श्री कार्तिकेय आरती: सनातन धर्म में भगवान कार्तिकेय को शक्ति, साहस, ज्ञान और विजय का देवता माना जाता है। वे भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र हैं दक्षिण भारत में उन्हें मुरुगन, सुब्रह्मण्य, स्कंद और षण्मुख नामों से भी पूजा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब तारकासुर नामक असुर ने देवताओं को अत्यधिक परेशान करना शुरू किया, तब उसके वध के लिए भगवान शिव के पुत्र के रूप में कार्तिकेय का जन्म हुआ। कहा जाता है कि भगवान कार्तिकेय का जन्म दिव्य शक्ति से हुआ था और उनका पालन-पोषण छह कृतिका देवियों ने किया। इसी कारण उनका नाम कार्तिकेय पड़ा। भगवान कार्तिकेय को छह मुखों वाला भी बताया गया है, इसलिए उन्हें षण्मुख कहा जाता है। उनके छह मुख ज्ञान, वैराग्य, शक्ति, यश, ऐश्वर्य और दिव्यता के प्रतीक माने जाते हैं। उनका वाहन मोर है, जो अहंकार और बुराइयों पर विजय का प्रतीक माना जाता है। कम आयु में ही भगवान कार्तिकेय ने देवताओं की सेना का नेतृत्व किया और तारकासुर का वध करके देवताओं को भय से मुक्त कराया। इस विजय के बाद उन्हें देवसेनापति की उपाधि प्राप्त हुई। वे वीरता, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता के आदर्श माने जाते हैं। श्री कार्तिकेय आरती भक्तों में साहस, आत्मबल और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है। जो व्यक्ति श्रद्धापूर्वक उनकी आरती करता है, उसके जीवन से भय, नकारात्मकता और बाधाएं दूर होती हैं। विशेष रूप से स्कंद षष्ठी, कार्तिक पूर्णिमा और अन्य धार्मिक पर्वों पर भगवान कार्तिकेय की पूजा और आरती का विशेष महत्व होता है। दक्षिण भारत के अनेक मंदिरों में उनकी भव्य आराधना की जाती है।
श्री कार्तिकेय आरती हिन्दी में
(Shri Kartikeya Aarti in Hindi)
जय जय आरती वेणु गोपाला
वेणु गोपाला वेणु लोला
पाप विदुरा नवनीत चोराजय जय आरती वेंकटरमणा
वेंकटरमणा संकटहरणा
सीता राम राधे श्याम
जय जय आरती गौरी मनोहर
गौरी मनोहर भवानी शंकर
सदाशिव उमा महेश्वर
जय जय आरती राज राजेश्वरि
राज राजेश्वरि त्रिपुरसुन्दरि
महा सरस्वती महा लक्ष्मी
महा काली महा लक्ष्मी
जय जय आरती आन्जनेय
आन्जनेय हनुमन्ता
जय जय आरति दत्तात्रेय
दत्तात्रेय त्रिमुर्ति अवतार
जय जय आरती सिद्धि विनायक
सिद्धि विनायक श्री गणेश
जय जय आरती सुब्रह्मण्य
सुब्रह्मण्य कार्तिकेय
श्री कार्तिकेय आरती इंग्लिश में
(Shri Kartikeya Aarti in English)
Jai Jai Aarti Venu Gopala
Venu Gopala Venu Lola
Paap Vidura Navneet Chora
Jai Jai Aarti Venkatramana
Venkatramana Sankatharana
Sita Ram Radhe Shyam
Jai Jai Aarti Gauri Manohar
Gauri Manohar Bhawani Shankar
Sadashiv Uma Maheshwar
Jai Jai Aarti Raaj Raajeshwari
Raaj Raajeshwari Tripurasundari
Maha Saraswati Maha Lakshmi
Maha Kaali Maha Lakshmi
Jai Jai Aarti Aanjaney
Aanjaney Hanumanta
Jai Jai Aarati Dattatrey
Dattatrey Trimurti Avtar
Jai Jai Aarti Siddhi Vinayak
Siddhi Vinayak Shri Ganesh
Jai Jai Aarti Subrahmany
Subrahmany Kartikey
कार्तिकेय भगवान के प्रसिद्ध मंदिर (Kartikeya Bhagwan Famous Temples)
1. कुक्के सुब्रमण्य मंदिर, कर्नाटक
- कुक्के सुब्रमण्य मंदिर कर्नाटक के दक्षिण कन्नड़ जिले में सुब्रमण्य नामक एक छोटे से गांव में स्थित है। ईस मदिर के मुख्य देवता भगवान कार्तिकेय हैं। इन्हें सुब्रमण्या स्वामी के रूप में पूजा जाता है। कहा जाता है कि यह मंदिर करीब 5000 साल पुराना है। यह पवित्र स्थान भगवान सुब्रमण्या (कार्तिकेय) और वासुकी (नागों के राजा) का घर माना जाता है। यह मंदिर कुमारधारा नदी के किनारे स्थित है और मुख्य रूप से सर्प दोष (नाग दोष) से मुक्ति पाने वाले भक्तों के लिए प्रसिद्ध है। यहां भगवान सुब्रमण्य को नागों के रक्षक और स्वामी के रूप में पूजा जाता है।
2. कार्तिक स्वामी मंदिर (रुद्रप्रयाग, उत्तराखंड)
- कार्तिक स्वामी मंदिर उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में क्रौंच पर्वत की चोटी पर स्थित एक बेहद अद्भुत और पवित्र स्थल है. समुद्र तल से लगभग 3,050 मीटर (10,007 फीट) की ऊंचाई पर स्थित यह मंदिर पूरे उत्तर भारत में भगवान कार्तिकेय का सबसे प्रसिद्ध और एकमात्र प्राचीन मंदिर माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह वही स्थान है जहाँ भगवान कार्तिकेय और उनके भाई श्री गणेश के बीच ब्रह्मांड की परिक्रमा करने की प्रतिस्पर्धा हुई थी. गणेश जी द्वारा माता-पिता (शिव-पार्वती) की परिक्रमा कर विजेता बनने पर कार्तिकेय जी क्रोधित होकर यहाँ आ गए थे. उन्होंने अपना मांस अपनी माता को सौंप दिया और अपनी हड्डियाँ यहीं क्रौंच पर्वत पर स्थापित कर दी थीं. मंदिर के गर्भगृह में आज भी उनके हड्डी स्वरूप (शिला रूप) की पूजा की जाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1. कार्तिकेय कौन हैं?
- वह हिंदू धर्म में ज्ञान, युद्ध और विजय के देवता हैं। वे भगवान शिव और माता पार्वती के ज्येष्ठ पुत्र तथा भगवान गणेश के भ्राता हैं। दक्षिण भारत में उन्हें ‘मुरुगन’ या ‘सुब्रह्मण्य’ के नाम से अत्यधिक पूजा जाता है।
- 2. भगवान कार्तिकेय का जन्म कैसे हुआ था?
- पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवताओं के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने अपनी दिव्य ऊर्जा (तेज) से कार्तिकेय को उत्पन्न किया था। उनका पालन-पोषण कृतिकाओं (छह तारों का समूह) द्वारा किया गया था, इसीलिए उन्हें ‘कार्तिकेय’ कहा जाता है।
- 3. कार्तिकेय का वाहन क्या है?
- भगवान कार्तिकेय का दिव्य वाहन मयूर (मोर) है, जिसका नाम ‘परावणी’ है।
- 4. कार्तिकेय प्रमुख अस्त्र और नाम क्या हैं?
- उनका सबसे प्रिय और मुख्य अस्त्र ‘वेल’ (एक प्रकार का भाला) है, जो उन्हें माता पार्वती ने प्रदान किया था। उन्हें ‘षण्मुख’ (छह मुख वाले), ‘स्कंद’, और ‘गुह’ नामों से भी जाना जाता है।
- 5. कार्तिकेय के छह मुख (षण्मुख) होने का क्या रहस्य है?
- पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव के तेज से उत्पन्न ऊर्जा को अग्नि और गंगा ने ‘शरवण’ के जंगलों की एक झील में स्थापित किया था। वहाँ छह चमकते हुए दिव्य शिशु प्रकट हुए, जिनका पालन-पोषण छह कृतिका नक्षत्रों की देवियों ने किया। जब माता पार्वती ने उन छह बच्चों को एक साथ प्रेम से गले लगाया, तो वे सभी मिलकर एक शरीर में विलीन हो गए, लेकिन उनके छह सिर बने रहे। उनके छह मुख पांच इंद्रियों और मन पर नियंत्रण का प्रतीक हैं।
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