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आरती (Aarti)

सूर्य देव आरती (Surya Dev Aarti)

जुलाई 22, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

सूर्य देव आरती: भगवान सूर्य देव का शास्त्रों में अत्यधिक महत्व है। सूर्य देवता को जीवन और ऊर्जा के स्रोत के रूप में पूजा जाता है और उनके आशीर्वाद से व्यक्ति को स्वास्थ्य, समृद्धि और आत्मिक उन्नति प्राप्त होती है। रविवार व्रत के अलावा मकर संक्रांति , छठ पूजा के दिन सूर्य देव की विधिवत पूजा करने से शुभ फलों की प्राप्ति होती है। सूर्य देव की पूजा करने के साथ-साथ अंत में सूर्य देव आरती का पाठ भी अवश्य करें।

सूर्य देव आरती हिन्दी में
(Surya Dev
Aarti in Hindi)

जय जय जय रविदेव,
जय जय जय रविदेव ।
रजनीपति मदहारी,
शतलद जीवन दाता ॥

पटपद मन मदुकारी,
हे दिनमण दाता ।
जग के हे रविदेव,
जय जय जय स्वदेव ॥

नभ मंडल के वाणी,
ज्योति प्रकाशक देवा ।
निजजन हित सुखराशी,
तेरी हम सब सेवा ॥

करते हैं रविदेव,
जय जय जय रविदेव ।
कनक बदन मन मोहित,
रुचिर प्रभा प्यारी ॥

नित मंडल से मंडित,
अजर अमर छविधारी ।
हे सुरवर रविदेव,
जय जय जय रविदेव ॥

जय जय जय रविदेव,
जय जय जय रविदेव ।
रजनीपति मदहारी,
शतलद जीवन दाता ॥

सूर्य देव आरती इंग्लिश में
(Surya Dev
Aarti in English)

Jai Jai Jai Ravidev,
Jai Jai Jai Ravidev ।
Rajanipati Madhaari,
Shatlad Jeevan Data ॥

Patpad Mann Madukaari,
Hey Dinmann Data ।
Jag Ke He Ravidev,
Jai Jai Jai Swadev ॥

Nabh Manda| Ke Vaani,
Jyoti Prakaashak Deva ।
Nijjan Hit Sukhraashi,
Teri Hum Sab Sevaa ॥

Karte Hai Ravi Dev,
Jai Jai Jai Ravidev ।
Kanak Badan Man Mohit,
Ruchir Prabha Pyari ॥

Nit Mandal Se Mandit,
Ajar Amar Chavidhaari ।
Hey Survar Ravidev,
Jai Jai Jai Ravidev ॥

Jai Jai Jai Ravidev,
Jai Jai Jai Ravidev ।
Rajanipati Madhaari,
Shatlad Jeevan Data ॥

सूर्य देव के प्रसिद्ध मंदिर (Surya Dev Famous Temples)

1.कोणार्क सूर्य मंदिर , ओडिशा

  • कोणार्क सूर्य मंदिर भगवान सूर्य देवता को समर्पित है।‘कोणार्क’ का अर्थ है सूर्य और चार कोने। माना जाता है की सूर्य की पहली किरणें मंदिर के प्रवेश द्वार पर पड़ती हैं। 13वीं शताब्दी ईस्वी में निर्मित इस मंदिर का निर्माण पूर्वी गंग वंश के राजा नरसिंहदेव प्रथम ने 1238-1250 ईस्वी के बीच करवाया था। और सामंतराय महापात्र इसके निर्माण के प्रभारी थे। मंदिर का अधिकांश भाग जर्जर हो चुका है, लेकिन जो बचा है, वह अभी भी मोहित करने के लिए पर्याप्त आकर्षण रखता है।

2. देव सूर्य मंदिर, औरंगाबाद, बिहार

  • बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित ‘देवार्क’ नाम से प्रसिद्ध यह मंदिर बेहद चमत्कारी है। अन्य सूर्य मंदिरों के विपरीत, इसका प्रवेश द्वार पश्चिम की ओर है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर का निर्माण स्वयं भगवान विश्वकर्मा ने एक ही रात में किया था।

3. गया सूर्य मंदिरबिहार

  • गया में फल्गु नदी के तट पर स्थित ‘दक्षिणार्क सूर्य मंदिर’ का उल्लेख पुराणों में भी मिलता है। इस मंदिर का निर्माण दक्षिण भारत के राजा सोमेश्वर द्वारा कराया गया था। यहाँ पितृपक्ष के दौरान देश भर से लोग पिंडदान करने आते हैं और सूर्य कुंड में स्नान कर भगवान भास्कर की पूजा करते हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

  • 1.भगवान सूर्य देव कौन हैं?
  • हिंदू पौराणिक कथाओं में भगवान सूर्य को सृष्टि का संचालक और समस्त जगत की आत्मा माना गया है। वे प्रत्यक्ष दिखाई देने वाले एकमात्र देवता हैं। उन्हें आदित्य, भास्कर, रवि, और दिवाकर जैसे विभिन्न नामों से भी पुकारा जाता है।
  • 2.सूर्य देव के सात घोड़े और रथ क्या दर्शाते हैं?
  • सूर्य देव का रथ सात घोड़ों द्वारा खींचा जाता है। आध्यात्मिक दृष्टि से, ये सात घोड़े इंद्रधनुष के सात रंगों सप्ताह के सात दिनों और शरीर के सात चक्रों को दर्शाते हैं।
  • 3.सूर्य देव की पूजा करने से क्या लाभ होते हैं?
  • नियमित सूर्य उपासना से शारीरिक आरोग्यता, तेज, बुद्धि, और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है। इससे कुंडली में सूर्य मजबूत होता है, जिससे समाज में मान-सम्मान, यश और कीर्ति की प्राप्ति होती है।
  • 4. सूर्य देव की कितनी पत्नियाँ हैं?
    उत्तर: सूर्य देव की मुख्य रूप से दो पत्नियाँ मानी जाती हैं:
  • संज्ञा: जो विश्वकर्मा की पुत्री थीं।
  • छाया: जो संज्ञा की ही परछाईं (प्रतिरूप) थीं।
  • 5. शनि देव और सूर्य देव के बीच क्या संबंध है?
  • उत्तर: न्याय के देवता शनि देव, सूर्य देव के पुत्र हैं (माता छाया के गर्भ से)। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जन्म के समय शनि देव के श्याम (काले) वर्ण को देखकर सूर्य देव ने उन्हें अपना पुत्र मानने से इंकार कर दिया था, जिससे दोनों के बीच वैचारिक मतभेद (शत्रुता) का संबंध रहता है।

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You can also read Surya Dev Aarti Lyrics in English

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