श्री रामायण जी की आरती : ये आरती भगवान श्री राम को समर्पित है। क्योंकि रामायाण भगवान राम की लीला और कथाओं का संकलन है। श्री रामायण को हिंदू धर्म का आदिकाव्य कहा जाता है। गोस्वामी तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस रामायण का सबसे लोकप्रिय रूप है। इसमें भगवान श्री राम के जीवन, आदर्श, मर्यादा और भक्ति का विस्तार से वर्णन किया गया है। रामायण को पंचम वेद भी माना जाता है। राम नवमी , विवाह पंचमी और राम मंदिरों में श्री रामायण जी की आरती को सुनने और कीर्तन करने से भक्त के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
श्री रामायण जी की आरती हिन्दी में
(Shri Ramayan Aarti in Hindi)
आरती श्री रामायण जी की ।
कीरति कलित ललित सिय पी की ॥
गावत ब्रहमादिक मुनि नारद ।
बाल्मीकि बिग्यान बिसारद ॥
शुक सनकादिक शेष अरु शारद ।
बरनि पवनसुत कीरति नीकी ॥
॥ आरती श्री रामायण जी की..॥
गावत बेद पुरान अष्टदस ।
छओं शास्त्र सब ग्रंथन को रस ॥
मुनि जन धन संतान को सरबस ।
सार अंश सम्मत सब ही की ॥
॥ आरती श्री रामायण जी की..॥
गावत संतत शंभु भवानी ।
अरु घटसंभव मुनि बिग्यानी ॥
ब्यास आदि कबिबर्ज बखानी ।
कागभुशुंडि गरुड़ के ही की ॥
॥ आरती श्री रामायण जी की..॥
कलिमल हरनि बिषय रस फीकी ।
सुभग सिंगार मुक्ति जुबती की ॥
दलनि रोग भव मूरि अमी की ।
तात मातु सब बिधि तुलसी की ॥
आरती श्री रामायण जी की ।
कीरति कलित ललित सिय पी की ॥
श्री रामायण जी की आरती इंग्लिश में
(Shri Ramayan Aarti in English)
Aarti Shri Ramayan Ji Ki,
Kirti Kalit Lalit Siya Pi Ki.
Gavat Brahmadik Muni Narad,
Valmiki Vigyan Visharad.
Shuk Sanakadi Shesh Aru Sarad,
Barni Pavansut Kirti Niki.
Aarti Shri Ramayan Ji Ki.
Gavat Ved Puran Ashtdash,
Chhahon Shastra Sab Granthan Ko Ras.
Munijan Dhan Santan Ko Sarbas,
Sar Ansh Sammat Sab-hiki.
Aarti Shri Ramayan Ji Ki.
Gavat Santat Shambhu Bhavani,
Aru Ghatsambhav Muni Vigyani.
Vyas Adi Kavibarj Bakhani,
Kakbhushundi Garur Ke Hi Ki.
Aarti Shri Ramayan Ji Ki.
Kalimal Harni Vishay Ras Phiki,
Subhag Singar Mukti Juvati Ki.
Dalan Rog Bhav Muri Ami Ki,
Tat Mat Sab Vidhi Tulsi Ki.
Aarti Shri Ramayan Ji Ki,
Kirti Kalit Lalit Siya Pi Ki.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1. श्री रामायण जी की आरती के रचयिता कौन हैं?
- इस प्रसिद्ध आरती की रचना महान संत गोस्वामी तुलसीदास जी ने की थी। यह उनके द्वारा रचित ‘श्रीरामचरितमानस’ के उत्तरकांड के अंत में आती है।
- 2. रामायण में कुल कितने अध्याय (कांड) हैं?
- मूल रामायण में सात कांड (अध्याय) हैं:
- बालकांड
- अयोध्याकांड
- अरण्यकांड
- किष्किंधाकांड
- सुंदरकांड
- लंकाकांड (युद्धकांड)
- उत्तरकांड
- 3. रामायण में कुल कितने श्लोक हैं?
- महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित इस महाकाव्य में लगभग 24 ,000 श्लोक हैं।
- 4. रावण के माता-पिता कौन थे?
- रावण के पिता ऋषि विश्रवा और माता कैकसी थीं।
- 5. रामचरितमानस और रामायण में क्या अंतर है?
- वाल्मीकि रामायण संस्कृत भाषा में रचित एक महाकाव्य है। वहीं, ‘रामचरितमानस’ को सोलहवीं सदी में संत तुलसीदास जी ने अवधी भाषा में लिखा था।
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