श्री जगन्नाथ संध्या आरती: भगवान श्री जगन्नाथ हिंदू धर्म में भगवान विष्णु के एक विशेष स्वरूप के रूप में पूजे जाते हैं। जगन्नाथ’ शब्द का अर्थ है ‘जगत का नाथ’ या ‘ब्रह्मांड का स्वामी’ । पुरी जगन्नाथ मंदिर जो भारत के चार प्रमुख धामों में से एक माना जाता है। जो भक्तों के लिए केवल एक धार्मिक स्थान नहीं बल्कि ईश्वर के प्रति प्रेम, समर्पण और आस्था और स्थान है । पुरी जगन्नाथ मंदिर में आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को भव्य जगन्नाथ रथ यात्रा शुरू होती है इसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को विशाल रथों में सवार होकर अपनी मौसी के घर (गुंडीचा मंदिर) जाते हैं इन रथों को भक्तों द्वारा खींचना बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है पौराणिक कथा के अनुसार, राजा इंद्रद्युम्न को भगवान विष्णु की मूर्ति बनाने का स्वप्न प्राप्त हुआ था मूर्तिकार (विश्वकर्मा जी) ने मूर्ति बनाते समय यह शर्त रखी थी कि वे एकांत में काम करेंगे 21 दिन पूरे होने से पहले ही महारानी की अधीरता के कारण दरवाजा खोल दिया गया, जिससे भगवान की मूर्ति अधूरी (बिना हाथ-पैरों के) ही रह गई यह भगवान का दिव्य और निराकार स्वरूप है जो भक्तों को प्रेम और विश्वास का संदेश देता है सभी लोग प्रतिदिन मंदिरों और घरों में श्रद्धालु श्री जगन्नाथ संध्या आरती करके उनसे दिव्य आशीर्वाद की कामना करते हैं।
श्री जगन्नाथ संध्या आरती हिन्दी में
(shri Jagannath Sandhya Aarti in Hindi)
आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
परसत चरणारविन्द आपदा हरी।
निरखत मुखारविंद आपदा हरी,
कंचन धूप ध्यान ज्योति जगमगी।
अग्नि कुण्डल घृत पाव सथरी।
आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
देवन द्वारे ठाड़े रोहिणी खड़ी,
मारकण्डे श्वेत गंगा आन करी।
गरुड़ खम्भ सिंह पौर यात्री जुड़ी,
यात्री की भीड़ बहुत बेंत की छड़ी।
आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी,
धन्य-धन्य सूरश्याम आज की घड़ी।
आरती श्री जगन्नाथ मंगलकारी.
श्री जगन्नाथ संध्या आरती इंग्लिश में
(shri Jagannath Sandhya Aarti in English)
Aarti Shri Jagannath Mangalkari,
Parsat Charnarwind Aapda haari.
Nirkhat Mukharwind Aapda Haari.
Kanchan Thar Dhup deep jyoti Jagmagi.
Agnikund ghirat paaw paaw Saathri.
Aarti Shri Jagannath Mangalkari…….
Dewan Dware Thade rohini khadi.
Markande Shwet Ganga Aan ke bhari.
Garud Khambh Sinh paur yatra judi.
Yatra ki bheed bahut bent ki chhadi.
Aarti Shri Jagannath Mangalkari……
Dhanya Dhanya surshyam aaj ki ghari.
Aarti Shri Jagannath mangalkari…….
श्री जगन्नाथ जी के प्रसिद्ध मंदिर (shri Jagannath Ji Famous Temples)
1.श्री जगन्नाथ मंदिर, पुरी (ओडिशा)
- ओडिशा के पुरी में स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर भारत के सबसे पवित्र और दार्शनिक स्थलों में से एक है। यह वैष्णव संप्रदाय का एक मुख्य मंदिर है जो भगवान विष्णु के अवतार श्रीकृष्ण (जगन्नाथ), उनके बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा को समर्पित है। इस भव्य मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में पूर्वी गंगा राजवंश के राजा अनंतवर्मन चोडगंग देव ने शुरू करवाया था। ईस मंदिर में दुनिया की सबसे बड़ी रसोई है यहाँ भगवान के लिए ‘महाप्रसाद’ तैयार किया जाता है, जिसे मिट्टी के 7 बर्तनों को एक के ऊपर एक रखकर लकड़ी की आग पर पकाया जाता है। इसमें सबसे ऊपर रखे बर्तन का खाना पहले पकता है। यह पर आषाढ़ शुक्ल द्वितीया को विश्व प्रसिद्ध रथ यात्रा निकलती है। तीन विशाल रथों पर सवार होकर तीनों विग्रह अपनी मौसी के घर (गुंडिचा मंदिर) जाते हैं।
2. जगन्नाथ मंदिर, रांची, झारखंड
- जगन्नाथ मंदिर भगवान जगन्नाथ को समर्पित है। ये मंदिर झारखंड के रांची शहर में स्थित है। भगवान जगन्नाथ को विष्णु जी का अवतार माना गया है। जगन्नाथ मंदिर को सबसे प्रसिद्ध स्थलों में से एक माना गया है। लोग दूर-दूर से यहां भगवान जगन्नाथ के दर्शन करने आते हैं। खासकर यहां का रथ मेला लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र है। पुरी की तरह भगवान जगन्नाथ का रथ यहां भी खींचा जाता है। 15 दिनों तक मेला लगता है, जन्माष्टमी, दीवाली और कार्तिक पूर्णिमा जैसे त्योहारों के दौरान भक्त आशीर्वाद और आध्यात्मिक शांति पाने के लिए मंदिर में आते हैं। जहां झारखंड की संस्कृति और परंपरा देखने को मिलती है। इस मंदिर की आकृति भी ओडिशा के पुरी स्थित मंदिर की तरह ही है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
- 1: भगवान जगन्नाथ कौन हैं?
- ‘जगन्नाथ’ शब्द का अर्थ है ‘जगत का नाथ’ या ‘ब्रह्मांड का स्वामी’ हिन्दू धर्म में, उन्हें भगवान विष्णु के अवतार, स्वयं श्रीकृष्ण के दिव्य रूप के रूप में पूजा जाता है
- 2: भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के हाथ और पैर अधूरे क्यों हैं?
- पौराणिक कथा के अनुसार, राजा इंद्रद्युम्न को भगवान विष्णु की मूर्ति बनाने का स्वप्न प्राप्त हुआ था मूर्तिकार (विश्वकर्मा जी) ने मूर्ति बनाते समय यह शर्त रखी थी कि वे एकांत में काम करेंगे 21 दिन पूरे होने से पहले ही महारानी की अधीरता के कारण दरवाजा खोल दिया गया, जिससे भगवान की मूर्ति अधूरी (बिना हाथ-पैरों के) ही रह गई यह उनका दिव्य और निराकार स्वरूप है जो भक्तों को प्रेम और विश्वास का संदेश देता है
- 3. भगवान जगन्नाथ को हर साल बुखार क्यों आता है?
- हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ पूर्णिमा को भगवान जगन्नाथ को 108 कलशों के जल से स्नान कराया जाता है अत्यधिक स्नान के कारण उन्हें बुखार आ जाता है इसके बाद 15 दिनों तक वे एक गुप्त कक्ष में रहते हैं जहाँ उनकी विशेष सेवा-अर्चना की जाती है और वे पूर्ण रूप से स्वस्थ हो जाते हैं
- 4. जगन्नाथ रथ यात्रा क्या है?
- आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को यह भव्य यात्रा शुरू होती है इसमें भगवान जगन्नाथ, उनके भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा विशाल रथों में सवार होकर अपनी मौसी के घर (गुंडीचा मंदिर) जाते हैं इन रथों को भक्तों द्वारा खींचना बहुत ही पुण्यदायी माना जाता है
- 5. भगवान जगन्नाथ की रसोई को दुनिया की सबसे बड़ी रसोई क्यों कहा जाता है?
- पुरी जगन्नाथ मंदिर की रसोई दुनिया की सबसे बड़ी शाकाहारी रसोई मानी जाती है. यहाँ प्रतिदिन भगवान को भोग लगाने के लिए 56 प्रकार के पकवान (छप्पन भोग) तैयार किए जाते हैं. इस रसोई में लगभग 500 रसोइये (सुआर) और 200 सहायक मिलकर पारंपरिक चूल्हों पर भोजन बनाते है
- 6. जगन्नाथ जी की रसोई में प्रसाद पकाने का क्या चमत्कार है?
- यहाँ प्रसाद पकाने के लिए मिट्टी के 7 बर्तनों (मटकों) को एक के ऊपर एक (खड़ा) करके रखा जाता है. आश्चर्य की बात यह है कि जो मटका सबसे ऊपर (सातवें नंबर पर) होता है, उसका भोजन सबसे पहले पकता है, और नीचे वाले मटके का भोजन सबसे अंत में पकता है. पूरा भोजन लकड़ी की आग और भाप की मदद से ही पकाया जाता है
- 7. रथ यात्रा के तीनों रथों के नाम क्या हैं और वे अलग कैसे हैं?
रथ यात्रा में तीनों भाई-बहनों के लिए अलग-अलग रथ होते हैं, जिनकी रचना और रंग तय होते हैं: - नंदीघोष: यह भगवान जगन्नाथ का रथ है। इसका रंग पीला और लाल होता है। इसमें 16 पहिये होते हैं और इसकी ऊंचाई सबसे ज्यादा होती है।
- तालध्वज : यह बड़े भाई बलभद्र जी का रथ है। इसका रंग हरा और लाल होता है। इसमें 14 पहिये होते हैं।
- दर्पदलन: इसे ‘पद्म रथ’ भी कहते हैं, जो बहन सुभद्रा का रथ है। इसका रंग काला और लाल होता है। इसमें 12 पहिये होते हैं।
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