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सीता नवमी 2026 (Sita Navami 2026) – ज्ञान की बातें

सितम्बर 8, 2025 अमित भारद्वाज 0 comments

सनातन धर्म में सीता नवमी का खास महत्व है। इस दिन जगत जननी मां सीता की पूजा की जाती है। साथ ही सुख और सौभाग्य में वृद्धि के लिए व्रत रखा जाता है। विवाहित महिलाएं सीता नवमी के दिन व्रत रख भगवान श्रीराम और मां जानकी की भक्ति भाव से पूजा करती हैं। धार्मिक मत है कि वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर भगवान राम और मां जानकी की पूजा करने से घर में सुख-शांति, समृद्धि एवं खुशहाली आती है। साथ ही जीवन में व्याप्त सभी प्रकार के दुख और संकट दूर हो जाते हैं। इस शुभ अवसर पर मंदिरों में भगवान राम और मां जानकी की विशेष पूजा की जाती है। 

सीता नवमी का महत्व

हिंदू धर्म में सीता नवमी का विशेष महत्व है. शास्त्रों व पुराणों के अनुसार, वैशाख मास की नवमी तिथि को पुष्य नक्षत्र के मध्याह्न काल में राजा जनक संतान प्राप्ति की कामना के लिए यज्ञ करने के लिए भूमि को तैयार कर रहे थे. जब राजा जनक हल चला रहे थे, तभी उनको पृथ्वी से एक बालिक की प्राप्ति हुई थी. इसलिए नवमी तिथि को सीता माता को जन्मोत्सव मनाया जाता है. त्रेतायुग में भगवान विष्णु ने राम और माता लक्ष्मी ने सीता के रूप में जन्म लिया था. इस दिन भगवान राम और माता सीता की पूजा अर्चना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति भी होती है. यह व्रत करने से जीवन में सुख-शांति आती है और वैवाहिक जीवन मजबूत रहता है.

सीता नवमी 2026 मुहूर्त

सीता नवमी शनिवार, अप्रैल 25, 2026 को

सीता नवमी मध्याह्न मुहूर्त – 11:01 AM से 01:38 PM

सीता नवमी मध्याह्न का क्षण – 12:19 PM

नवमी तिथि प्रारम्भ – अप्रैल 24, 2026 को 07:21 PM बजे

नवमी तिथि समाप्त – अप्रैल 25, 2026 को 06:27 PM बजे

सीता नवमी पूजा विधि

  • सुबह उठें स्नान करें और साफ वस्त्र धारण करें।
  • पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें।
  • एक वेदी पर लाल या पीला वस्त्र बिछाएं।
  • माता सीता और भगवान राम की प्रतिमा स्थापित करें।
  • हाथ में जल, अक्षत, और फूल लेकर माता सीता का ध्यान करते हुए पूजा का संकल्प लें।
  • माता सीता और भगवान राम का आवाहन करें।
  • उन्हें मौली, अक्षत, चंदन, सिंदूर, पुष्प, धूप, दीप, फल और मिठाई आदि चढ़ाएं।
  • माता सीता के मंत्रों का जाप करें।
  • सीता नवमी की व्रत कथा सुनें या पढ़ें।
  • अंत में माता सीता और भगवान राम की आरती करें।
  • पूजा के बाद भोग घर के सदस्यों और अन्य लोगों में बांटें।

सीता नवमी की कथा

रामायण के अनुसार, एक बार मिथिला में लंबे समय से वर्षा नहीं हो रही थी। इस बात को लेकर राजा जनक बेहद चिंतित हुए। उन्होंने इस विषय को लेकर ऋषि-मुनियों से विचार-विमर्श किया और समस्या का समाधान करने का अनुरोध किया। ऐसे में ऋषि-मुनियों ने राजा जनक को खेत में हल चलाने की राय दी। ऋषि-मुनियों ने कहा कि यदि राजा जनक आप ऐसा ही करेंगे, तो इंद्र देवता की कृपा अवश्य बरसेगी। राजा जनक ने ऋषि-मुनियों के आदेश का पालन कर वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि के दिन खेत में हल चलाया। इस दौरान उनके हल से कोई वस्तु टकराई, यह देख राजा जनक ने सेवादारों से उस जगह की खुदाई करवाई।

उस जगह की खुदाई के दौरान उन्हें एक कलश मिला, जिसमें एक कन्या थी। राजा जनक ने उन्हें अपनी पुत्री मानकर उनका पालन-पोषण किया। राजा जनक ने उस कन्या का नाम सीता रखा। तभी से हर वर्ष वैशाख माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर सीता नवमी मनाई जाती है।

सीता नवमी के दिन क्या न करे

  • सीता नवमी का पावन दिन शुद्धता और पवित्रता से जुड़ा है, इसलिए इस दिन भूलकर भी अपवित्र या अशुद्ध कामों को करने से बचना चाहिए. इस दिन क्रोध, वाद-विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
  • मन में किसी के प्रति ईर्ष्या या क्रोध भावना ना लाएं. इस दिन घर आए किसी भी व्यक्ति का अपमान ना करें और किसी के प्रति अनादर भाव ना रखें.
  • सीता नवमी का दिन धार्मिक दृष्टिकोण से बहुत ही शुभ माना जाता है. इसलिए इस दिन मांस-मदिरा या तामसिक भोजन का सेवन न करें.
  • मां सीता को देवी लक्ष्मी का ही रूप माना जाता है और देवी लक्ष्मी को गंदनी बिल्कुल भी पसंद नही है. इसलिए सीता नवमी के दिन घर को गंदा ना रखें. 
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