो देवा आरती तेरी हम उतारते
जय हो जय जय है गौरी नंदन
देवा गणेशा गजानन
चरणों को तेरे हम पखारते
हो देवा आरती तेरी हम उतारते
धन कुबेर चरणों के चाकर
लक्ष्मी संग विराजे
दसो दिशा नवखण्ड में देवा
डंका तेरा बाजे
देवा तुझमे ध्यान लगाये
मन चाहा फल वो पाए
नैया भवंर से उबारते
हो देवा आरती तेरी हम उतारते
जय हो जय जय है गौरी नंदन
देवा गणेशा गजानन
चरणों को तेरे हम पखारते
हो देवा आरती तेरी हम उतारते
बांझो की गोदे भर देना
निर्धन को धन देना
दिनों को सन्मान दिलाना
निर्बल को बाल देना
ओ देवा सुनलो अरदास हमारी
विनती करते नर नारी
सेवा में तन मन वारते
हो देवा आरती तेरी हम उतारते
जय हो जय जय है गौरी नंदन
देवा गणेशा गजानन
चरणों को तेरे हम पखारते
हो देवा आरती तेरी हम उतारते
जय हो जय जय है गौरी नंदन
देवा गणेशा गजानन
चरणों को तेरे हम पखारते
हो देवा आरती तेरी हम उतारते
गौरीनंदन आरती इंग्लिश में
(Gouri Nandan Aarti in English)
jay ho jay jay hai gauri nandan
deva ganesha gajaanan
charanon ko tere ham pkhaarate
ho deva aarati teri ham utaarate
shubh kaaryo me sabase pahale
tera poojan karate
vighn hataate kaaj banaate
sbhi amangal harate
o deva siddhi aur siddhi baate
chunate raaho ke kaate
khushiyon ke rang ko bikhaarate
ho deva aarati teri ham utaarate
jay ho jay jay hai gauri nandan
deva ganesha gajaanan
charanon ko tere ham pkhaarate
ho deva aarati teri ham utaarate
omakaar hai roop tihaara
alaukik hai maaya
lamb karn tere ujjaval naina
dhumravarn hai kaaya
omhar hai roop tihaara
alaukik hai maaya
o deva shambhoo ke laal dulaare
santo ke nainan taare
mastak pe chandrama ko vaarate
ho deva aarati teri ham utaarate
jay ho jay jay hai gauri nandan
deva ganesha gajaanan
charanon ko tere ham pkhaarate
ho deva aarati teri ham utaarate
ganapati baappa ghar me aana
sukh vaibhav kar jaana
ek dant lambodar svaami
saare kasht mitaana
ganapati baappa ghar me aana
sukh vaibhav barasaana
deva ladooan ka bhog lagaate
mooshak vahaanape aate
bhakto ki bigi sanvaarate
ho deva aarati teri ham utaarate
jay ho jay jay hai gauri nandan
deva ganesha gajaanan
charanon ko tere ham pkhaarate
ho deva aarati teri ham utaarate
dhan kuber charanon ke chaakar
lakshmi sang viraaje
daso disha navkhand me deva
danka tera baaje
deva tujhame dhayaan lagaaye
man chaaha phal vo paae
naiya bhavanr se ubaarate
ho deva aarati teri ham utaarate
jay ho jay jay hai gauri nandan
deva ganesha gajaanan
charanon ko tere ham pkhaarate
ho deva aarati teri ham utaarate
baanjho ki gode bhar dena
nirdhan ko dhan dena
dinon ko sanmaan dilaana
nirbal ko baal dena
o deva sunalo aradaas hamaari
vinati karate nar naari
seva me tan man vaarate
ho deva aarati teri ham utaarate
jay ho jay jay hai gauri nandan
deva ganesha gajaanan
charanon ko tere ham pkhaarate
ho deva aarati teri ham utaarate
jay ho jay jay hai gauri nandan
deva ganesha gajaanan
charanon ko tere ham pkhaarate
ho deva aarati teri ham utaarate
श्री गौरीनंदन जी के प्रसिद्ध मंदिर (Gouri Nandan Famous Temples)
मुंबई के प्रभादेवी स्थित श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर है, जो दो शताब्दी पुराना है। मुंबई शहर पूजा स्थलों और ऐतिहासिक रुचि के स्थलों का मूक गवाह है, जो न केवल लोकप्रिय हैं बल्कि पुरातात्विक महत्व के भी हैं। इस मंदिर की पहली बार प्राण प्रतिष्ठा गुरुवार 19 नवंबर 1801 को हुई थी।
2. मोती डूंगरी गणेश मंदिर (जयपुर, राजस्थान)
जयपुर की एक छोटी पहाड़ी (डूंगरी) पर स्थित यह मंदिर 18वीं सदी पुराना है। ईस मंदिर की गणेश प्रतिमा बहुत ही प्राचीन और चमत्कारी मानी जाती है।
3. बड़ा गणेश मंदिर
महाकालेश्वर मंदिर के पास स्थित इस मंदिर में भगवान गणेश की एक विशाल प्रतिमा स्थापित है। इस भव्य मूर्ति का निर्माण सीमेंट से नहीं बल्कि गुड़, मेथी के दाने, पवित्र नदियों के जल और मिट्टियों से किया गया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1. ‘गौरी नंदन’ नाम का क्या अर्थ है?
- ‘गौरी नंदन’ का अर्थ है गौरी का पुत्र ‘गौरी’ माता पार्वती का ही एक रूप और नाम है। इसलिए, माता पार्वती और भगवान शिव के पुत्र भगवान गणेश को गौरी नंदन कहा जाता है
- 2. श्री गौरीनंदन की पत्नियाँ और संतानें कौन हैं?
- पत्नियाँ: उनकी दो पत्नियाँ हैं — रिद्धि (समृद्धि) और सिद्धि (आध्यात्मिक शक्ति)।
- संतान: उनके दो पुत्र हैं — शुभ और लाभ। उनकी पुत्रियों के रूप में संतोषी माता को माना जाता है।
- 3. श्री गौरीनंदन के प्रिय भोग और वाहन क्या हैं?
- प्रिय भोग: उन्हें मोदक, लड्डू और गुड़ का भोग अत्यंत प्रिय है。
- प्रिय पुष्प: लाल गुड़हल के फूल (जपाकुसुम) उन्हें बहुत पसंद हैं।
- वाहन: उनका वाहन मूषक (चूहा) है
- 4. श्री गौरीनंदन का एक दाँत क्यों टूटा हुआ है और उन्हे एकदंत क्यों कहलाते हैं ?
- इसके पीछे दो प्रमुख कथाएँ हैं:
- महर्षि वेदव्यास और महाभारत: जब महर्षि वेदव्यास महाभारत महाकाव्य बोल रहे थे, तब गणेश जी उसे लिख रहे थे। लिखते-लिखते अचानक उनकी कलम टूट गई। बिना रुके लिखने के लिए उन्होंने अपना एक दाँत तोड़कर उसे कलम बना लिया।
- परशुराम जी से युद्ध: एक अन्य कथा के अनुसार, जब परशुराम जी भगवान शिव से मिलने आए, तो गणेश जी ने उन्हें द्वार पर रोक दिया। इस दौरान हुए युद्ध में परशुराम जी के फरसे से गणेश जी का एक दाँत टूट गया।
- 5. श्री गौरीनंदन की पूजा में तुलसी क्यों नहीं चढ़ाई जाती?
- एक पौराणिक कथा के अनुसार, देवी तुलसी ने गणेश जी को विवाह का प्रस्ताव दिया था, जिसे गणेश जी ने अस्वीकार कर दिया। क्रोधित होकर तुलसी जी ने उन्हें दो विवाह होने का श्राप दिया, और बदले में गणेश जी ने तुलसी जी को एक राक्षस से विवाह का श्राप दिया। तब से गणेश जी की पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित माना जाता है।
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